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लड़खड़ाने की वजह सिर्फ नशा ही नहीं, हो सकते हैं ये कारण भी

Mon, 02 Apr 2018 04:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 02 Apr 2018 04:18 PM IST
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experts gave information about some diseases in kgmu
डॉ. अचल श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ के केजीएमयू में रविवार को तीन दिवसीय एनुअल कॉन्फ्रेंस ऑफ ट्रॉपिकल न्यूरोलॉजी (ट्रॉपिकॉन-2018) में विशेषज्ञों ने कई बीमारियों के बारे में जानकारी दी। कहा-बीमारी ठीक होने के बाद भी जांच जरूर कराएं।
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नई दिल्ली एम्स से आए विशेषज्ञ डॉ. अचल श्रीवास्तव बताया कि अगर आप सड़क पर किसी व्यक्ति को लड़खड़ाते हुए देखें तो यह जरूरी नहीं कि वह नशे में ही है। यह स्पाइनोसेरेबेलर डीजेनरेशन जेनेटिक बीमारी हो सकती है।
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इसमें मरीज चलते वक्त अपना संतुलन नहीं बना पाता है। कई दफा चलते वक्त गिर भी जाता है। अमूमन यह बीमारी 30 की उम्र के बाद लोगों में होती है।

डॉ. अचल ने बताया कि यह जेनेटिक बीमारी कुछ मरीजों में 15 वर्ष की आयु से भी शुरू हो जाती है। मस्तिष्क के पिछले हिस्से में सेरेब्रम होता है। यह बैलेंस का काम करता है। इसी में गड़बड़ी से पूरा सिस्टम बिगड़ता हैै।
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खसरे के वायरस से हो जाएं सावधान

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डॉ. हरदीप सिंह - फोटो : अमर उजाला

अगर बच्चों में खसरे की बीमारी का वायरस ठीक होने बाद भी छूट गया तो सावधान हो जाएं। यह वायरस कुछ साल बाद बीमारी बनकर उभरता है।

इसमें दिमागी कमजोरी, मिर्गी के दौरे पड़ना, हाथ में कंपन होने जैसी समस्याएं आती हैं। इनका इलाज संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में खसरे की बीमारी ठीक होने बाद भी जांच कराएं ताकि पता चल सके कि वायरस का अंश बचा तो नहीं है।

यह जानकारी केजीएमयू के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. हरदीप सिंह ने दी। डॉ. हरदीप ने बताया कि 12 से 14 प्रतिशत मरीजों में ऐसे मामले सामने आए हैं।

20 साल बाद भी अटैक कर सकता रेबीज वायरस

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डॉ. दिनकर कुलश्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला
लोहिया संस्थान के डॉ. दिनकर कुलश्रेष्ठ ने बताया कि रेबीज का वायरस 20 साल बाद भी अटैक कर सकता है। अमूमन लोगों का मानना है कि पालतू जानवर में रेबीज का खतरा नहीं होता है।

जानवर की लार में भी रेबीज होता है। कुत्ता अगर काटे तो उस पर मिर्च बिल्कुल न लगाएं, जख्म को अच्छी तरह से धोएं। फौरन फिजिशयन से संपर्क करके वैक्सीन लगवाएं।
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