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कठौता झील के विस्तार पर जमीन का अड़ंगा

Fri, 12 Mar 2021 01:52 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 01:52 AM IST
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Expansion of Kathauta lake  in pending
राजधानी में गर्मी में बढ़ सकती है पानी की समस्या। - फोटो : ??? ?????
अतुल भारद्वाज
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ट्रांस गोमती क्षेत्र में पानी की मांग को पूरा करने के लिए कठौता झील के विस्तार पर जमीन रोड़ा बन रही है। मत्स्य विभाग ने अपने तालाब को कठौता झील के विस्तार के लिए देने से मना कर दिया है।
मत्स्य विभाग का कहना है कि इस तालाब का पट्टा 2028 तक के लिए एक निजी फर्म को किया जा चुका है।
अब प्रशासन ने एलडीए सचिव पवन गंगवार से पूरे प्रकरण पर रिपोर्ट मांगी है। सचिव ने भी संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले में जानकारी देने को कहा है।
इससे पहले जल निगम के प्रबंध निदेशक ने मत्स्य विभाग को पत्र लिखा था। इसके जरिए कठौता झील के विस्तार के लिए नजदीक में दूसरे तालाब की जमीन मांगी थी।
जल निगम का कहना है कि सिंचाई विभाग नहर की सफाई के लिए अभी तक 21 दिन तक जल आपूर्ति बंद करता था। अब यह समय-सीमा 45 दिन करने जा रहा है।
ऐसे में जलकल विभाग को अधिक पानी रिजर्व रखना होगा। वहीं, आबादी बढ़ने से कठौता झील स्थित तीसरे वाटर वर्क्स से आपूर्ति की मांग भी बढ़ी है। इसके लिए हुए सर्वे में कठौता झील से लगी जमीन ही उपयुक्त पाई गई।
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वहीं, मत्स्य विभाग के निदेशक ने अब एक पत्र जल निगम के अलावा एलडीए वीसी को भेजा है। उनका कहना है कि पूर्व में कठौता झील और 80 एमएलडी के वाटर वर्क्स का निर्माण करने के लिए 40 एकड़ जमीन एलडीए को अपने पास से देनी थी।
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लेकिन बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए एलडीए ने जल निगम को 2003 में मत्स्य विभाग की 98 एकड़ जमीन दे दी। अभी तक दूसरी जमीन मत्स्य विभाग को नहीं मिली है। इसकी प्रतिपूर्ति भी अभी तक नहीं हो सकी है।
इन इलाकों में बढ़ेगा जल संकट
कठौता झील से अभी इंदिरा नगर और गोमती नगर के अलावा आसपास के इलाकों में आपूर्ति की जाती है। लगातार मांग बढ़ने से यहां जल संकट पैदा होने लगा है। इससे निपटने के लिए वाटर वर्क्स की क्षमता भी दोगुनी की जानी है। ऐसा तभी होगा जब कठौता झील की भी क्षमता बढ़े। इससे सिंचाई विभाग से भी अधिक पानी की मांग की जा सकेगी।

तालाब 2028 तक पट्टे पर, नहीं दे सकते
मत्स्य विभाग के निदेशक एसके सिंह का कहना है कि जल निगम द्वारा मांगे जा रहे तालाब को मछली पालन के लिए 10 साल के लिए एक निजी फर्म को दिया गया है। यह ठेका 2019 में हुआ था। इस पटटे की अवधि 30 जून 2028 तक है। ऐसे में तालाब को विधिक रूप से देना संभव नहीं होगा।
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