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निजी ब्लड बैंक कहां से ला रहे खून, देना होगा रिकार्ड
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राजधानी के निजी ब्लड बैंकों पर शिकंजा करने की तैयारी है। एफएसडीए ने सभी निजी ब्लड बैंकों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके यहां खून की आपूर्ति कहां से हुई। इसका रिकॉर्ड भी तलब किया गया है। इससे निजी ब्लड बैंकों में खलबली मची है। एफएसडीए के अफसरों का कहना है कि सभी निजी ब्लड बैंकों को तीन दिन में जवाब देना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
एसटीएफ, एफएसडीए की संयुक्त टीमों ने मिडलाइफ, नारायणी, स्वास्तिक, मानव ब्लड बैंकों पर छापा मारा था। वहां पर दूसरे राज्यों से खून मंगवाने का खुलासा हुआ था। ड्रग विभाग ने बाकी बचे 26 निजी ब्लड बैंकों को भी पत्र भेजकर उनके यहां खून का स्टॉक व मंगाए जाने का रिकॉर्ड मांगा है। सहायक आयुक्त औषधि बृजेश ने बताया कि ब्लड बैंकों से पूछा गया है कि उन्होंने कोई कैंप लगाया या किसी दूसरे राज्य से खून मंगाया। इसका रिकॉर्ड मांगा गया है। जवाब आने पर सभी जगह से नमूने लेकर जांच कोे भेजे जाएंगे, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
रक्तदान शिविर भी नहीं लगे, फिर भी खून की निर्बाध आपूर्ति
राजधानी में चैरिटेबल ब्लड बैंक की आड़ में खून का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। अहम बात यह है कि निजी ब्लड बैंकों को कैंप लगाने से पहले उस जिले के सीएमओ की अनुमति लेनी होती है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में कैंप लगाया जाता है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न होने पाए। इस साल अभी तक सीएमओ कार्यालय स्तर से किसी निजी ब्लड बैंक को कैंप लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। फिर भी उनके यहां खून की निर्बाध आपूर्ति हो रही है। सभी निजी ब्लड बैंकों में हर ग्रुप का पर्याप्त खून उपलब्ध है। सीएमओ डॉ. मनोज ने बताया उनके यहां अभी तक कोई भी शिविर लगाने का आवेदन नहीं आया था।
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एसटीएफ, एफएसडीए की संयुक्त टीमों ने मिडलाइफ, नारायणी, स्वास्तिक, मानव ब्लड बैंकों पर छापा मारा था। वहां पर दूसरे राज्यों से खून मंगवाने का खुलासा हुआ था। ड्रग विभाग ने बाकी बचे 26 निजी ब्लड बैंकों को भी पत्र भेजकर उनके यहां खून का स्टॉक व मंगाए जाने का रिकॉर्ड मांगा है। सहायक आयुक्त औषधि बृजेश ने बताया कि ब्लड बैंकों से पूछा गया है कि उन्होंने कोई कैंप लगाया या किसी दूसरे राज्य से खून मंगाया। इसका रिकॉर्ड मांगा गया है। जवाब आने पर सभी जगह से नमूने लेकर जांच कोे भेजे जाएंगे, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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रक्तदान शिविर भी नहीं लगे, फिर भी खून की निर्बाध आपूर्ति
राजधानी में चैरिटेबल ब्लड बैंक की आड़ में खून का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। अहम बात यह है कि निजी ब्लड बैंकों को कैंप लगाने से पहले उस जिले के सीएमओ की अनुमति लेनी होती है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में कैंप लगाया जाता है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न होने पाए। इस साल अभी तक सीएमओ कार्यालय स्तर से किसी निजी ब्लड बैंक को कैंप लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। फिर भी उनके यहां खून की निर्बाध आपूर्ति हो रही है। सभी निजी ब्लड बैंकों में हर ग्रुप का पर्याप्त खून उपलब्ध है। सीएमओ डॉ. मनोज ने बताया उनके यहां अभी तक कोई भी शिविर लगाने का आवेदन नहीं आया था।
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