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इस्लाम के खिलाफ नहीं है अंग्रेजी : उलमा ने कहा कि दारुल उलूम देवबंद के खिलाफ फैला रहे हैं प्रोपोगेंडा
Fri, 16 Jun 2023 06:49 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 16 Jun 2023 06:49 PM IST
सार
उलमा ने ये भी माना कि हर संस्थान के अपने उसूल और व्यवस्था होती है। कोई भी संस्थान अपने छात्र को किसी दूसरी जगह से शिक्षा लेने की इजाजत नही देता है। उनका ये भी कहना है कि साजिश के तहत दारुल उलूम देवबंद के आदेश को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
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दारुल उलूम देवबंद
विस्तार
इस्लामी तालीम के लिये दुनिया भर में प्रसिद्ध दारुल उलूम देवबंद में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान अंग्रेजी व अन्य भाषा की शिक्षा लेने पर निष्कासित करने की खबर पर उलमा ने साफतौर पर कहा कि अंग्रेजी या किसी भी भाषा की शिक्षा हासिल करना इस्लाम के खिलाफ नहीं है।
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उलमा ने ये भी माना कि हर संस्थान के अपने उसूल और व्यवस्था होती है। कोई भी संस्थान अपने छात्र को किसी दूसरी जगह से शिक्षा लेने की इजाजत नहीं देता है। उनका ये भी कहना है कि साजिश के तहत दारुल उलूम देवबंद के आदेश को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
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देश के सभी बड़े मदरसों में दी जाती है अंग्रेजी की शिक्षा
देश भर के सभी बड़े मदरसों में अंग्रेजी की शिक्षा पहले से ही दी जा रही है। यहां तक कि दारुल देवबंद में भी अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। कुरान मजीद का अनुवाद भी उर्दू, हिंदी के अलावा अंग्रेजी में भी मौजूद है। ऐसे में अंग्रेजी की शिक्षा इस्लाम के खिलाफ नहीं है।
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यूके, अमेरिका सहित तमाम देशों में मौजूद मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा का माध्यम ही अंग्रेजी रहता है। दारुल उलूम देवबंद ने अपने छात्रों के लिये जो नोटिस जारी किया है वो किस परिप्रेक्ष्य में है, इसकी मालूमात की जानी चाहिये। बगैर सही मालूमात के इस तरह का प्रोपेगेंडा फैलाना सही नहीं है।
- मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, ईदगाह के इमाम एवं चेयरमैन इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया
एक साथ दो जगह पढ़ने की इजाजत नहीं देता कोई भी संस्थान
हर संस्थान और इदारे के अपने उसूल और व्यवस्था होती है। छात्र जिस संस्थान में शिक्षा हासिल कर रहा है उसे वहीं के पाठयक्रम को पढ़ना होता है और उसी तालीमी निजाम पर अमल करना होता है। कोई भी संस्थान इसकी इजाजत नहीं देता है कि एक संस्थान में पढ़ने वाला छात्र दूसरी जगह से भी तालीम हासिल करे।
यही बात दारुल उलूम देवबंद ने भी कही है कि कोई भी छात्र को दूसरे संस्थान से शिक्षा लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। दारुल उलूम देवबंद के बारे में प्रोपोगेंडा के तहत ये कहा जा रहा है कि दारुल उलूम ने अंग्रेजी की तालीम हासिल करने पर निष्कासन का हुक्म जारी किया है। ये सरासर गलत है, इस तरह का प्रोपोगेंडा वही लोग फैला रहे हैं जो मदरसों के खिलाफ हमेशा से प्रोपोगेंडा फैलाने की साजिश करते आ रहे हैं।
- मौलाना सुफियान निजामी, प्रवक्ता दारुल उलूम निजामिया फरंगी महल