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रोजगार भी गया, पारिश्रमिक भी नहीं मिली
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पिपरहवा (बलरामपुर)। भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में संचालित चार स्थानों के बार्डर बूथों को ढाई माह पहले बंद कर दिया गया था। इससे इन बूथों पर काम करने वालों का रोजगार छिन गया। ढाई माह बीत जाने के बाद भी इन बूथों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया है। बार्डर बूथ पर कार्यरत आक्रोशित दैनिक कर्मियों ने डीएम से बकाया भुगतान कराने की मांग की है।
बार्डर बूथ पर दैनिक रुप से काम करने वाले कर्मी कृपाराम, राम मनोहर, सतीश सिंह, नीलम, सोनिया, शहनाज इत्यादि ने डीएम को भेजे गए पत्र में बताया कि भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में स्वास्थ्य विभाग के चार बार्डर बूथ संचालित किए जा रहे थे। बार्डर बूथों का संचालन करने के लिए दैनिक कर्मियों को रखा गया था। बार्डर बूथ के सभी दैनिक कर्मियों को कैंप लगाकर जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियों की खुराक पिलाने का जिम्मा सौंपा गया था। आठ वर्षो से बार्डर बूथ के दैनिक कर्मी अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं।
त्रिलोकपुर जरवा, नंदमहरा, पचपेड़वा, बालापुर व बनकटवा बार्डर बूथों पर करीब 20 हजार बच्चों को हर साल सेहतमंद रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता रहा। अप्रैल 2021 से सभी बार्डर बूथ बंद कर दिए गए। जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक के बकाया पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया है। बकाया पारिश्रमिक का भुगतान न होने से दैनिक कर्मियों में भारी आक्रोश है।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. अरुण वर्मा ने बताया कि बार्डर बूथ के दैनिक कर्मियों का पारिश्रमिक मार्च माह में भुगतान के लिए आया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण बजट खर्च नहीं हो सका। विभाग से बजट खर्च करने की अनुमति मिल गई है। जल्दी सभी को बकाया भुगतान मिल जाएगा।
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बार्डर बूथ पर दैनिक रुप से काम करने वाले कर्मी कृपाराम, राम मनोहर, सतीश सिंह, नीलम, सोनिया, शहनाज इत्यादि ने डीएम को भेजे गए पत्र में बताया कि भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में स्वास्थ्य विभाग के चार बार्डर बूथ संचालित किए जा रहे थे। बार्डर बूथों का संचालन करने के लिए दैनिक कर्मियों को रखा गया था। बार्डर बूथ के सभी दैनिक कर्मियों को कैंप लगाकर जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियों की खुराक पिलाने का जिम्मा सौंपा गया था। आठ वर्षो से बार्डर बूथ के दैनिक कर्मी अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं।
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त्रिलोकपुर जरवा, नंदमहरा, पचपेड़वा, बालापुर व बनकटवा बार्डर बूथों पर करीब 20 हजार बच्चों को हर साल सेहतमंद रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता रहा। अप्रैल 2021 से सभी बार्डर बूथ बंद कर दिए गए। जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक के बकाया पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया है। बकाया पारिश्रमिक का भुगतान न होने से दैनिक कर्मियों में भारी आक्रोश है।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. अरुण वर्मा ने बताया कि बार्डर बूथ के दैनिक कर्मियों का पारिश्रमिक मार्च माह में भुगतान के लिए आया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण बजट खर्च नहीं हो सका। विभाग से बजट खर्च करने की अनुमति मिल गई है। जल्दी सभी को बकाया भुगतान मिल जाएगा।