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यूपी सरकार के सोशल मीडिया सेल के कर्मचारी ने लगाई फांसी, वरिष्ठों पर गंभीर आरोप

Thu, 20 May 2021 09:37 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 20 May 2021 09:37 PM IST
सार

लखनऊ में पार्थ श्रीवास्तव ने बुधवार की सुबह फांसी लगा ली। पार्थ एक निजी सोशल मीडिया सेल के लिए काम करता था। यह सेल सरकार के लिए काम करती है। पार्थ ने अपने कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाया है।

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Employee of UP government's social media cell hangs, serious allegations on seniors
साइबर सेल कर्मचारी - फोटो : amar ujala

विस्तार

इंदिरानगर के वैशाली इंक्लेव में रहने वाले पार्थ श्रीवास्तव (28) ने बुधवार की सुबह फांसी लगा ली। गंभीर हालत में परिवारीजन इलाज के लिए लोहिया अस्पताल लेकर गये। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पार्थ एक निजी सोशल मीडिया सेल के लिए काम करता था। यह सेल सरकार के लिए काम करती है। परिवारीजनों ने एक सुसाइड नोट का जिक्र किया है। जिसमें पार्थ ने अपने कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने इस सुसाइड नोट के मिलने से इंकार किया है।

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इंदिरानगर सेक्टर-9 के वैशाली इंक्लेव में रहने वाले रवींद्र नाथ श्रीवास्तव का बेटा पार्थ एक सोशल मीडिया सेल में काम करता था। यह मीडिया सेल उत्तर प्रदेश सरकार के लिए काम करती है। बुधवार को उसने अपने घर में फांसी लगा ली। उसका शव कमरे में लटका देख पिता ने आनन-फानन में नीचे उतारा और राम मनोहर लोहिया में लेकर गये। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। रवींद्र श्रीवास्तव ने इसकी जानकारी इंदिरानगर पुलिस को दी। प्रभारी निरीक्षक अजय प्रकाश त्रिपाठी के मुताबिक शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पिता की तहरीर पर कार्रवाई की जा रही है।

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सुसाइड नोट में लिखा मेरी आत्म हत्या एक कत्ल है...

पार्थ श्रीवास्तव ने खुदकुशी करने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था। वहीं अपने ट्वीटर हैंडल पर एक मैसेज भी वायरल किया। जिसमें वरिष्ठ कर्मचारियों पर आरोप लगाया गया। जिसे उसकी मौत की सूचना मिलने के बाद डिलीट कर दिया गया। सुसाइड नोट में पार्थ ने लिखा कि उसके वरिष्ठ पुष्पेंद्र ने उसे रात के 12.40 बजे कॉल किया। यह कॉल सामान्य नहीं थी। व्हाट्सएप कॉल के जरिए उन्होंने बात की। जिसमें उन्होंने प्रताड़ना का दोष संतोष पर डाला। इसका यकीन दिलाया कि वह मेरे शुभ चिंतक ही रहे हैं। जबकि सत्य तो यह है कि वह सिर्फ और सिर्फ एक महिला कर्मचारी का नाम लिखते हुए कहा कि उसके शुभचिंतक है।

पुष्पेंद्र को महिला कर्मचारी के अलावा किसी की चिंता नहीं रही है। बाकी को छोटी सी छोटी गलती पर नाराज होते रहें। अभय भैया व महेंद्र भैया से सिर्फ उनका गुणगान करते रहे हैं। मुझे आश्चर्य प्रणव भैया पर होता है कि वह यह सब देखने समझने के बाद बावजूद पुष्पेंद्र भैया के साथ कैसे व क्यों देते हैं। मैने जब काम शुरू किया तबसे सबसे अधिक इज्जत प्रणय भैया को ही दिया। मैने उनसे सीखा कि सिर्फ काम बोलता है और इंसान को उसका काम ही उसकी पहचान बनाता है। एक तरफ पुष्पेंद्र भैया मिले जो सिर्फ दूसरों की कमियां निकालते दिखे। दूसरी तरफ प्रणय भैया दिखे जो अपने कार्य से अपना नाम बनाते दिखें। मैने प्रणय को अपना आदर्श माना और सिर्फ काम के द्वारा अपना नाम बनाना चाहा। मुझसे गलतियां भी हुई पर ये गलतियां न दोहराने की पूरी कोशिश की। परंतु शैलजा जो सिर्फ चाटुकारिता कर अपनी जगह पर थी। उन्होंने गलतियों को सबके सामने उजागर कर नाकारा साबित कर ही दिया।

शैलजा जी को बहुत बहुत बधाई। मेरी आत्महत्या एक कत्ल है। जिसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ राजनीति करने वाली शैलजा व उनका साथ देने वाले पुष्पेंद्र सिंह है। अभय व महेंद्र भैया को इस बात का हल्का सा ज्ञान भी नहीं कि लखनऊ वाले कार्यालय में चल क्या रहा था। मै आज भी मरते दम तक महेंद्र और अभय भैया को अपने माता-पिता जितनी ही इज्जत करता हूं। वहीं उसने एक लाइन और लिखी है जिसमें सूचना विभाग के एक बड़े अधिकारी का नाम का जिक्र किया है। कहा कि उम्मीद करता हूं कि वह इस मामले में उचित कार्यवाही जरूर करेंगे। हालांकि प्रभारी निरीक्षक अजय प्रकाश त्रिपाठी ने सुसाइड नोट के मिलने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि अगर परिवारीजन किसी पर आरोप लगाते हुए तहरीर और सुसाइड नोट देते हैं तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
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