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Lucknow News: विकास परियोजनाओं के बीच विरासत बचाने पर जोर
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पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम समापन समारोह
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लखनऊ। पुरातत्व एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता के लिए आयोजित 12 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम का समापन बृहस्पतिवार को हुआ। समापन समारोह में पद्मश्री डॉ. बीआर मणि मुख्य अतिथि और प्रो. एसएन कपूर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. केके थपल्याल ने की। साल्वेज ऑपरेशंस इन आर्कियोलॉजी विषय पर व्याख्यान देते हुए डॉ. मणि ने कहा कि बांध, जलाशय, सड़क और रेलवे जैसी विकास परियोजनाओं से प्रभावित पुरातात्विक स्थलों का समयबद्ध सर्वेक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, उत्खनन और संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने स्मारकों को उनके मूल स्थान पर संरक्षित करने पर जोर दिया। समापन पर निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं और पाठ्यक्रम के करीब 200 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए। निदेशक रेनू द्विवेदी ने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार जताया। (संवाद)
बीआर मणि का योगदान
प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् बीआर मणि को 2026 में पुरातत्व और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उस टीम का नेतृत्व किया था। इस टीम ने वैज्ञानिक खुदाई कर ऐतिहासिक साक्ष्य सामने रखे थे। वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक, नेशनल म्यूजियम के महानिदेशक और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज के पूर्व कुलपति भी रह चुके हैं।
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बीआर मणि का योगदान
प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् बीआर मणि को 2026 में पुरातत्व और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उस टीम का नेतृत्व किया था। इस टीम ने वैज्ञानिक खुदाई कर ऐतिहासिक साक्ष्य सामने रखे थे। वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक, नेशनल म्यूजियम के महानिदेशक और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज के पूर्व कुलपति भी रह चुके हैं।
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