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यूपी: इलेक्ट्रो होम्योपैथी की प्रैक्टिस व पढ़ाई पर रोक नहीं पर नाम के आगे नहीं लिख सकेंगे डॉक्टर

Mon, 20 May 2024 12:20 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 20 May 2024 12:20 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश में चिकित्सा पद्धति इलेक्ट्रो होम्योपैथी की पढ़ाई और प्रैक्टिस पर कोई रोक नहीं है। पढ़ाई करने वाले संस्थान किसी को डिग्री या डिप्लोमा नहीं दे सकते हैं।

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Electro Homeopathy practitioners can not write doctor before their name.
- फोटो : ANI

विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश में चिकित्सा पद्धति इलेक्ट्रो होम्योपैथी की पढ़ाई और प्रैक्टिस पर कोई रोक नहीं है, लेकिन प्रैक्टिस करने वाले अपने नाम के आगे डॉक्टर नहीं लिख सकते हैं। सरकार ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी के लिए अभी कोई कानूनी प्रावधान नहीं बनाया है, इसलिए किसी को भी इसकी डिग्री या डिप्लोमा नहीं दिया जा सकता। साथ ही संस्थान भी किसी को भी डिग्री या डिप्लोमा नहीं दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी की पढ़ाई पर भी रोक नहीं है, लेकिन इसकी शिक्षा दे रहे संस्थान केवल प्रमाणपत्र जारी कर सकते हैं।

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न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश हरदोई और अयोध्या के इलेक्ट्रो होम्योपैथी के दो प्रैक्टिसनरों राजेश कुमार व एक अन्य की याचिका पर दिया। याचिका 2009 में दाखिल की गई थी। इसके बाद समय के साथ केंद्र सरकार, राज्य सरकार, सुप्रीम कोर्ट और कुछ हाईकोर्ट ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी के विषय में आदेश जारी किए। उन सभी का संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने 25 नवंबर, 2003 को एक आदेश जारी किया था। जिसमें इलेक्ट्रो होम्योपैथी की प्रैक्टिस को लेकर कुछ दिशा-निर्देश हैं। कहा कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी की प्रैक्टिस में उन दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना जरूरी है। इलेक्ट्रो होम्योपैथी की प्रैक्टिस से याचीगण को तब तक न रोका जाए जब तक कि सरकार इसको लेकर कोई नियम नहीं बनाती है। कोर्ट ने इस टिप्पणी व आदेश के साथ याचिका निस्तारित कर दी।

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