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यूपी: बिजली के निजीकरण का टेंडर जारी होते ही 2 जुलाई को देश भर में होगी सांकेतिक हड़ताल, ये है कार्यक्रम

Mon, 09 Jun 2025 11:24 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 09 Jun 2025 11:24 PM IST
सार

यूपी में बिजली के निजीकरण का विरोध लगातार जारी है। निजीकरण का टेंडर जारी होते ही बिजली विभाग के कर्मचारियों ने दो जुलाई को सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है।

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Electricity privatization: strike to be held across the country on July 25, nationwide strike on July 9
- फोटो : amar ujala

विस्तार

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की राष्ट्रीय कोर कमेटी की सोमवार को दिल्ली में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण का टेंडर होते ही पूरे देश के 27 लाख बिजली कर्मी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल करेंगे। कोऑर्डिनेशन कमेटी ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रदेश में चल रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में दो जुलाई को पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

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दिल्ली बैठक में हिस्सा लेने वाले ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बताया कि कोऑर्डिनेशन कमेटी ने यह भी निर्णय लिया कि पूरे देश में खासकर उप्र में चल रही बिजली की निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में आगामी 09 जुलाई को देशभर के तमाम बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने केंद्र सरकार से मांग की है कि किसानों, आम घरेलू उपभोक्ताओं और गरीब उपभोक्ताओं के व्यापक हित में केंद्र सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर उत्तर प्रदेश में चल रही बिजली की निजीकरण की प्रक्रिया को निरस्त कराए।
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22 जून को होने वाले प्रदर्शन की तैयारी व्यापक
लखनऊ में 22 जून को किसानों, आम घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों की हो रही महापंचायत में कोऑर्डिनेशन कमेटी के राष्ट्रीय पदाधिकारी शामिल होंगे। 22 जून की महापंचायत बिजली के निजीकरण के विरोध में निर्णायक जन आंदोलन का फैसला लिया जाएगा।
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नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने निजीकरण के विरोध में 194 दिन से लगातार उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन की सराहना की। उन्होंने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं के दमन की निंदा की। यह भी चेतावनी दी गई कि यदि बिजली कर्मियों का दमन न रुका तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शक नहीं रहेंगे। लोकतांत्रिक ढंग से इसके विरोध में आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।


ये रहे बैठक में मौजूद
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की दिल्ली में हुई बैठक में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे, ऑल इंडिया पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल अभिमन्यु धनकड़, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज के जनरल सेक्रेटरी मोहन शर्मा, इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी सुदीप दत्ता, ऑल इंडिया पावर मेंस फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी आरके शर्मा, तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड इंप्लाइज फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी ए सेकीजार, इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के एके जैन, यशपाल शर्मा और सत्यपाल मुख्यतय: उपस्थित थे।
 

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