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Lucknow News: लाखों की वसूली करने वाली बिजली सखियां बेरोजगार

Mon, 01 Dec 2025 02:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Dec 2025 02:12 AM IST
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Electricity friends who collected lakhs of rupees are unemployed
बिजली सखी रीता मौर्य बिल जमा करते हुए।
लखनऊ। राजधानी के गांवों में हर मौसम में पसीना बहाकर प्रति माह 15 से 20 लाख रुपये तक का बिजली राजस्व जुटाने वाली बिजली सखियां आज रोजगार के संकट से जूझ रही हैं। कारण साफ है एक ओर विभाग को अब महिलाओं से बिल वसूली कराने में दिलचस्पी नहीं रही, दूसरी ओर गांव-गांव लग रहे स्मार्ट मीटर उनकी आजीविका पर ताला लगा रहे हैं।
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जहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, वहां उपभोक्ता अब बिल जमा करने की जगह मोबाइल की तरह रिचार्ज कर रहे हैं। वहीं, कई क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर रीडिंग गड़बड़ आने से उपभोक्ता बिल जमा करने से बच रहे हैं। इन दोनों वजहों से बिजली सखियों की कमाई लगभग खत्म हो चुकी है।
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एक बिल पर 20 रुपये की कमाई

लखनऊ के आठ ब्लॉकों माल, मलिहाबाद, चिनहट, बीकेटी, काकोरी, गोसाईंगंज, सरोजनीनगर व मोहनलालगंज में 400 से अधिक महिलाएं बिजली सखी के रूप में काम कर रही थीं लेकिन फिलहाल माल और मलिहाबाद में सिर्फ तीन बिजली सखियां ही सक्रिय हैं।
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14 हजार की कमाई 3 हजार में सिमट गई
रहीमाबाद की प्रतिमा मिश्रा 2022 से बिजली सखी हैं। वह बताती हैं कि पहले हर महीने 12-14 हजार रुपये आराम से मिल जाते थे। अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद मुश्किल से 2-3 हजार रुपये बचते हैं।

बिल खत्म, पेट्रोल के भी पैसे नहीं

दुबग्गा निवासी शशि गुप्ता दो साल पहले काम शुरू करते समय 20-25 हजार रुपये महीना कमा रही थीं। अब इतने बिल भी नहीं मिलते कि स्कूटी का पेट्रोल निकल आए।

बिजली शिविर बंद, रोजगार भी बंद
रीता मौर्या के अनुसार, जब से ग्रामीण इलाकों में बिजली शिविर लगने बंद हुए हैं, उपभोक्ताओं की बिल जमा करने की रुचि और अधिक कम हो गई है। इससे कई सखियों का रोजगार लगभग समाप्त हो गया।


वर्जन

माल उपखंड में बिजली सखियों से गांव-गांव बिल जमा कराने का काम कराया जा रहा है। हालांकि, उनके उपखंड में दो बिजली सखियां ही इस राजस्व वसूली मुहिम में जुड़ी हैं।
- दिनेश कुमार प्रजापति, एसडीओ माल
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