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लखनऊ समेत 31 शहरों में जल प्रदूषण रोकने की कवायद, लगेंगे फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट
Thu, 24 Jun 2021 10:58 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 24 Jun 2021 10:58 AM IST
सार
इसके तहत सीवरेज सुविधा वंचित शहरी क्षेत्र के घरों के शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवरेज का ट्रीटमेंट करने के लिए ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ किया गया है।
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विस्तार
प्रदेश के शहरी इलाकों में बढ़ते जल प्रदूषण को नियंत्रित करने को लेकर राज्य स्तर पर कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत सीवरेज सुविधा वंचित शहरी क्षेत्र के घरों के शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवरेज का ट्रीटमेंट करने के लिए ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ किया गया है। इसके तहत शहरों के उन इलाकों में ‘फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट’ लगाए जाएंगे। पहले चरण में प्रदेश के 33 शहरों का चयन किया गया है। इनमें लखनऊ और कानपुर के अलावा 31 शहर अमृत योजना से संबंधित हैं।
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क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्यक्ष केन्द्र (आरसीयूईएस) द्वारा किए अध्ययन के मुताबिक अमृत योजना में शामिल 60 में से 25 शहरों समेत बहुत से ऐसे शहर हैं जहां 25 से 40 प्रतिशत मकान सीवरेज सिस्टम से नहीं जुड़े हैं। इन सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए सेप्टिक टैंकों से सीवरेज निकालकर जमीन पर फेंक दिया जाता है या खुले नालों में डाल दिया जाता है जो बहकर गंगा आदि नदियों में चला जाता है। इस स्थिति से निजात पाने के लिए ही आरसीयूईएस ने ऐसे 31 शहरों के लिए ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ तैयार किया है।
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लखनऊ व कानपुर में लागू होगा ‘को-ट्रीटमेंट’ पैटर्न
लखनऊ व कानपुर ऐसे शहर हैं जहां पर गंगा एक्शन प्लान के तहत पहले से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगे हैं। दोनों शहरों में लगे एसटीपी को उसकी क्षमता के मुताबिक सीवेज उपलब्ध नहीं हो पा रहा हैं। इसलिए सेप्टेज मैनेजमेंट योजना के तहत इन दोनों शहरों में सेप्टिक टैंकों के सीवेज का ट्रीटमेंट ‘को-ट्रीटमेंट’ पैटर्न पर चलाने का फैसला किया गया है।
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इन 31 शहरों में लगेेंगे प्लांट
अयोध्या, गोंडा, अकबरपुर, बहराइच, सीतापुर, बस्ती, हरदोई, फर्रूखाबाद, अलीगढ़, हाथरस, शिकोहाबाद, फतेहपुर, बड़ौत, हापुड़, खुर्जा, शामली, देवरिया, बांदा, झांसी, ललितपुर, उरई, अमरोहा, बदायूं, चंदौसी, मुरादाबाद, पीलीभीत, शाहजहांपुर आजमगढ़, जौनपुर, मऊ व मुगलसराय।
‘यूपी में पायलट प्रोजेक्ट केतौर पर झांसी व उन्नाव में इस तरह केप्लांट लगाने का काम शुरू किया है। देश के देवन हल्ली (कनार्टक), राउरकेला व पुरी (उड़ीसा) व स्याना (महाराष्ट्र) में यह योजना लागू हो चुकी है, जिसके काफी बेहतर परिणाम सामने आएं हैं। इन शहरों की तर्ज पर यूपी में इस योजना को लागू करने का फैसला किया गया है।’ एके गुप्ता, अपर निदेशक, आरसीयूईएस