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UP News: टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क पर ED की बड़ी कार्रवाई, 13 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

Thu, 16 Jul 2026 09:56 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Thu, 16 Jul 2026 09:56 AM IST
सार

बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को घुसपैठ कराकर विभिन्न राज्यों में बसाने और विदेश में ह्यूमन ट्रैफिकिंग करने वाले गिरोह के सदस्यों के ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा। आगे की कार्रवाई की जा रही है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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ED cracks down heavily on terror funding and illegal infiltration networks conducts rapid raids 13 locations
ED - फोटो : ANI

विस्तार

बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को घुसपैठ कराने के बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दस्तावेज बनवा विभिन्न राज्यों में बसाने और विदेश में ह्यूमन ट्रैफिकिंग करने वाले सिंडीकेट के सदस्यों और एनजीओ के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने बृहस्पतिवार को छापे मारे। छापे की कार्रवाई सहारनपुर के देवबंद के अलावा पश्चिम बंगाल के कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बल्लभगढ़ और दिल्ली के डेढ़ दर्जन से अधिक ठिकानों पर जारी है। पश्चिम बंगाल के हरोआ स्थित अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम मदरसे से ईडी ने 40 लाख रुपये नकदी, 1.80 ग्राम सोना बरामद किया है। वहीं अन्य ठिकानों से भी आपत्तिजनक दस्तावेज आदि मिले हैं।

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यूपी एटीएस ने अक्टूबर, 2023 में इस सिंडिकेट का खुलासा करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं वर्ष 2024 ईडी ने एटीएस की एफआईआर के आधार पर आरोपी लोगों और एनजीओ के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। ईडी की अब तक की जांच में सामने आया है कि यह सिंडीकेट घुसपैठियों की पहचान बदलने के लिए उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड व पासपोर्ट जैसे फर्जी नागरिकता के दस्तावेज बनवाता था। इसमें यूके का उम्मा फाउंडेशन एनजीओ भी शामिल था, जिसने वर्ष 2018 से 2022 के दरम्यान अल-जमियातुल इस्लामिया दारुल उलूम मदरसा तथा कबीरबाग के मिल्लत एकेडमी के एफसीआरए खातों में भी उम्मा वेलफेयर ट्रस्ट, यूके द्वारा वर्ष 2018 से वर्ष 2022 के खातों में करीब 58 करोड़ रुपये भेजे थे।

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यह सिंडिकेट 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट' (एफसीआरए) के तहत रजिस्टर्ड पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिये काम करता था। बाद में भारत में घुसपैठ कर बसाने में मदद करने के लिए संदिग्धों को 6 हजार, 8 हजार, 10 हजार आदि जैसी छोटी किश्तों में पैसा ट्रांसफर करते थे। यह फंड शैक्षणिक कार्यों के बहाने विदेश से भेजा जाता था जबकि इसका इस्तेमाल घुसपैठियों काे बसाने में हो रहा था। साथ ही उनकी नौकरी, ई-रिक्शा दिलाने जैसे लालच भी दिया जाता था। इस काम में बांग्लादेश सीमा पर सक्रिय कुछ लोग मदद कर रहे थे।

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