{"_id":"64e0d14c3fc3e64d3c002475","slug":"easy-to-run-bulldozers-on-the-property-of-criminals-in-up-2023-08-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP News: यूपी में अब और तेज दौड़ेगा बुलडोजर, अपराधियों के खिलाफ सिर्फ एक मुकदमा दर्ज होना होगा काफी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP News: यूपी में अब और तेज दौड़ेगा बुलडोजर, अपराधियों के खिलाफ सिर्फ एक मुकदमा दर्ज होना होगा काफी
Mon, 21 Aug 2023 12:01 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Mon, 21 Aug 2023 12:01 PM IST
सार
यूपी में अपराधियों पर बुलडोजर चलाए जाने की खबरें लगातार देश भर में सुर्खियां बनती हैं। अब प्रदेश में अपराधियों के घर बुलडोजर चलाना और भी आसान हो गया है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश में अपराधियों की संपत्ति को जब्त करने के लिए केवल एक मुकदमा होना पर्याप्त होगा। उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद किसी भी अपराधी के खिलाफ यदि केवल एक मुकदमा दर्ज है, तो भी उस पर उप्र गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
विज्ञापन
बता दें कि इस अधिनियम के तहत पुलिस अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करती है। अपराध के जरिए अर्जित इन संपत्तियों पर बुलडोजर भी चलाया जाता है।
ये भी पढ़ें - सुपरस्टार रजनीकांत ने रामलला के दरबार में लगाई हाजिरी, मंदिर निर्माण को देखकर भावुक हो गए, तस्वीरें
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - सपा महासचिव शिवपाल यादव ने लगाई फिरोजाबाद से अक्षय की उम्मीदवारी पर मुहर
विज्ञापन
डीजीपी विजय कुमार द्वारा इस बाबत मातहतों को दिए गए निर्देशों में कहा गया है कि हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष यह विषय विचार हेतु प्रस्तुत हुआ कि क्या एक ही अपराध के आधार पर अभियुक्तों के विरुद्ध उप्र गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के अधीन कार्रवाई की जा सकती है।
उच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद 4 अगस्त को जारी आदेश में इसे सही ठहराया है। बीते वर्ष उच्चतम न्यायालय ने भी इस सिद्धांत को स्वीकार किया था। डीजीपी ने समस्त पुलिस आयुक्त एवं जिलों के पुलिस कप्तानों को निर्देश दिया है कि वह उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के आदेशों का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करें।