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शोध में खुलासा: विकास की दौड़ में प्रदेश के बाकी हिस्सों से अब भी पीछे है पूर्वी यूपी, जानें सबसे पिछड़े जिले

Fri, 24 Oct 2025 07:06 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Fri, 24 Oct 2025 07:06 PM IST
सार

विकास की दौड़ में प्रदेश के बाकी हिस्सों से अब भी पूर्वी यूपी काफी पीछे है। लखनऊ विश्वविद्यालय में किए गए शोध में खुलासा हुआ है। श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच जैसे जिले राज्य के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल हैं। 

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Eastern UP still lags behind rest of state in race for development learn about its most backward districts
खराब सड़क (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश को यदि एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, तो पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच विकास का संतुलन बनाना होगा। लेकिन, धरातल पर सच्चाई कुछ और है। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से की अर्थव्यवस्था पर आई एक रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

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लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. नागेंद्र कुमार मौर्य और प्रो. रोली मिश्रा की ओर से किए गए शोध में सामने आया है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिले आज भी विकास के निचले पायदान पर अटके हुए हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच, राज्य के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल हैं। शोध और इस विस्तृत अध्ययन को प्रतिष्ठित- इंडियन जर्नल ऑफ इकोनाॅमिक्स एंड डेवलपमेंट में प्रकाशित किया गया है।

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यूपी के 28 जिलों में कुल 19 मापदंडों पर हुआ शोध

शोध में उत्तर प्रदेश के 28 जिलों के विकास की तस्वीर को 19 सामाजिक और आर्थिक संकेतकों के आधार पर परखा गया। इनमें आय, शिक्षा, कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य, उद्योग और बुनियादी ढांचा शामिल रहे। शोधकर्ताओं ने जिलों की तुलना के लिए ''व्रोकला टैक्सोनोमिक विधि'' का उपयोग किया और प्रत्येक जिले को एक विकास स्कोर दिया।

पूर्वी यूपी में बुनियादी सुविधाएं अब भी कमतर

रिपोर्ट के मुताबिक, श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच आदि जिलों की सड़कें, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं तुलनात्मक रूप से कमतर हैं। अध्ययन में निष्कर्ष निकला है कि ये जिले राज्य की विकास सूची के काफी नीचे हैं।

यही नहीं, पूर्वी यूपी के कई जिलों में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे का स्तर बेहद कमजोर पाया गया। साथ ही कृषि और रोजगार के सूचकांक सबसे कमजोर रहे। यानी, पूर्वांचल में विकास की रफ्तार अब भी बेहद धीमी है ।

शोध के अगुआ डॉ. नागेंद्र कुमार मौर्य का कहना है कि पूर्वी यूपी में सुविधाएं अब भी कमतर हैं, निवेश लगभग ठहर गया है। वहीं प्रो. रोली मिश्रा का कहना है कि गांवों में सड़कें, बिजली और स्कूलों की गुणवत्ता और बेहतर करनी होगी।

शोधकर्ताओं के सुझाव

  • रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकार को 'एक जिला, एक उद्योग' (ओडीओपी) जैसी योजनाओं को और बेहतर व प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।
  • हर जिले को अपनी विशिष्ट उत्पादकता -चाहे वह काष्ठकला हो, कृषि उत्पाद या हस्तशिल्प हो, इसमें विशेषज्ञता और बेहतर करनी चाहिए।इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, निवेश आकर्षित होगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
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