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KGMU: 102 साल बाद इस लड़की ने रचा इतिहास
अमित यादव/लखनऊ
Updated Mon, 30 Sep 2013 10:07 AM IST
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आंखों में चमक...कदमों में आत्मविश्वास। गले में चमचमाते केजीएमयू के तीन प्रतिष्ठित मेडल्स के साथ ही 14 अन्य गोल्ड मेडल।
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प्रिंसेज ऑफ मेडल्स वंदना ने अपनी उपलब्धियों से इतिहास रच दिया। पहली बार किसी छात्रा ने टॉप थ्री में शुमार प्रतिष्ठित हीवेट, वाइस चांसलर और यूनिवर्सिटी ऑनर्स मेडल पर कब्जा किया।
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दलित छात्रा की इन उपलब्धियों ने राज्यपाल बीएल जोशी को भी विवश कर दिया उसे परिवार समेत राजभवन आने का न्योता देने को। केजीएमयू का 102वां वर्ष बलिया की बेटी वंदना की उपलब्धियों का साक्षी बना।
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रविवार को नौंवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल बीएल जोशी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने यूनिवर्सिटी के तीन सर्वोच्च मेडल पहनाए तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
हीवेट गोल्ड मेडल, वाइस चांसलर मेडल और यूनिवर्सिटी ऑनर्स मेडल जब वंदना के गले में आया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
बरबस ही उसके हाथ पंडाल में तालियां बजा रहे चिकित्सकों और छात्र-छात्राओं की तरफ शुक्रिया करने के लिए उठ गए।
सम्मान ने बढ़ा दी जिम्मेदारी मेडल पाने के बाद वंदना ने कहा कि इस सम्मान से उसकी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। प्रदेश में सबको इलाज मिले इसके लिए सभी युवा चिकित्सकों को अपनी भूमिका ईमानदरी से निभानी होगी।
अब तक पढ़ाई सिर्फ अपने लिए की लेकिन अब दूसरों के लिए काम करना है, जिससे उनकों आराम मिले,दर्द से मुक्ति मिले। इसके लिए और अधिक तैयारी करनी होगी।
पढ़ाई इसलिए की ताकि अपने सपने को सच कर सकूं...मां-बाप का समाज में मान बढ़ा सकूं। जो आज मैंने कर दिया। अभी आगे की जिंदगी है अब देश, प्रदेश और जिले का नाम रोशन करना है।
जिससे देश विदेश के लोग ये कह सकें की वंदना जॉर्जियंस होने के साथ ही भारतीय, उत्तर प्रदेश और बलिया की है।
वंदना का अगला लक्ष्य स्त्री एवं प्रसूति रोग या फिर बाल रोग विशेषज्ञ बनने का है।