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गर्भस्थ शिशु पर कोरोना के असर पर मंथन शुरू, चीन में प्रसव के बाद बच्चे में मिला वायरस

Fri, 03 Apr 2020 07:16 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 03 Apr 2020 07:16 PM IST
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Does corona effect small child.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना ने नई पीढ़ी पर भी संकट खड़ा कर दिया है। गर्भ में पल रहे बच्चे तक भी गर्भनाल के जरिये यह वायरस पहुंच सकता है, अब इस पर मंथन शुरू हो गया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अन्य वायरस भी गर्भ में मौजूद बच्चों पर गंभीर असर डालते रहे हैं। चीन में गुरुवार को प्रसव के दो दिन बाद की गई जांच में नवजात को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। ऐसे में चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवती महिलाएं हर हाल में खुद को होम क्वारंटीन रखें।

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कोरोना को लेकर दुनियाभर में अलग-अलग स्थितियों में मरीजों पर पड़ने वाले असर पर शोध शुरू हो गया है। चीन सहित अन्य कोरोना पीड़ित देशों में मां के पॉजिटिव होने के बाद भी बच्चे में कोरोना के लक्षण नहीं मिले थे। कुछ में मिले भी तो इसे दूसरे तरीके से फैलने की बात कही गई।
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गुरुवार को प्रकाशित रिसर्च पेपर में आशंका जताई गई कि कोरोना पीड़ित मां भ्रूण को भी गर्भनाल के जरिये नोवेल कोरोना वायरस दे सकती है। अमेरिकन जनरल अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित शोध पत्र में बताया गया कि नवजात में कोरोना के खिलाफ एंटी बाडी पाई गई है, जो आमतौर पर गर्भनाल से बच्चों में नहीं जाती है।
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हालांकि, अन्य लेख में कहा गया है कि इस पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। जर्नल जामा पीडियाट्रिक्स में कहा गया कि 33 गर्भवती महिलाओं के प्रसव के बाद तीन बच्चों में कोरोना पाया गया। हालांकि, यह जांच दो दिन बाद की गई। ऐसे में अभी यह साफ नहीं कि कोरोना गर्भ से हुआ या नहीं। फिर भी देश-दुनिया में इस पर मंथन चल रहा है।

ये सावधानियां बरतें

- गर्भवती महिलाएं किसी कीमत पर बाहर न निकलें। घर में क्वारंटीन रहें।
- जब तक बहुत जरूरी न हो, जांच के लिए अस्पताल या जांच केंद्रों पर न जाएं।
- यदि पहले से दवाएं चल रही हैं तो परिवार का कोई अन्य सदस्य रिपोर्ट लेकर जाए।
- जरूरत पड़ने पर गायनेकोलॉजिस्ट से मरीज की फोन पर बात करा दें।
- नींबू पानी, फल आदि का सेवन करते रहे। कम खाएं पर पौष्टिक खाएं।

असर तय नहीं, पर सावधानी जरूरी
पीजीआई की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मंदाकिनी प्रधान का कहना है कि विभिन्न जर्नल में जो बातें सामने आ रही हैं, उनमें तत्काल प्रसव के केस हैं। कोरोना वायरस अभी आया है। तमाम महिलाएं तीन, चार माह की गर्भस्थ हैं। प्रसव होने पर ही इसके असर के बारे में पुख्ता जानकारी मिल सकेगी। ऐसे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन हर स्तर पर सावधानी बरतने की  जरूरत है। गर्भस्थ शिशु पर पड़ने वाले असर को लेकर दुनियाभर में शोध शुरू हो गया है।

विस्तृत शोध की है जरूरत
पीजीआई माइक्रोबायोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. टीएन ढोल का कहना है कि जीका, एचआईवी सहित तमाम वायरस का गर्भस्थ शिशु पर असर पड़ता रहा है। कोरोना वायरस अपने आप में नया है। इस पर अभी विस्तृत काम करने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में वायरस रिसर्च सेंटर बनाने की जरूरत है, ताकि इसके हर पहलू पर शोध हो सके।

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