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Lucknow News: आयुर्वेद के छह विषयों में होगी डीएम की पढ़ाई
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कॉलेज प्राचार्य डॉक्टर दिनेश कुमार मौर्य ने एनसीआईएसएम की अध्यक्ष प्रो. मनीषा उपेंद्र कोठेकर का
लखनऊ। आयुर्वेद में अब जल्द ही सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टोरेट ऑफ मेडिसिन (डीएम) की पढ़ाई होगी। अभी तक डीएम का कोर्स आयुर्वेद में नहीं था। ऐसे में सुपर स्पेशियलिटी कोर्स की शुरूआत जल्द ही आयुर्वेद में होगी। इससे डॉक्टरों को इलाज व शोध में काफी मदद मिलेगी। यह बातें बोर्ड ऑफ आयुर्वेद के डॉ. अल्लम प्रभु गोड्डा ने कहीं। मौका था सोमवार को आयुर्वेद कॉलेज में आयोजित आयुष हित धारक सम्मेलन का। इसमें नेशनल कमिशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) के अधिकारियों व प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक एवं यूनानी कॉलेज के प्रबंधक, प्रधानाचार्य व शिक्षकों ने भाग लिया।
नई दिल्ली से आई एनसीआईएसएम की अध्यक्ष प्रो. मनीषा उपेंद्र कोठेकर ने बताया गया कि आयुष के विकास में कॉलेज के प्रबंधकों, प्रधानाचार्य एवं चिकित्सा शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान है। भारतीय चिकित्सा परिषद राष्ट्रीय आयोग कॉलेज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करता है। न्यूनतम मानकों को बनाए रखने एवं निरंतर गुणवत्ता को बढ़ाए जाने की जरूरत है। आयुष्मान भारत एवं अन्य कार्यक्रमों के जरिये चिकित्सालय को वित्तीय सहयोग प्राप्त हो रहा है।
एनसीआईएसएम के डॉ. मुकुल पटेल ने कहा कि हर आयुष महाविद्यालय के चिकित्सालयों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्लेटफार्म पर रजिस्ट्रेशन कराए जाने की जरूरत है जिससे समाज के स्वास्थ्य का डिजिटल डाटा उपलब्ध हो सकेगा। बोर्ड आफ आयुर्वेद के डॉ. सुश्रुत कनौजिया ने बताया कि आयुष महाविद्यालय के चिकित्सकों का रजिस्ट्रेशन प्रदेश के रजिस्टर में कराया जाएगा।
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प्रो. मनीषा उपेंद्र कोठेकर ने राजकीय आयुर्वेद कॉलेज लखनऊ की अंतिम वर्ष की छात्राओं को डॉ. सत्यपाल गुप्त स्मृति चरक उत्तरार्द्ध पुरस्कार प्रदान किया। इसमें गोल्ड मेडल कुमारी खुशबू शर्मा को और रजत मेडल कुमारी मीनाक्षी तिवारी को मिला। कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. दिनेश कुमार मौर्य ने बताया कि प्रदेश में एक ही छत के नीचे आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी विद्या की चिकित्सा उपलब्ध कराए जाने के लिए 17 अस्पतालों में 50 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सालय का संचालन कराया जा रहा है। इस वर्ष आयुष विभाग के अंतर्गत आगरा, बस्ती, मेरठ, गोंडा एवं मिर्जापुर मंडल में एकीकृत आयुष महाविद्यालय की स्थापना की जाएगी। राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में स्किल लैब की स्थापना किए जाने की योजना है। कार्यक्रम का संचालन विश्व आयुर्वेद परिषद के महासचिव डॉ. सुरेंद्र चौधरी ने किया।
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नई दिल्ली से आई एनसीआईएसएम की अध्यक्ष प्रो. मनीषा उपेंद्र कोठेकर ने बताया गया कि आयुष के विकास में कॉलेज के प्रबंधकों, प्रधानाचार्य एवं चिकित्सा शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान है। भारतीय चिकित्सा परिषद राष्ट्रीय आयोग कॉलेज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करता है। न्यूनतम मानकों को बनाए रखने एवं निरंतर गुणवत्ता को बढ़ाए जाने की जरूरत है। आयुष्मान भारत एवं अन्य कार्यक्रमों के जरिये चिकित्सालय को वित्तीय सहयोग प्राप्त हो रहा है।
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एनसीआईएसएम के डॉ. मुकुल पटेल ने कहा कि हर आयुष महाविद्यालय के चिकित्सालयों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्लेटफार्म पर रजिस्ट्रेशन कराए जाने की जरूरत है जिससे समाज के स्वास्थ्य का डिजिटल डाटा उपलब्ध हो सकेगा। बोर्ड आफ आयुर्वेद के डॉ. सुश्रुत कनौजिया ने बताया कि आयुष महाविद्यालय के चिकित्सकों का रजिस्ट्रेशन प्रदेश के रजिस्टर में कराया जाएगा।
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प्रो. मनीषा उपेंद्र कोठेकर ने राजकीय आयुर्वेद कॉलेज लखनऊ की अंतिम वर्ष की छात्राओं को डॉ. सत्यपाल गुप्त स्मृति चरक उत्तरार्द्ध पुरस्कार प्रदान किया। इसमें गोल्ड मेडल कुमारी खुशबू शर्मा को और रजत मेडल कुमारी मीनाक्षी तिवारी को मिला। कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. दिनेश कुमार मौर्य ने बताया कि प्रदेश में एक ही छत के नीचे आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी विद्या की चिकित्सा उपलब्ध कराए जाने के लिए 17 अस्पतालों में 50 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सालय का संचालन कराया जा रहा है। इस वर्ष आयुष विभाग के अंतर्गत आगरा, बस्ती, मेरठ, गोंडा एवं मिर्जापुर मंडल में एकीकृत आयुष महाविद्यालय की स्थापना की जाएगी। राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में स्किल लैब की स्थापना किए जाने की योजना है। कार्यक्रम का संचालन विश्व आयुर्वेद परिषद के महासचिव डॉ. सुरेंद्र चौधरी ने किया।