उन्नाव में कंपोजिट ग्रांट घोटाले में डीएम की भूमिका जांच करेंगे लखनऊ के कमिश्नर
उन्नाव में बेसिक शिक्षा विभाग में कंपोजिट ग्रांट में हुई वित्तीय अनियमितता में जिलाधिकारी की भूमिका की जांच मंडलायुक्त लखनऊ को सौंपी गई है। इस मामले संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को निलंबित किया जा चुका है। यह जानकारी बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश द्विवेदी ने शुक्रवार को विधान परिषद में दी है।
दरअसल शून्यकाल में नियम 105 के तहत सपा के सुनील सिंह साजन ने 34 अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर से सदन को सूचित किया कि प्राथमिक विद्यालयों में स्वेटर, ड्रेस, जूते-मोजे, किताब, फर्नीचर व खेलकूद सामग्री खरीदने में भारी अनियमितता बरती जा रही है।
साजन ने उन्नाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर कंपोजिट ग्रांट की राशि में भारी गोलमाल किया गया है। एक ही सामग्री को 5 से 26 हजार रुपये तक में खरीद की गई है। दो पेंसिल 360 रुपये में खरीदी गई है। ऐसे तमाम उदाहरण है।
उन्होंने सदन को बताया कि तत्कालीन राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में कंपोजिट ग्रांट में घोटाला होने की पुष्टि की थी। जांच रिपोर्ट में बीएसए के साथ उन्नाव के डीएम की भूमिका पर भी सवाल उठाया था। इसके बावजूद सरकार दोषी लोगों को बचा रही है।
सरकार ने पहले ही की सख्त कार्रवाई
इस पर शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में सरकार ने पहले ही सख्त कार्रवाई की है। बीएसए को निलंबित किया गया है और डीएम की भूमिका जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं और एफआईआर भी करा दी गई है। इसलिए इस पर चर्चा का औचित्य नहीं है। इस पर सपा सदस्य ने कहा कि मंत्री गलत जानकारी दे रहे हैं।
महिला शिक्षकों पर दबाव बनाकर खाते से राशि निकाली गई है। बात न मानने पर पर करीब 150 शिक्षकों का तबादला सुदूर क्षेत्रों में कर किया गया है, जिसमें 75 से अधिक महिला शिक्षक भी शामिल हैं। बीएसए का निलंबन भी कंपोजिट ग्रांट घोटाले में नहीं, बल्कि दूसरे गबन के मामले हुआ है।