तीन और चार पहिया वाहन खरीदने पर महिलाओं को मिलेगी रजिस्ट्रेशन टैक्स में छूट
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प्रदेश में जनता के वाहन यानी सवारी गाड़ियों का टैक्स कम किया जाएगा। रोडवेज बसों का यात्री टैक्स प्राइवेट बसों के बराबर किया जाएगा, वहीं महिलाओं को सवारी ढोने के लिए तीन पहिया एवं चार पहिया मोटर और मैक्सी कैब खरीदने पर पंजीयन कर में छूट दी जाएगी।
इससे सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान की भरपाई ट्रकों और कार के टैक्स में बढ़ोतरी करके की जाएगी। 1,69,401 ट्रकों के टैक्स में 10 फीसदी, बोलेरो में 2 फीसदी तथा 10 लाख रुपये व इससे अधिक की एसी कारों पर एक फीसदी टैक्स बढ़ाने की तैयारी है।
परिवहन विभाग ने घरेलू एवं व्यावसायिक वाहनों के टैक्स की नई दरों का प्रस्ताव प्रमुख सचिव (परिवहन) आराधना शुक्ला को भेजा है। इसे कैबिनेट से पास कराने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई बैठक में वाहनों के टैक्स का ढांचा सरल करने का फैसला किया गया था। इसी आधार पर परिवहन विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है।
प्रदेश में अभी बोलेरो का पंजीकरण घरेलू श्रेणी में कराने पर 10 फीसदी पंजीकरण शुल्क लगता है। वहीं व्यावसायिक श्रेणी में 4000 रुपये पति सीट सालाना के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ता है। इसी के चलते ज्यादातर लोग बोलेरे का पंजीकरण घरेलू में कराते हैं। इसे 2 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव है।
विभाग को उम्मीद है कि शुल्क बढ़ने से लोग इसका पंजीकरण व्यावसायिक श्रेणी में कराएंगे। पुरानी बोलेरो का व्यावसायिक में पंजीकरण कराने पर भी टैक्स में छूट दी जाएगी।
वहीं, 10 लाख रुपये और इससे अधिक कीमत वाली एसी कार पर एक फीसदी पंजीयन टैक्स बढ़ाया जाएगा। प्रस्ताव पास हुआ तो 10 लाख की एसी कार का पंजीयन टैक्स 8 से बढ़कर 9 फीसदी और 10 लाख से अधिक की एसी कार का पंजीयन टैक्स 10 से बढ़कर 11 फीसदी हो जाएगा।
प्राइवेट-सरकारी बस का टैक्स होगा समान
परिवहन निगम की 10,500 बसों और 27 हजार प्राइवेट बसों का यात्री टैक्स एक समान किया जाएगा। वर्तमान में प्राइवेट बस के मालिक को 128 रुपये प्रति सीट प्रतिमाह के रेट से टैक्स चुकाना पड़ता है, जबकि परिवहन निगम की बसों से 150 से 600 रुपये प्रति सीट प्रतिमाह के रेट से टैक्स लिया जाता है। परिवहन निगम कुल 250 करोड़ रुपये सालाना टैक्स चुका रहा है। परिवहन निगम के मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) एचएस गाबा के अनुसार टैक्स से बचने वाली रकम अन्य मद में खर्च होगी, नई बसें खरीदी जाएंगी। वहीं टैक्स समान होने से रोडवेज बसों का सफर सस्ता हो सकता है।