संवादः मनु भाकर ने कहा- जीवन हमेशा एक तरह का नहीं होता, मैं मंदिरों में रात में चादर बिछाकर भी सोई हूं
Amar Ujala Samvad: अमर उजाला संवाद में ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली मनु भाकर शामिल हुईं। उन्होंने बताया कि इस बार ओलंपिक को लेकर उनकी क्या तैयारी है।
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विस्तार
ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधत्व करने वालीं निशानेबाज मनु भाकर ने कहा कि पिछले बार के ओलंपिक में मैं बहुत नर्वस हो गई थी। इस बार ऐसा ना हो इसके लिए मानसिक मजबूती की तैयारी मैंने अभी से शुरू कर दी है। योगा और प्राणायाम के साथ मानसिक चिंतन भी इस दिशा में कर रही हूं।
शूटिंग को लोग फिल्म शूटिंग समझ लेते थे
मनु बताती हैं कि शुरुआती समय में जब मैं सबसे कहते कि मैं शूटिंग के लिए गई थी तो लोग पूछते थे कि कौन सी फिल्म की शूटिंग। मैं उनके बताती यह बंदूक से होने वाली शूटिंग है। लोग आश्चर्य करते थे कि कोई लड़की ऐसे भी खेल का हिस्सा हो सकती है।
खेल में सब कुछ पारदर्शी
मनु कहती हैं कि दूसरे खेलों में होगा लेकिन शूटिंग में सब कुछ पारदर्शी तरीके से होता है। यहां क्षेत्र या कम्यूनिटी की बात नहीं होती। यदि आप क्लियर हैं तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
लड़की होने की वजह से किया मना
परिवार अपने बच्चे को समय दें
मनु ने कहा कि खेल हो या कोई दूसरा करियर ऑप्शन, परिवार के लोगों को साथ देना होता है। परिवार साथ में खड़ा होता है तो चुनौती आसान हो जाती हैं।
मंदिर में रुकती थी मैं
एक दौर ऐसा था कि मैं जब दूसरे शहरों में जाती थी तो होटलों में रुकने के लिए पैसे नहीं होते थे। मैं मंदिर में चादर बिछाकर सोती थी। लेकिन एक संकल्प था जिसे प्राप्त करना है। मैंने रेल के जनरल क्लास से फ्लाइट के बिजनेस क्लास तक के सफर को देखा है।
मुझे आज भी छोटी हर बात पर डांट पड़ती है
मनु ने कहा कि ऐसा नहीं है कि अब परिवार की रोक-टोक बंद हो गई है। अभी भी मेरे सोने, उठने, खाने, पीने में रोक-टोक होती है। आज सुबह भी मुझे नाश्ते में क्या खाना है इसके बारे टोका गया। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। इसमें परिवार का एक कंसर्न दिखता है।