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यूपीः पैदल आ रहे मजदूरों को रोकने की सभी योजनाएं फेल, पुलिस लाचार
Sat, 09 May 2020 07:43 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 09 May 2020 07:43 PM IST
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साइकिल से घर जाते मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
विभिन्न राज्यों से अपने घर जा रहे मजदूर पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। पुलिस को कभी झांसी में तो कभी फिरोजाबाद में और कभी हापुड़ और सोनभद्र में इन मजदूरों से मोर्चा लेना पड़ रहा है।
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दरअसल अलग-अलग राज्यों से मजदूर ट्रकों में सवार होकर और पैदल यूपी के अलावा यूपी के रास्ते बिहार और छत्तीसगढ़ भी जा रहे हैं। कुछ मजदूर रेलवे ट्रैक पकड़ कर पैदल अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।
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पुलिस के लिए मुसीबत यह है कि रोके तो उन्हें कहां भेजे और जाने दे तो मुख्यमंत्री के निर्देशों का क्या होगा। जो मजदूर यूपी के हैं, उन्हें जाने भी दिया जा रहा है। लेकिन दूसरे राज्यों को जाने वाले मजदूरों की संख्या भी कम नहीं है। पहले झांसी, फिर फिरोजाबाद और अब हापुड़ और सोनभद्र में मजदूरों से पुलिस को मोर्चा लेना पड़ रहा है। ऐसे में पुलिस नए सिरे से अपनी रणनीति बना रही है।
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बृहस्पतिवार को हापुड़ में बड़ी संख्या बिहार के प्रवासी मजदूर हरियाणा से पहुंच गए। पूर्व में बिहार के कुछ मजदूरों को बिहार की सीमा तक भेज दिया गया था, लेकिन बिहार ने इन मजदूरों को लेने से मना कर दिया। इससे बिहार से सटे यूपी के जिलों पर बोझ काफी बढ़ गया। इन जिलों को आग्रह करना पड़ा कि बिहार के मजदूरों को न भेजा जाए।
उधर बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ के मजदूर रेलवे पटरी के सहारे अपने घरों को जा रहे हैं। इनको लेकर भी पुलिस पसोपेश में है। जिन स्थानों पर सख्ती ज्यादा हो रही है, वहां मजदूर सड़क छोड़कर खेत और खलिहान का भी रास्ता पकड़ रहे हैं। जो मजदूर पैदल चल रहे हैं, उनके साथ बच्चे और महिलाएं भी हैं जिनकी वजह से पुलिस ज्यादा सख्ती भी नहीं कर पा रही। पिछले दिनों फिरोजाबाद में बड़ी संख्या में मजदूरों ने हंगामा किया था। हालांकि बाद में वहां के जिला प्रशासन ने सभी मजदूरों को क्वारंटीन करवाया। झांसी के जिला प्रशासन व पुलिस को भी पिछले दिनों इसी तरह की परेशानी उठानी पड़ी थी।
महाराष्ट्र से भी ट्रकों से बड़ी संख्या में मजदूर आ रहे हैं। रास्ते में जहां पुलिस की सख्ती ज्यादा नजर आती है, वहां मजदूरों को उतार दिया जाता है और आगे जाकर ये मजदूर दोबारा ट्रकों में सवार हो जाते हैं। इन मजदूरों के ट्रेनों से जाने के लिए प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराने का आग्रह किया गया है।
डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी का कहना है कि पैदल चलने की इजाजत नहीं है। जो लोग पैदल चलते हुए मिल रहे हैं, उन्हें शेल्टर होम में भेजा जा रहा है और वहां से हेल्थ चेकअप के बाद आगे जाने की व्यवस्था सरकार की ओर से की जा रही है। शनिवार को हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में करीब 1000 लोगों को शेल्टर होम भेजा गया है। वहीं बांदा में भी मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में पैदल आ रहे मजदूरों को रोककर शेल्टर होम भेजा गया है।