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योजनाबद्ध विकास भी लील रहा झीलें, कैसे मिले गोमती को जलधार

Wed, 03 Feb 2021 02:14 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2021 02:14 AM IST
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development engulfed lake and ponds
इकाना स्टेडियम के पास मस्तेमऊ में वेटलैंड। - फोटो : ??? ?????
लखनऊ। गोमती नदी की जलधारा बनाए रखने में सहयोगी झीलों व तालाबों को योजनाबद्ध विकास भी लील रहा है। हाईकोर्ट से लेकर एनजीटी तक ने तालाबों, झीलों के संरक्षण के आदेश दे रखे हैं। इसके बावजूद नदी किनारे या आसपास की झीलों, तालाबों को विकास के नाम पर पाटकर खत्म कर दिया गया। अब इन जगहों पर बड़े-बड़े निर्माण खड़े किए जा रहे हैं। निजी बिल्डरों के साथ ही इसमें एलडीए व आवास विकास परिषद भी झीलों, तालाबों को खत्म करने का काम किया।
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बीबीएयू के प्रोफेसर और पर्यावरणविद् डॉ. वेंकटेश दत्ता का कहना है कि तेजी से शहरी विकास की आड़ में हमने झील, तालाबों के साथ गोमती नदी को भी नुकसान पहुंचाया है। बिना पर्यावरण की चिंता किए गलत तरीके से रिवरफ्रंट सौंदर्यीकरण का कारनामा कर दिया। इसके अलावा नदी किनारे मौजूद वेटलैंड भी खत्म किए गए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इकाना क्रिकेट स्टेडियम के पास मौजूद प्राकृतिक वेटलैंड है। यह गोमती नदी ने खुद तैयार किया। इससे नदी को भी पानी बारिश के अलावा मिलता। अब धीरे-धीरे इसे पाटने का काम हो रहा है। कई निर्माण भी यहां कर लिए गए हैं। जल्दी ही बंधा रोड बनाकर इसे पूरी तरह खत्म करने की योजना है। एलडीए के अधिकारी गंभीरता दिखाते तो इसे बचाया जा सकता था।
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वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि अपने काम के सिलसिले में शहर के अधिकांश वेटलैंड से मुझे रूबरू होने का मौका मिला। सीजी सिटी के वेटलैंड की तरह ही मेरे सामने अवध शिल्पग्राम का निर्माण दो बड़े प्राकृतिक तालाबों को पाटकर किया गया। मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से शिकायत भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सीजी सिटी में पूरा जंगल ही विकास के नाम पर खत्म कर दिया गया। एक साल पहले तक मेरी टीम वन्यजीव व चिड़ियों की फोटोग्राफी के लिए सीजी सिटी जाती थी। एलडीए के अलावा प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से शिकायत किए जाने के बाद हमारा यहां वेटलैंड के आसपास जाना ही बंद कर दिया गया।
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भूगर्भ के साथ गोमती को मिलता पानी
डॉ. दत्ता का कहना है कि झीलों और तालाबों का महत्व केवल वन्य जीव जंतुओं के लिए ही नहीं है। इससे भूगर्भ जल भी रीचार्ज होता है। इससे गोमती नदी को भी स्वच्छ पानी मिलता है। यही पानी लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाता है। आज लखनऊ में भूजल में हर साल एक मीटर की कमी आ रही है। यह इस के कारण भी है कि हम दिन-प्रतिदिन प्राकृतिक रीचार्ज साइटों को खो रहे हैं। राजधानी की कई झीलों का अस्तित्व संकट में है।
हर इलाके में खत्म की गई झील
ऐशबाग से लेकर डालीबाग, गोमतीनगर और रायबरेली रोड स्थित झीलों का अस्तित्व बचाने और संवारने के प्रयास नाकाम हुए। डालीबाग के बटलर पैलेस झील की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। चिनहट, रायबरेली रोड, आशियाना, जानकीपुरम से लेकर गोमतीनगर विस्तार तक में झील व तालाब खत्म करने की कहानी मौजूद है। उतरेठिया में तालाब पर सड़क बना दी गई। वीआईपी रोड पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी तालाब पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग खड़ी कर दी गई।

झीलों के विकास पर कर रहे काम सचिव पवन गंगवार
एलडीए सचिव पवन गंगवार का कहना है कि अवस्थापना निधि से पहले चरण में तीन झीलों के विकास पर एलडीए काम शुरू कर रहा है। ऐशबाग की झीलों से कब्जे हटवाने के लिए कार्रवाई भी कराई जा रही है। दूसरे विभागों के साथ मिलकर भी हम काम कर रहे हैं। जल्दी ही इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
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