वंदे मातरम पर चर्चा: डिप्टी सीएम केशव बोले- आजम खां ने भारत मां को डायन कहा पर सपा ने कभी निंदा नहीं की
यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत मां दुर्गा हैं पर तुष्टिकरण करने वाली सपा ने आजम खां के बयान की कभी निंदा नहीं की जिन्होंने भारत मां को डायन कहा था। उन्होंने कहा कि अगर वंदे मातरम के टुकड़े नहीं होते तो देश के टुकड़े नहीं होते।
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यूपी विधान परिषद में राष्ट्रगीत वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता सदन व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आज हम राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा कर रहे हैं। आज चार करोड़ गरीब परिवार को पीएम आवास मिला है, यही वंदे मातरम है। हर घर नल और शौचालय की सुविधा मिली, यही वंदे मातरम है।
64 करोड़ जनधन खाते खोले गए यही वंदे मातरम है। सीएम-पीएम के नेतृत्व में 80 करोड़ को अन्न मिल रहा है, यही वंदे मातरम है। हर मजरे तक बिजली पहुंची, यही वंदे मातरम है। राम मंदिर राष्ट्र मंदिर है, यही वंदे मातरम है। कुंभ में 65 करोड़ ने डुबकी लगाई, यही वंदे मातरम है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम 2047 तक विकसित यूपी और विकसित राष्ट्र के लिए भी प्रभावी है। वंदे मातरम आजादी के साथ वर्तमान और भविष्य का भी महामंत्र है।
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विपक्ष पर निशाना साधते हुए केशव मौर्य ने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण आजम खां ने भारत मां को डायन कहा किंतु सपा नेता ने कभी उसकी निंदा नहीं की। भारत मां साक्षात दुर्गा हैं। तुष्टीकरण के कारण ही कुछ लोग आज तक अयोध्या नहीं गए। आजादी के बाद देश के टुकड़े हो गए। वंदे मातरम के टुकड़े करने वाले आज सदन में नहीं हैं।
केशव मौर्य ने कहा कि अगर वंदे मातरम के टुकड़े नहीं होते तो देश के टुकड़े नहीं होते। जब हमें वंदे मातरम का शताब्दी वर्ष मनाना था, उस समय आपातकाल लगाया गया। संविधान की हत्या आपातकाल में की गई। जब पटेल को पीएम बनना था, उस समय नेहरू को थोप दिया गया। आज सदन में कांग्रेस नहीं है किंतु उसका साथ देने वाले पार्टी है। उसी कांग्रेस ने आपातकाल लगाया था। चर्चा में भाजपा के तारिक मंसूर, प्रज्ञा त्रिपाठी, संतोष सिंह, ऋषिपाल सिंह, शिक्षक दल के नेता ध्रुव त्रिपाठी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बिच्छे लाल, रालोद के योगेश चौधरी आदि ने भी विचार रखे।
"वंदे मातरम किसी संगठन, विचारधारा की जागीर नहीं"
विधान परिषद में वंदे मातरम पर चर्चा में नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव ने कहा कि यह गुलामी से मुक्ति दिलाने वाली अमर गाथा है। यह सिर्फ एक राष्ट्रगीत नहीं बल्कि एक आंदोलन है। इसने सामाजिक चेतना को एक सूत्र में बांधा है। यह आजादी की लड़ाई की आत्मा है। यह किसी विचारधारा व संगठन की जागीर नहीं है।
उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि देशभक्ति का सर्टिफिकेट कोई पार्टी बांटेगी? देशभक्ति के बारे में नारे लगाने से नहीं देश के लिए काम करने से साबित होती है। आज किसान सड़क पर है, नौजवान बेरोजगार है, महंगाई आसमान छू रही है। वंदे मातरम इसकी इजाजत नहीं देता है। असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। लाल बिहारी यादव ने कहा कि सपा का साफ कहना है कि देशभक्ति दिल से जुड़ी है, डंडे व डर से नहीं।
वंदे मातरम का सम्मान है, संविधान हमारी शान है। किंतु आज संविधान खतरे में है। देश को नारे नहीं, नौकरी चाहिए, डर नहीं भरोसा चाहिए। झूंठ नहीं सच्चाई चाहिए। वहीं सपा सदस्य किरणपाल कश्यप ने चर्चा के दौरान आरएसएस पर बैन, कोडीन कफ सिरप, एसआईआर का मुद्दा उठाया, इसे लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। सपा सदस्य मानसिंह यादव ने डॉ. आंबेडकर के अपमान का मुद्दा उठाया, इस पर भी दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। वहीं अधिष्ठाता सलित विश्नोई ने उन्हें रोकते हुए सदन का माहौल न खराब करने की अपील की।