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Lucknow News: केजीएमयू में विभागीय एंबुलेंस सेवा ध्वस्त, ई रिक्शे से जा रहे मरीज
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ई रिक्शे पर मरीज को बैठाते तीमारदार।
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में एंबुलेंस सेवा पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। हालत यह है कि गंभीर मरीजों को एक से दूसरे विभाग ले जाने के लिए तीमारदार ई-रिक्शा का सहारा लेने को मजबूर हैं। आरोप है कि विभाग से एंबुलेंस आवंटित होने के बावजूद चालक समय पर वाहन उपलब्ध नहीं करा रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
रीढ़ के ऑपरेशन के बाद मरीज को ई रिक्शे से ले जाना पड़ा : बस्ती निवासी गायत्री का बुधवार को लिंब सेंटर में रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद उन्हें तेज दर्द होने लगा। डॉक्टरों ने दर्द के कारण का पता लगाने के लिए सोनोग्राफी जांच कराने की सलाह दी और मरीज को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मुख्य परिसर स्थित रेडियोडायग्नोसिस विभाग भेजा गया।
मरीज के बेटे आकाश और बहन जानकी देवी ने बताया कि कर्मचारियों ने मरीज को शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस आवंटित कराई और चालक का मोबाइल नंबर भी दिया। परिजन करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन वाहन नहीं पहुंचा। कई बार फोन करने के बावजूद चालक ने कॉल रिसीव नहीं की। करीब एक घंटे तक इंतजार के बाद भी जब कोई व्यवस्था नहीं हुई तो परिजनों ने मजबूर होकर ई रिक्शा बुलाया।
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रीढ़ का ऑपरेशन होने से मरीज को ई रिक्शे में लिटाने में काफी परेशानी हुई। किसी तरह गोद में संभालकर परिजन मरीज को मुख्य परिसर तक ले गए, लेकिन देरी के कारण जांच नहीं हो सकी। इसके बाद उन्हें मरीज को दोबारा ई रिक्शे से लिंब सेंटर वापस लाना पड़ा।
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रीढ़ के ऑपरेशन के बाद मरीज को ई रिक्शे से ले जाना पड़ा : बस्ती निवासी गायत्री का बुधवार को लिंब सेंटर में रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद उन्हें तेज दर्द होने लगा। डॉक्टरों ने दर्द के कारण का पता लगाने के लिए सोनोग्राफी जांच कराने की सलाह दी और मरीज को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मुख्य परिसर स्थित रेडियोडायग्नोसिस विभाग भेजा गया।
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मरीज के बेटे आकाश और बहन जानकी देवी ने बताया कि कर्मचारियों ने मरीज को शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस आवंटित कराई और चालक का मोबाइल नंबर भी दिया। परिजन करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन वाहन नहीं पहुंचा। कई बार फोन करने के बावजूद चालक ने कॉल रिसीव नहीं की। करीब एक घंटे तक इंतजार के बाद भी जब कोई व्यवस्था नहीं हुई तो परिजनों ने मजबूर होकर ई रिक्शा बुलाया।
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रीढ़ का ऑपरेशन होने से मरीज को ई रिक्शे में लिटाने में काफी परेशानी हुई। किसी तरह गोद में संभालकर परिजन मरीज को मुख्य परिसर तक ले गए, लेकिन देरी के कारण जांच नहीं हो सकी। इसके बाद उन्हें मरीज को दोबारा ई रिक्शे से लिंब सेंटर वापस लाना पड़ा।

ई रिक्शे पर मरीज को बैठाते तीमारदार।