कर्मचारियों को एचआरए देने सहित यूपी कैबिनेट ने किए कई अहम फैसले
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निगमों, स्वशासी संस्थाओं, निकायों, शिक्षण संस्थाओं में काम करने वाले पति-पत्नी यदि किराए या अपने मकान में रहते हैं, तो अब दोनों को ही राज्यकर्मियों की तरह मकान किराया भत्ता मिलेगा। अभी तक पति या पत्नी में से एक को ही मिलता है। प्रदेश कैबिनेट ने बुधवार को इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी।
शासनादेश जारी होते ही इस आदेश का कर्मी लाभ पाने लगेंगे। राज्य सरकार ने पिछले साल फरवरी में केंद्र की तरह राज्य कर्मचारियों को किराए के मकान या निजी आवास में रहने पर पति-पत्नी दोनों को मकान किराया भत्ता देने का फैसला किया था। तभी से सरकारी व सहायता प्राप्त संस्थाओं के कर्मी भी इस सुविधा की मांग कर रहे थे।
जूनियर इंजीनियरों को मिलेगा 400 रुपये विशेष भत्ता
कैबिनेट ने सरकारी विभागों में कार्यरत अवर अभियंताओं को 400 रुपये महीने विशेष भत्ता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूबे के 16 हजार अवर अभियंताओं को इसका फायदा मिलेगा। अवर अभियंता लंबे अर्से से विशेष भत्ते की मांग कर रहे थे। लेकिन दूसरे विभागों के विशिष्ट कार्य के दायरे में आने वाले कर्मियों की ऐसी ही मांग का हवाला देकर इसे टाला जाता रहा। लेकिन चुनाव के पहले अवर अभियंताओं की सरकार ने सुन ली।
वृंदावन के विधवा आश्रमों की बदहाली सुधारेगी सरकार
सरकार अब खुद वृंदावन के विधवा आश्रमों की बदहाली सुधारेगी। केंद्र सरकार द्वारा बजट बढ़ाने से हाथ खड़ा करने के बाद प्रदेश सरकार आगे आई है। कैबिनेट की बैठक में बुधवार को इनकी दशा सुधारने के लिए 8.5 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी गई। इसमें से 1.5 करोड़ रुपये नॉन रिकरिंग प्लान में खर्च होंगे। यानी इससे विधवा आश्रमों की दशा सुधारने के अलावा कॉमन किचन बनाया जाएगा। यहां रहने वाली निराश्रितों के पलंग व गद्दे के साथ ही चिकित्सीय उपकरण खरीदे जाएंगे।
दरअसल, वृंदावन में सरकार के पांच विधवा आश्रम हैं। इनमें तीन आश्रम केंद्र सरकार के हैं जबकि दो आश्रम राज्य सरकार के हैं। इनकी बदहाली पर खुद सुप्रीम कोर्ट चिंता जता चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने ही प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार को इनकी दशा सुधारने के लिए इसका नोडल अफसर बनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इनकी बदहाली दूर करने के लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार करने के निर्देश दिए थे।
यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त करने के साथ ही बुजुर्गों के लिए जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जानी है। चिकित्सीय सुविधाओं के अलावा फिजियोथिरैपी की भी सुविधा इन आश्रमों में दी जानी हैं। इन आश्रमों में महिलाओं के रहने के लिए जो बेड हैं उनकी भी हालत खस्ता है। इन्हें भी बदला जाना जरूरी है। इसके अलावा इन्हें खाने-पीने के लिए जो पैसा मिलता है वह काफी कम है। इसे भी बढ़ाए जाने की वकालत की गई थी।
जवाहरबाग के विकास पर खर्च होंगे 15 करोड़
लोहिया पार्क की तर्ज पर मथुरा के जवाहरबाग का भी कायाकल्प किया जाएगा। कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई।
160 एकड़ क्षेत्र में फैले जवाहरबाग के सुंदरीकरण पर 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बाउंड्रीवॉल के निर्माण के अलावा पर्यटकों के लिए यहां आधुनिकतम सुविधाएं भी मिलेंगी। यह काम उद्यान विभाग के माध्यम से कराए जाएंगे।
निजी संस्था करेगी भदोही कारपेट मार्ट का प्रबंधन
कैबिनेट ने भदोही कारपेट मार्ट के प्रबंधन और संचालन संबंधी व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। इसका प्रबंधन निजी संस्था को सौंपा जाएगा। इसके लिए निजी संस्था का चयन मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल के तहत किया जाएगा। निजी संस्था में कंपनी, कंसोर्सियम या सोसाइटी हो सकती है। संस्था का चयन खुली निविदा के आधार पर 20 वर्ष की अवधि के लिए किया जाएगा।
संचालक संस्था के प्रबंधन में कारपेट के मैन्युफैक्चरर्स, एक्सपोर्टर्स की सहभागिता अनिवार्य होगी। कारपेट एक्सपो मार्ट में तैयार स्थायी दुकानों का आवंटन केवल भदोही, वाराणसी तथा मिर्जापुर जिलों के कालीन निर्माण से जुड़े मैन्युफैक्चरर्स, एक्सपोर्टर्स को ही किया जाएगा।
स्वधार योजना में अब 60 फीसदी बजट देगी केंद्र सरकार
सरकार ने स्वाधार योजना में फंडिंग पैटर्न में बदलाव किया है। इसके तहत अब केंद्र सरकार 60 फीसदी बजट देगी जबकि 40 फीसदी बजट प्रदेश सरकार देगी।
इसके तहत प्रत्येक स्वाधार गृह में रहने वाली महिलाओं की संख्या 30 की गई है। लेकिन 40 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जहां महिलाओं को अतिरिक्त सहायता की जरूरत है वहां पर महिलाओं की संख्या 50 से 100 भी हो सकती है।
लोहिया लॉ यूनिवर्सिटी का स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट बढ़ा
डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट बढ़ा दिया है। अब यहां के लिए 115.60 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे खेलकूद की सुविधाआएं और अच्छी होंगी।
सहारनपुर मेडिकल कॉलेज के निर्माण का बजट बढ़ा
कैबिनेट ने सहारनपुर के मेडिकल कॉलेज की निर्माण परियोजना का पुनरीक्षित बजट मंजूर कर दिया है। इसके तहत 51911.70 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। कॉलेज के निर्माण का सीधा लाभ सहारनपुर व आस-पास की जनता को मिलेगा।
पोल्ट्री डवलपमेंट प्रोग्राम में महिलाओं को 30 फीसदी हिस्सेदारी
कैबिनेट ने रूरल बैकयार्ड पोल्ट्री डवलपमेंट प्रोग्राम की कार्य योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना नेशनल लाइवस्टॉक मिशन के तहत शुरू की जा रही है। इनमें 20 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति व जनजाति के, 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक व 30 प्रतिशत महिलाएं होंगीं।
योजना के तहत 251 मदर यूनिटों की स्थापना की जाएगी। इसमें प्रत्येक यूनिट की स्थापना के लिए 60,000 रुपये का अनुदान व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। एक मदर यूनिट से 300 चयनित बीपीएल लाभार्थी संबद्ध होंगे।
प्रत्येक लाभार्थी को लो इनपुट के रूप में 45 चूजे तथा 1500 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। योजना प्रदेश के 8 मंडलों, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, झांसी व चित्रकूट धाम में संचालित होगी। योजना के जरिये ग्रामीण इलाकों में 75, 300 रोजगार का सृजन होगा।
समाजवादी पेंशन योजना : प्रशासनिक व्यय मद में खर्च कर सकेंगे 1.15 फीसदी राशि
समाजवादी पेंशन योजना में प्रशासनिक व्यय मद की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इस मद दे तहत अभी तक कुल बजट की एक फीसदी राशि ही खर्च की जा सकती थी, जिसे बढ़ाकर 1.15 फीसदी कर दिया गया है।
इससे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं साक्षरता के क्षेत्र में चल रही योजनाओं का अधिकाधिक लाभ इन लाभार्थी परिवारों को दिया जा सकेगा।
एलडीए सीमा क्षेत्र से बाहर होंगे लीडा के 38 गांव
लखनऊ राज्य सरकार ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के विस्तारित क्षेत्र और महायोजना 2031 में 197 गांवों को शामिल करने की प्रक्रिया में हुई विसंगगितियों को दूर कर दिया है। आवास और शहरी नियोजन विभाग द्वारा तैयार किए गए इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट ने महायोजना में लखनऊ इंडस्ट्रियल अथॉरिटी (लीडा) क्षेत्र के 38 गांवों को बाहर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 3 ऐसे गांवों को भी एलडीए सीमा से बाहर करने का फैसला किया गया है, जो राजस्व गांव नहीं थे।
दरअसल 2009 में जिन 197 गांवों को एलडीए ने प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल करने की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। एलडीए की सीमा में शामिल किए गए 197 गांवों में 38 गांव ऐसे भी थे, जो लीडा क्षेत्र में आते हैं।
इन गांवों में मानचित्र पास करने को लेकर ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इससे भवन निर्माण कराने वालों के लिए परेशानी खड़ी हो गई थी। इसके अलावा सरोजनी नगर के16 गांवों के नाम व चौहद्दी आदि में हुई त्रुटियों को भी दुरूस्त करने का फैसला किया गया है।