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निकाह के वक्त ही कहना होगा, नहीं बोलूंगा 'तीन तलाक'

Thu, 01 Feb 2018 07:04 AM IST
मोहम्मद इरफान, अमर उजाला, लखनऊ
मोहम्मद इरफान, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 01 Feb 2018 07:04 AM IST
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Decision to say no to triple talaq at the time of Marriage nikah
एक-दूसरे को मिठाई खिलातीं महिलाएं - फोटो : amar ujala
निकाह के कुबूलनामे के वक्त ही शौहर को यह भी कुबूल करना होगा कि वह एक साथ तीन तलाक नहीं बोलेगा। एक साथ तीन तलाक के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मॉडल निकाहनामा में यह प्रावधान कर रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की हैदराबाद में 9 फरवरी को होने वाली तीन दिवसीय बैठक में सभी मसलकों के उलमा इस पर चर्चा करेंगे। 
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सामाजिक पाबंदी लगाने के लिए मॉडल निकाहनामा में जोड़ा जाएगा प्रावधान

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक साथ तीन तलाक पर कानूनी पाबंदी लगाने के पक्ष मे नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए बिल को भी बोर्ड नामंजूर कर चुका है। बोर्ड का मानना है कि तीन तलाक का मुद्दा भी कुरान व हदीस की बुनियाद पर है। इसमें किसी भी तरह का बदलाव नही हो सकता है। हालांकि बोर्ड एक साथ तीन तलाक को सामाजिक बुराई मानता है और इस पर सामाजिक स्तर पर ही पाबंदी लगाने के पक्ष में है। बोर्ड पहले ही तलाक के मामले में कोड ऑफ कंडक्ट जारी कर एक साथ तीन तलाक देने वाले का सामाजिक बहिष्कार करने का एलान कर चुका है।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बेजा इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कमर कसी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी मॉडल निकाहनामा में की गई व्यवस्था को लेकर दलील देते हैं कि एक ही वक्त में तीन तलाक से कई बार परिवार बिखर जाता है, पर कई मौकों पर ये महिलाओं के हित मे रहता है और वे खुद एक ही वक्त में तलाक चाहती हैं। महिलाओं और परिवार के हित को ध्यान मे रख कर बोर्ड ने मॉडल निकाहनामे में एक लाइन जोड़ी है जिसमें शौहर ये वादा करेगा कि वो भविष्य मे एक ही वक्त में तीन तलाक नहीं बोलेगा। तलाक जरूरी होने पर वो एक वक्त मे एक ही तलाक देगा ताकि परिवार न टूटे इसकी गुंजाइश बनी रहे।
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देश भर मे एक ही निकाहनामा के चलन को काजी किए जाएंगे तैयार

हैदराबाद में 9 फरवरी की बैठक में सभी मसलकों के उलमा से होगी चर्चा


मुसलमानों के अलग-अलग मसलकों के अपने निकाहनामे हैं। वहीं बाजार में उपलब्ध निकाहनामा भी शादियों मे इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में पर्सनल लॉ बोर्ड की कोशिश है कि देश भर मे एक ही निकाहनामा चलन में रहे ताकि कोई दुश्वारियां पैदा न हो। पर्सनल लॉ बोर्ड हैदराबाद की सालाना बैठक में सभी मसलकों के उलमा से मॉडल निकाहनामे को लेकर चर्चा करेगा। सभी उलमा की मंजूरी मिलने के बाद एक ही मॉडल निकाहनामे को चलन में लाने के लिए बोर्ड काजियों को तैयार करेगा। काजी पर्सनल लॉ बोर्ड के निकाहनामे पर निकाह पढ़ाने के साथ ही शौहर को एक साथ तीन तलाक भविष्य मे न देने के वादे पर दस्तखत करवाएंगे।

खुला: अगर शौहर उसके अधिकारों को पूरा नही कर रहा है, प्रताड़ित कर रहा है और उसके साथ जिंदगी निभाना नही चाहती है तो बीवी दारुलकजा जाकर काजी के सामने खुला का प्रस्ताव रख सकती है। काजी शौहर से संपर्क कर दोनों की रजामंदी से निकाह खत्म करवा देगा।
फस्ख-ए-निकाह : बीवी के खुला मांगने पर भी अगर शौहर तलाक नहीं दे रहा है, काजी के बुलाने पर भी वो दारुलकजा में हाजिर नहीं हो रहा, बीवी किसी भी तरह से शौहर के साथ रहने को राजी नहीं है तो काजी निकाह को फस्ख (खत्म) कर सकता है।

तलाक देने का बेहतर तरीका

Decision to say no to triple talaq at the time of Marriage nikah
triple talaq
शौहर को तलाक देने का तो बीवी को लेने का है हक

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के कार्यकारिणी के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली बताते हैं कि शौहर-बीवी के विवाद में जब समझौते की गुंजाइश न रह जाए तो ऐसी सूरत में कुरान में तलाक देने के तरीकों को विस्तार से बताया गया है। इस्लाम ने जहां शौहर को तलाक देने का हक दिया है तो बीवी को शौहर से तलाक लेने का हक दिया है।
 
तलाक देने का बेहतर तरीका

तलाक-ए-एहसन : मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली कहते हैं कि तलाक-ए-एहसन सबसे अच्छा तरीका है। इसके तहत तीन माह के अंतराल में तलाक दिया जाना चाहिए। पहले माह में एक बार तलाक कह कर छोड़ देना चाहिए। दूसरा तलाक महिला की अगली माहवारी के बाद और तीसरी बार तलाक फिर एक माह के इंतजार केबाद दिया जाना चाहिए ताकि इस अंतराल में पति-पत्नी केबीच सुलह व समझौता की गुंजाइश बनी रहे।

तलाक-ए-हसन : दूसरा सही तरीका तलाक-ए-हसन है। इसके मुताबिक पाकी (माहवारी का वक्त गुजर चुका हो) की हालत में सिर्फ एक बार तलाक देकर छोड़ना होता है। इद्दत (40 दिन) का समय गुजर जाने पर निकाह खुद खत्म हो जाएगा। इसमें इद्दत के दौरान शौहर-बीवी में सुलह और इद्दत के बाद दोबारा निकाह होने की गुंजाइश बनी रहती है।
 

सबसे खराब तरीका

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पदाधिकारी - फोटो : amar ujala
सबसे खराब तरीका

तलाक-ए-बिदअत : तलाक-ए-बिदअत यानी एक वक्त में तीन तलाक सबसे बुरा तरीका है।  हालांकि एक बार में तीन तलाक चाहे जिस मंशा से दिया गया हो उसे माना जाएगा। पैगंबर मोहम्मद साहब ने इसे बुरा कहा लेकिन उसे खत्म नही किया।

महिलाएं भी ले सकती हैं तलाक

तलाक के मामले में पुरुष को रिश्ते खत्म करने का एक अधिकार है तो शरीयत ने महिलाओं को भी रिश्ता खत्म करने का खुला और फस्ख-ए-निकाह के जरिये दो अधिकार दिए हैं।
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