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Lucknow News: मरीज की मौत, इलाज में कोताही का आरोप
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लोहिया संस्थान की इमरजेंसी आईसीयू में भर्ती महिला की बृहस्पतिवार सुबह मौत हो गई। आरोप है कि वहां मौजूद महिला डॉक्टर अपनी कुर्सी से भी नहीं उठीं। वह मोबाइल पर व्यस्त रहीं। परिजनों ने महिला डॉक्टर पर इलाज में कोताही का आरोप लगाकर हंगामा किया। वहीं दूसरी ओर परिजनों ने सात घंटे बाद शव सौंपने का भी आरोप लगाया है। हालांकि संस्थान के अधिकारियों ने कोताही के आरोप को निराधार बताया है जबकि शव सौंपने में हुई देरी के मामले की जांच कराने की बात कही है।
तीमारदारों ने संस्थान प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए डिप्टी सीएम से शिकायत की बात कही है। आलमबाग निवासी गीतांजलि (60) को चार दिन पहले ब्रेन हैमरेज हुआ था। उन्हें लोहिया संस्थान के आईसीयू में वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया था। बुधवार देर रात दो से तीन बजे के बीच महिला का ब्लड प्रेशर कम होने लगा। तीमारदार ने नाइट ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर से कई दफा मरीज का बीपी कम होने की बात कही। आरोप है कि महिला डॉक्टर कुर्सी से उठने के बजाय मोबाइल पर व्यस्त रहीं। इस दौरान एक जूनियर डॉक्टर ने महिला को देखा। हालत बिगड़ने से सुबह करीब छह बजे उनकी मौत हो गई। महिला का शव देने में भी करीब सात घंटे लगा दिए। इससे नाराज तीमारदार आईसीयू के बाहर डॉक्टर व स्टाफ को खरीखोटी सुनाने लगे। वहीं स्टाफ ने बताया कि सर्वर डाउन होने से कागजी खानापूर्ति नहीं हो पाई। दोपहर करीब पौने एक बजे शव सौंपा गया।
आरोप निराधार
डॉक्टर द्वारा मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच होती है। डॉक्टर द्वारा मोबाइल पर चैटिंग करने का आरोप निराधार है। संस्थान प्रशासन किसी भी मरीज की मौत को गंभीरता से लेता है। संस्थान की उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं होती हैं। शव मिलने में इतनी देरी क्यों हुई है, इसकी जांच होगी।
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- डॉ. एके जैन, प्रवक्ता, लोहिया संस्थान
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तीमारदारों ने संस्थान प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए डिप्टी सीएम से शिकायत की बात कही है। आलमबाग निवासी गीतांजलि (60) को चार दिन पहले ब्रेन हैमरेज हुआ था। उन्हें लोहिया संस्थान के आईसीयू में वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया था। बुधवार देर रात दो से तीन बजे के बीच महिला का ब्लड प्रेशर कम होने लगा। तीमारदार ने नाइट ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर से कई दफा मरीज का बीपी कम होने की बात कही। आरोप है कि महिला डॉक्टर कुर्सी से उठने के बजाय मोबाइल पर व्यस्त रहीं। इस दौरान एक जूनियर डॉक्टर ने महिला को देखा। हालत बिगड़ने से सुबह करीब छह बजे उनकी मौत हो गई। महिला का शव देने में भी करीब सात घंटे लगा दिए। इससे नाराज तीमारदार आईसीयू के बाहर डॉक्टर व स्टाफ को खरीखोटी सुनाने लगे। वहीं स्टाफ ने बताया कि सर्वर डाउन होने से कागजी खानापूर्ति नहीं हो पाई। दोपहर करीब पौने एक बजे शव सौंपा गया।
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आरोप निराधार
डॉक्टर द्वारा मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच होती है। डॉक्टर द्वारा मोबाइल पर चैटिंग करने का आरोप निराधार है। संस्थान प्रशासन किसी भी मरीज की मौत को गंभीरता से लेता है। संस्थान की उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं होती हैं। शव मिलने में इतनी देरी क्यों हुई है, इसकी जांच होगी।
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- डॉ. एके जैन, प्रवक्ता, लोहिया संस्थान