हैवानियत: नहीं पढ़ी होगी आपने ऐसी खौफनाक पोस्टमार्टम रिपोर्ट
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से युवक की हत्या का वीभत्स तरीका उजागर हुआ। शरीर का कोई ऐसा अंग नहीं था, जिस पर चोट न लगी हो। पूरे शरीर में कुल नौ चोटें मिलीं। इसमें तीन चोट सिर पर और तीन चेहरे पर थीं। सिर की हड्डी टूटने को मौत की वजह माना गया। सिर की सभी चोटें धारदार और गहराई में थीं। माना जा रहा है कि ऐसी चोट कुल्हाड़ी से आती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखकर ही लगता है कि युवक को मार डालने की नीयत से पीटा गया। पीटने वालों में खून सवार था। इधर, पोस्टमार्टम हाउस में शव को पहचानने के लिए शिवराजपुर से कुछ लोग आए थे।
यहां से 35 वर्षीय महेश नाम का शख्स लापता है। चेहरा दिखाया गया, लेकिन वे पहचान नहीं सके। चमनगंज के भी एक परिवार ने पहचानने की कोशिश की लेकिन शव में सड़न और चमड़ी का रंग बदल जाने से पशोपेश में रहे और लौट गए।
दफन होने के बाद छपवा रहे पंफलेट
महाराजपुर पुलिस मानों खुद नहीं चाहती कि पिटाई से मरे युवक की पहचान हो। तभी 72 घंटे के बजाय 48 घंटे में ही पोस्टमार्टम करा दिया गया। युवक का फोटो भी मीडिया को जारी नहीं किया, जिससे उसकी पहचान हो सके।
युवक के दफन होने के बाद पुलिस अब उसके पंफलेट छपवा रही है। उधर, पूछताछ के लिए पकड़े गए 19 लोगों को मंगलवार की सुबह छोड़ दिया गया। नामजद राजकुमार, दीपू और रोहित को पकड़ने के लिए घरों और संभावित स्थानों पर दबिश दी गई।
नियम के विपरीत समुदाय विशेष के युवक का मंगलवार को वारदात के 48 घंटे के भीतर पोस्टमार्टम करा दिया। इसके बाद एक संस्था के माध्यम से शव को लावारिस में कब्रिस्तान में दफन करा दिया। अब युवक की शिनाख्त हो भी जाए तो परिवार वाले न तो उसे देख सकेंगे और न ही अपने हाथों से क्रिया कर्म कर सकेंगे।
सीओ सदर अमित राय का दावा है कि युवक की शिनाख्त के प्रयास चल रहे हैं। पुलिस टीम जाजमऊ की टेनरियों में गई। वहां आसपास के लोगों को फोटो दिखाया, लेकिन कोई पहचान नहीं सका।
अब युवक के हुलिया वाले पंफलेट छपवाए जा रहे हैं। इसके बाद सार्वजनिक स्थानों में चस्पा कराएंगे। अभी तक इस मामले में नौ लोगों को जेल भेजा गया है। कई और लोग शक के दायरे में है, जिनके बारे में छानबीन की जा रही है।
बता दें कि बीते दिनों महाराजपुर के जाना गांव में ग्रामीणों ने बदमाश समझकर एक युवक को कई घंटे तक अलग-अलग जगहों पर रखकर पीटा। पैर बांधकर बालू के टीले से उल्टा लटकाया।
नंगे बदन जमीन पर घसीटा। इससे भी मन नहीं भरा तो गंगा में डुबो-डुबोकर मार डाला। इसके बाद गंगा की रेती पर शव छोड़कर भाग गए थे।