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जाली नोट छापते और शाम होते ही निकल पड़ते शॉपिंग के लिए

Sun, 14 Feb 2016 03:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 14 Feb 2016 03:02 AM IST
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studnets caught with fake currency.

पढ़ाई नर्सिंग की और काम जाली नोटों की छपाई। इतना ही नहीं दिन में नोट छापते और शाम ढलते ही निकल पड़ते उन्हीं नोटों से शॉपिंग करने के लिए। शातिर दिमाग ऐसा कि सौ के ही नोटों की छपाई करते, क्योंकि लोग छोटे नोट पर ज्यादा ध्यान नहीं देते।

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ऐसा कई दिन चला, पकड़ में नहीं आए तो उनके हौसले बढ़ गए और उन्होंने इसे धंधा बना लिया। धीरे-धीरे उन्होंने गिरोह बना लिया। यह सच सामने आया, शनिवार को जब हिंद मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग के दो छात्रों समेत पांच बदमाश पुलिस के हत्थे चढ़े।
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आलमबाग पुलिस ने दो मेडिकल स्टूडेंट्स समेत पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से सौ-सौ के 111 नोट, छापने में इस्तेमाल प्रिंटर व स्कैनर के साथ ही तीन बाइक व दो तमंचे भी बरामद किए हैं।
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आलमबाग की बीजी कॉलोनी में पानी की टंकी के पास पुलिस ने घेराबंदी की। एएसपी क्राइम ब्रांच ज्ञानप्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि हिंद मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग छात्र योगेंद्र वर्मा व विवेक सिंह को गिरफ्तार किया गया है।

इस तरह देते थे अपने काम को अंजाम

studnets caught with fake currency.

उनके साथ मोहल्ला भिलावां निवासी दीपक खुराना, ओमनगर के अंसार, पुराना सरदारी खेड़ा के राहुल जायसवाल भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि योगेंद्र और विवेक सौ के नोट छापकर साथियों की मदद से बाजार में चलाता था। लालच बढ़ने पर कुछ लोगों के साथ मिलकर नोटों का धंधा शुरू कर दिया।

ऐसे करते थे छपाई

जाली नोट की छपाई करने के लिए दोनों साधारण स्कैनिंग मशीन और प्रिंटर का इस्तेमाल करते थे। दोनों ने डेढ़ साल पहले सौ का नोट स्कैन करके उसका प्रिंट निकाला। कटिंग करके अंधेरे में एक दुकान पर चला दिया। इसके बाद रोजाना 10-15 नोट छापने लगे।

सूरज ढलते ही निकल पड़ते शॉपिंग करने

इंस्पेक्टर आलमबाग विकास कुमार पांडेय ने बताया कि नर्सिंग कोर्स पूरा करके अप्रेंटिस कर रहे योगेंद्र व तृतीय वर्ष के छात्र विवेक में गहरी दोस्ती थी। योगेंद्र बस्ती के हरैया थाने के परसौडा और विवेक बहराइच के बौड़ी थाने के सराय अली का रहने वाला है। सूर्यास्त के बाद खरीदारी करने निकलते थे। कम रोशनी वाली दुकानों पर सौ के जाली नोट चलाने लगे।

इस तरह चला देते थे जाली नोट

studnets caught with fake currency.

पूछताछ में योगेंद्र व विवेक ने कुबूला कि आमतौर पर लोग हजार व पांच सौ के नोट पर ध्यान देते हैं। सौ का नोट आसानी से रख लेते हैं। इसके चलते वह सिर्फ सौ के नोट छापते थे।

दस-बीस रुपये का सामान खरीदकर सौ का नोट थमाते थे। अधिक कमाई के लालच में उन्होंने दीपक, राहुल व अंसार को जाल में फंसाया। इनके अलावा भी कई लोग जाली नोट के धंधे से जुड़े हैं।

चोखा धंधा: 40 रुपये में सौ का नोट

योगेंद्र ने खुलासा किया कि वह अपने एजेंटों को 40 रुपये में सौ का नोट देता था। एजेंटों की संख्या बढ़ने के साथ जाली नोटों की डिमांड बढ़ रही थी।

पिता की मोबाइल शॉप में हाथ बंटाने वाला दीपक, पिता की डेयरी में सहयोग करने वाला अंसार, पढ़ाई छोड़कर भटक रहे राहुल जायसवाल पांच से दस हजार के जाली नोट रोजाना खपा रहे थे।

वह बाइक लेकर विभिन्न स्थानों पर निकलते और छोटी दुकानों पर खरीदारी करके जाली नोट थमाते थे।

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