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मां ने पूरी नहीं की डिमांड तो गोमती में कूद गई छात्रा, देखती रह गई मां
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 10 Sep 2017 08:02 PM IST
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मोबाइल फोन न दिलाने से नाराज हसनगंज के रूपपुर खदरा निवासी कक्षा छह की छात्रा खुशी (14) ने शनिवार शाम पक्का पुल से गोमती नदी में छलांग लगा दी। पीछे-पीछे उसकी मां भी घटनास्थल पर पहुंची गई थी।
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उसके नदी में कूदने की खबर से इलाके में हड़कंप मच गया। पक्का पुल पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। जानकारी पाकर आई पुलिस ने गोताखोरों की मदद से छात्रा की तलाश कराई लेकिन उसका पता नहीं चला। रविवार सुबह फिर से छात्रा की तलाश में गोताखोर लगाए जाएंगे।
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पुलिस ने बताया कि छात्रा इलाके के ही एक निजी स्कूल में पढ़ती है। उसके पिता बेचूलाल ने मोची का काम करते हैं। वह चार भाई बहनों में सबसे छोटी है। शनिवार शाम करीब सात बजे वह मां कमला से मोबाइल फोन दिलाने की जिद कर रही थी।
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कमला ने मना किया लेकिन वह नहीं मानी और मोबाइल फोन की मांग पर अड़ गई। उसने रोना-पीटना शुरू कर दिया तो मां ने उसे डांट दिया।
इससे गुस्साई खुशी घर से निकल गई। वह पक्का पुल पर पहुंची और गोमती नदी में छलांग लगा दी। राहगीरों से सूचना पाकर आई पुलिस ने गोताखोर लगाए लेकिन बच्ची का कुछ पता नहीं चला।
सदमे में परिवारीजन
प्रतीकात्मक फोटो
कमला ने बताया कि बेटी गुस्से में घर से निकली तो वह उसके पीछे दौड़ीं। वह नंगे पैर सड़क पर भागने लगी। कमला उसे पुकारते हुए पीछे-पीछे गईं। बकौल कमला, बेटी पक्का पुल पर पहुंची और रेलिंग पर चढ़ गई।
उसके इरादे जानकर होश उड़ गए। हाथ-पैर कांपने लगे। बेटी को रोकने के लिए वह चीखीं लेकिन ऐसा लगा जैसे मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी। उनकी आंखों के सामने ही खुशी ने नदी में छलांग लगा दी।
वह चीखते हुए पुल पर पहुंची और राहगीरों से हाथ जोड़कर बेटी को बचाने की गुहार लगाई। उस वक्त तक अंधेरा हो चुका था इसलिए नीचे कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था। किसी की नदी में कूदने की हिम्मत नहीं पड़ी। करीब आधे घंटे बाद आए गोताखोरों ने नदी खंगाली लेकिन खुशी का कुछ पता नहीं चला। उसके नदी में छलांग लगाने की खबर से परिवारीजन सदमे में हैं।
उसके इरादे जानकर होश उड़ गए। हाथ-पैर कांपने लगे। बेटी को रोकने के लिए वह चीखीं लेकिन ऐसा लगा जैसे मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी। उनकी आंखों के सामने ही खुशी ने नदी में छलांग लगा दी।
वह चीखते हुए पुल पर पहुंची और राहगीरों से हाथ जोड़कर बेटी को बचाने की गुहार लगाई। उस वक्त तक अंधेरा हो चुका था इसलिए नीचे कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था। किसी की नदी में कूदने की हिम्मत नहीं पड़ी। करीब आधे घंटे बाद आए गोताखोरों ने नदी खंगाली लेकिन खुशी का कुछ पता नहीं चला। उसके नदी में छलांग लगाने की खबर से परिवारीजन सदमे में हैं।