फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
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लखनऊ की कृष्णानगर पुलिस ने विदेश में नौकरी का झांसा देकर फर्जी वीजा बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन ठगों को शनिवार दोपहर पैसिफिक होटल के सामने दबोच लिया।
एसओ विजय कुमार यादव ने बताया कि पकड़े गए शातिर लोगों को विदेश में मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी का झांसा देकर जाल में फंसाते थे। इसके बाद उनका वीजा बनाने के नाम पर रुपया ऐंठते थे। प्रत्येक व्यक्ति से 60 हजार रुपये लेकर फर्जी वीजा थमा दिया जाता था। बदमाशों के पास से 30 पासपोर्ट और 30 फर्जी वीजा बरामद किए गए हैं।
एसओ ने बताया कि पकड़े गए ठग देवरिया के गौरी बाजार विशुनपुर निवासी शशिकांत पांडेय उर्फ राजवीर सिंह, रामपुर कारखाना शाहजहांपुर का मीर हसन और गाजीपुर के दुल्हपुर ह्रदयपुर निवासी रवींद्र सिंह हैं।
इनके खिलाफ देवरिया के सिसवा निवासी राधेश्याम यादव व सात अन्य लोगों ने बीते शुक्रवार को एफआईआर दर्ज कराई थी। राधेश्याम के मुताबिक, कुछ महीने पहले राजवीर सिंह से विदेश में अच्छी सेलरी की नौकरी के बारे में बातचीत हुई थी।
इन पदों पर नौकरी दिलवाने का किया वादा
राजवीर ने बताया कि विदेश में उसके कई परिचित हैं जो अपने करीबी लोगों को अच्छी नौकरी दिला सकते हैं। राधेश्याम ने विदेश में नौकरी की इच्छा जताई तो उसने कहा कि दुबई के एक स्टील प्लांट में क्रेन ऑपरेटर, फिटर, इलेक्ट्रीशियन, कटर और वेल्डर सहित कई पदों पर जगह खाली हैं।
अगर वह कुछ और लोगों को ले आए तो सभी को साथ भेज देगा। राधेश्याम ने अपने परिचित रमाकांत, राजेश उपाध्याय, आशीष यादव, रामचंद्र यादव, जितेंद्र यादव, कामेश्वर यादव और अमित कुमार कुशवाहा को राजवीर से मिलवाया।
राजवीर ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति का वीजा बनवाने में 60 हजार रुपये का खर्च आएगा, जिसमें से 25 हजार रुपये एडवांस और बाकी रकम वीजा मिलने पर देनी होगी। सबने उसे 25000 रुपये की एडवांस रकम दे दी।
बीते शुक्रवार को वीजा देने के लिए राजवीर ने राधेश्याम और उसके साथियों को पैसिफिक होटल बुलवाया, जहां उसने बाकी रकम लेने के बाद सबको वीजा दे दिया। राधेश्याम ने बताया कि इंटरनेट पर वीजा चेक करने पर वह फर्जी निकला। सभी कृष्णानगर कोतवाली पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई।
गिरफ्तारी पर ये हुए खुलासे
एसओ ने बताया कि दरोगा राय साहब द्विवेदी, हेड कांस्टेबल बलदेव प्रसाद, कांस्टेबल प्रिंस यादव, बब्बन राम को ठगों की तलाश में लगाया गया था। शनिवार दोपहर दो बजे तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पता चला कि राजवीर का असली नाम शशिकांत पांडेय है। एसओ ने बताया कि ठगों ने देवरिया, गोरखपुर, बलिया के 30 लोगों के अलावा कानपुर और उन्नाव के 36 व इलाहाबाद, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, रायबरेली के युवकों सहित 90 लोगों से करीब 50 लाख रुपये की ठगी की है।
चेन्नई में बताते थे ऑफिस, फोन पर करते थे बात
राधेश्याम ने बताया कि ठगों से उसकी फोन पर ही बातचीत होती थी। गाजियाबाद के एक परिचित ने दुबई के स्टील प्लांट में नौकरी के लिए राजवीर सिंह उर्फ शशिकांत पांडेय का मोबाइल नंबर दिया था। इस नंबर पर संपर्क करने पर राजवीर ने बताया कि उनका ऑफिस चेन्नई में है। राधेश्याम ने नौकरी के लिए कहा तो उसने ई-मेल से पासपोर्ट मंगाया।
आठ-दस दिन बाद राजवीर ने राधेश्याम को फोन कर जगरानी के पास स्थित मधु डायग्नोस्टिक सेंटर में मेडिकल कराने के लिए कहा। यहां सभी से पांच-पांच हजार रुपये वसूले गए। राजवीर ने कहा कि आठ-दस दिन बाद वीजा मिल जाएगा। 19 जुलाई को राजवीर ने फिर फोन किया और लखनऊ के पैसिफिक होटल बुलाया।
देवरिया का अभिषेक दुबे है सरगना
पीड़ितों ने बताया कि ठगों के गिरोह का सरगना देवरिया का अभिषेक दुबे है। पकड़े गए बदमाशों ने पूछताछ में अभिषेक के बारे में जानकारी दी है। पुलिस की एक टीम उसकी तलाश कर रही है।