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भ्रूण के डीएनए टेस्ट से हुआ रेप के आरोपी का खुलासा, ऑटिज्म पीड़िता को बनाया का हवस का शिकार

Sat, 16 Feb 2019 10:42 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 16 Feb 2019 10:42 AM IST
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police arrested principal responsible for rape in lucknow.
प्रतीकात्मक तस्वीर

मड़ियांव पुलिस ने करीब तीन महीने पहले दर्ज दुष्कर्म के मामले को वैज्ञानिक तरीके से सुलझाने का दावा किया है। ऑटिज्म बीमारी से पीड़ित युवती से दुष्कर्म की जांच में पुलिस ने संदिग्धों की डीएनए जांच कराई। इसकी रिपोर्ट के बाद भ्रूण के डीएनए का मिलान कराया तो आरोपी का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस ने आरोपी समर्पण डे-केयर फाउंडेशन के प्रिंसिपल को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया।

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एसएसपी कलानिधि नैथानी के मुताबिक ऑटिज्म के कारण युवती बोल नहीं पाती। उसका देहरादून की संस्था में छह वर्षों से इलाज चल रहा है। छह जुलाई 2018 को वह छुट्टी पर घर आई थी। इस दौरान परिवारीजनों ने उसे ट्रेनिंग को मड़ियांव स्थित समर्पण डे-केयर फाउंडेशन भेजना शुरू किया। युवती सुबह 10 से शाम 4 बजे तक वहां ट्रेनिंग लेती थी।
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जांच में निकला 19 सप्ताह का गर्भ
क्षेत्राधिकारी अलीगंज दीपक कुमार सिंह के मुताबिक छुट्टियां खत्म हुई तो युवती 28 जुलाई 18 को वापस देहरादून स्थित संस्था चली गई। वहां रूटीन चेकअप में उसका 19 सप्ताह का गर्भ होने की बात सामने आई। संस्था के अधिकारियों की सूचना पर परिवारीजन देहरादून पहुंचे और युवती को लखनऊ लेकर आ गए। इसके बाद 28 नवंबर को मड़ियांव थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज कराया।

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सिर्फ बहन का नाम लेती है पीड़िता

मड़ियांव प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह के मुताबिक पीड़िता सिर्फ बहन का नाम लेती है। इसके अलावा मां और पा ही बोल पाती है। ऐेसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी बिना युवती की मदद के आरोपी तक पहुंचना।

पुलिस ने जांच देहरादून से शुरू की, फिर लखनऊ पहुंची। यहां रहने की तारीख से युवती की रिपोर्ट के आधार पर गर्भ की गणना की गई। इसके आधार पर तारीख निकाली गई, लेकिन कुछ खास सुराग नहीं लगा। पुलिस ने पीड़िता के घर में काम करने वाले नौकरों व कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ की। कई स्थानों के सीसीटीवी फुटेज निकलवाए पर कुछ हाथ न लगा।

तीन के खून का लिया नमूना
क्षेत्राधिकारी अलीगंज दीपक कुमार सिंह के मुताबिक पुलिस ने समर्पण डे केयर फाउंडेशन पर नजर रखनी शुरू की। तारीख से युवती के संस्था में रहने का भी खुलासा हुआ। इसके बाद संस्था में तैनात तीन पुरुषों पर निगरानी बढ़ाई गई। संदिग्ध मानते हुए इनके खून का नमूना लिया गया। इसके लिए मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने नमूना डीएनए जांच को भेजा।

प्रिंसिपल निकला भ्रूण का बॉयोलॉजिकल पिता

क्षेत्राधिकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले डीएनए रिपोर्ट पुलिस के हाथ लगी। इसके मुताबिक समर्पण डे-केयर फाउंडेशन का प्रिंसिपल डॉ. खुशाल सिंह युवती के गर्भ में पलने वाले 19 सप्ताह के भ्रूण का बॉयोलॉजिकल पिता है।

पुलिस के मुताबिक खुशाल सिंह मूलरूप से उत्तराखंड के नैनीताल स्थित रिहाड़ तल्ला का रहने वाला है। वह अलीगंज में राम-राम बैंक के  पास एसबीआई कॉलोनी में रहता है। पुलिस ने उसे शुक्रवार सुबह दबोच लिया। आरोपी ने जुर्म कुबूल कर लिया।

उसे दबोचने में प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, एसएसआई मो. अहमद, उपनिरीक्षक संजय मिश्रा, कांस्टेबल अरविंद सिरोही, मनोज कुमार ने अहम भूमिका निभाई।

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