{"_id":"9bc46b674198d94cbabc0ee3a9d9ce37","slug":"patient-make-postage-in-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस अस्पताल में बंधक बनाकर हो रहा इलाज ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
इस अस्पताल में बंधक बनाकर हो रहा इलाज
मनीष कुमार सिंह/लखनऊ
Updated Sat, 30 Nov 2013 09:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी में मरीजों का सौदा हो रहा है। निजी अस्पतालों से मरीज देने के एवज में मोटा कमीशन वसूला जा रहा है। निजी अस्पताल ऐसे लाए गए मरीजों से जमकर वसूली कर रहे हैं।
विज्ञापन
पैसा न देने पर बंधक तक बना लिया जाता है। ऐसा ही एक मामला इंदिरानगर के गायत्री अस्पताल में सामने आया है। जहां नेपाल निवासी मरीज को बंधक बना लिया गया।
इसके बाद जो हकीकत सामने आई वह अस्पताल में मरीजों को पहुंचाने के लिए एंबुलेंस और कर्मचारियों के गिरोह का खुलासा करती है।
इंदिरानगर के रवींद्र पल्ली में चल रहे गायत्री अस्पताल में मरीजों को बंधक बनाकर इलाज करने की शिकायत के बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
पढ़ें-केजीएमयू की नई ओपीडी में भटकते रहे मरीज
विज्ञापन
अस्पताल में भर्ती एक मरीज के तीमारदार का आरोप है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज को सस्ते इलाज के नाम पर भर्ती किया जाता है और उसके बाद उनसे धन की उगाही की जाती है।
विज्ञापन
नेपाल के जिला बांके के करमोहना नेपालगंज के रहने वाले शमसुद्दीन शेख की पत्नी हसीना शेख (21) को सांस लेेन में दिक्कत थी।
पति ने उसे नेपालगंज नर्सिंग होम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। हालत बिगड़ने पर आईसीयू की जरूरत पड़ी तो डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
परिवारीजन 21 नवंबर को उन्हें लेकर केजीएमयू पहुंचे तो डॉक्टरों ने आईसीयू में बेड न खाली होने की बात कहकर मरीज को वापस कर दिया।
इसके बाद पति और चाचा वसीम अहमद उनको एंबुलेंस से किसी दूसरे सरकारी अस्पताल ले जाने लगे। तभी एंबुलेंस ड्राइवर ने उन्हें सस्ते और बढ़िया इलाज का झांसा देकर इंदिरानगर स्थित गायत्री अस्पताल में भर्ती करा दिया।
वसीम अहमद ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने भर्ती होने के पहले ही दिन इलाज शुरू करने के नाम पर 25 हजार रुपये जमा करवा लिए।
चार दिन बाद हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और अस्पताल के डॉक्टरों ने एक लाख 35 हजार रुपये का बिल बनाकर थमा दिया।
पति और चाचा ने पैसे न होने की बात कहकर छुट्टी मांगी तो अस्पताल प्रशासन ने मरीज को एक अलग कमरे में बंद कर दिया और कहा कि जब तक पैसे नहीं आ जाते डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा।
मरीज का इलाज फिजीशियन डॉक्टर आरपी सिंह कर रहे थे। घबराए परिजनों ने दस रुपये के नोटरी पर 28 नवंबर को इसकी लिखित शिकायत जिला प्रशासन और सीएमओ से की।
पढ़ें-CM बोले, अब सबको मिलेगा एक जैसा इलाज
अस्पताल प्रशासन को जैसे ही इसकी भनक लगी उन्होंने मरीज को तुरंत अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। वहीं जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के खिलाफ मिली गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करने का मन बना रहा है।
उधर, हसीना शेख के चाचा वसीम अहमद ने बताया कि जब वो मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो वहां पर खड़े अजय और कमल नाम के एंबुलेंस ड्राइवर ने उनको सस्ते इलाज का झांसा दिया।
इसके बाद वह उन्हें इंदिरागनर के गायत्री अस्पताल ले आया। वसीम अहमद ने बताया कि अस्पताल आने वाले अधिकतर मरीजों को एंबुलेंस ड्राइवर ही लाते हैं जिसका कमीशन तय है।
अगर मरीज को पैसे की कमी पड़ती है तो एंबुलेंस ड्राइवर ही उनके घर जाने की पूरी तैयारी करते हैं ताकि तीमारदार घर जाकर पैसे की व्यवस्था कर सके।
वहीं, वसीम अहमद की मानें तो अस्पताल में अभी नेपाल के दो से तीन और मरीज बंधक बनाकर रखे गए हैं जो पैसा न होने के कारण अस्पताल से छुट्टी नहीं पा पा रहे हैं।
उनके मुताबिक अस्पताल के डॉक्टर मरीजों का मनमाना इलाज और जांच कर बेवजह की वसूली कर रहे हैं। अगर कोई इसका विरोध करता है तो उनसे मुंह बंद रखने की बात कही जाती है।
अस्पताल में बंधक बना कर इलाज होता है। मरीज और तीमारदार सीएम, डीएम और सीएमओ से इसकी शिकायत करने की बात कहते हैं तो अस्पताल के कर्मचारी सीएम, डीएम और सीएमओ से नहीं डरने की बात कहते हैं।
आलम ये है कि अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी मनचाहा काम करवाते हैं और धमकी देते हैं कि अगर किसी ने उनके खिलाफ शिकायत की तो मरीज की जान भी आफत में पड़ सकती है।
(इस खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेट करें, शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर बटन पर क्लिक करें)