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नाका अग्निकांड: दोषी चिह्नित किए बगैर निलंबन का आदेश, सात मौतों के जिम्मेदारों पर अब तक कार्रवाई नहीं

Wed, 23 Jun 2021 12:38 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 23 Jun 2021 12:38 PM IST
सार

नाका अग्निकांड में दो होटलों में आग लग जाने से सात लोगों की जलकर मौत हो गई थी। मामले में तीन साल बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। 

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no action against responsible for seven deaths in Naka fire case.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

19 जून 2018 को ठीक तीन साल पहले नाका के दो होटलों में आग लगने से सात मौतें हुईं थीं। इस मामले में एलडीए सहित किसी विभाग के जिम्मेदारों पर कार्रवाई सिर्फ फाइलों तक सीमित है। शासन और एलडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने जिम्मेदारों के बारे में गलत सूचना भेजने वाले को चिह्नित किए बगैर ही उसे निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।

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शासन से आए फरमान के बाद अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने भी मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि शासन को त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट भेजने वाले पर पहले कार्रवाई की जाए। सचिव और वीसी को भी यह पत्र भेजा गया है, जिससे कि ऐसी गलत रिपोर्ट भेजने वाले को तत्काल चिह्नित किया जा सके।
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शासन से यह निर्देश तब आया है जबकि विशेष सचिव आवास की अध्यक्षता में बनी जांच समिति को पांच इंजीनियरों ने खुद की तैनाती वहां होने पर सवाल उठाते हुए ज्ञापन दिया। इनमें धन्नीराम, जनार्दन सिंह, प्रमोद कुमार सिंह, अनिल कुमार द्वितीय, प्रभुनाथ पांडेय शामिल हैं। रिपोर्ट में इनको तीन महीने से लेकर डेढ़ साल तक तैनात दिखाया गया था जबकि इन्होंने खुद की तैनाती होने से शासन में ज्ञापन देकर मना किया।

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तर्क, गलत रिपोर्ट से कार्रवाई करने में देरी

अधिकारियों का तर्क है कि एलडीए से भेजी गई जिम्मेदारों की गलत रिपोर्ट से जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। ऐसे में गलत रिपोर्ट भेजने वाले पर पहले कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, तीन साल में सात निर्दोषों के जिंदा जल कर मर जाने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। अधिकारी होटल मालिकों तक पर सख्ती नहीं करा पाए।

एसजेएस इंटरनेशनल का रेनोवेशन शुरू
तीन साल पहले हादसे के बाद भी एलडीए की लापरवाही जारी है। मौके पर जहां होटल विराट ने अपना निर्माण पूरी तरह तोड़ दिया है। वहीं एलडीए के दो बाद ध्वस्तीकरण करने के बाद भी दूसरे सटे हुए होटल एसजेएस इंटरनेशनल का रिनोवेशन फिर से शुरू कर दिया गया है। इतना ही नहीं पिछले साल आई शमन नीति में इंजीनियरों ने इस होटल की बिल्डिंग का चोरी-छिपे शमन भी कर दिया। इसकी भनक तक किसी को नहीं लगने दी गई। इसी का फायदा उठा भवन स्वामी ने रेनोवेशन चालू कर दिया।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?

एलडीए और आवास विभाग दोनों के अधिकारियों से यह सवाल उठता है कि आखिर कितने सालों में इन जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो पाएगी। इसमें आईएएस, पीसीएस अधिकारियों के अलावा इंजीनियर सहित करीब 30 को एलडीए से जिम्मेदार पाया गया था। जिन्होंने अपना काम नहीं किया। 

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