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गौरी हत्याकांडः सवाल जो पुलिस पर शक पैदा करते हैं?

Wed, 11 Feb 2015 12:42 PM IST
Updated Wed, 11 Feb 2015 12:42 PM IST
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lucknow police fail to solve gauri murder case?

कानून की छात्रा गौरी की हत्याकांड को लेकर पुलिस की थ्योरी सवालों के घेरे में है। कई चौंकाने वाले तथ्य हैं तो कई लिंक मिसिंग हैं। सबसे ज्यादा चौंकाती है अनुज की गिरफ्तारी। आखिर उसे किस जुर्म में जेल भेजा गया, अफसरों के पास इसका जवाब तक नहीं। जांच अफसर कहते हैं, हत्या में उसकी भूमिका का पता लगाया जा रहा है।

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उनका बेहद गैर जिम्मेदाराना जवाब है, अनुज ने कातिल हिमांशु प्रजापति के साथ शराब पी थी इसलिए यह बात गले नहीं उतरती कि उसे इस संगीन वारदात की जानकारी नहीं थी। यानी पुलिस ने कयासों पर ही उसे जेल भेज दिया।

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सवाल यह भी है कि वह कौन-सा दबाव था जिसके चलते पुलिस ने छानबीन करने की भी जहमत नहीं उठाई? ऐसे ही तीखे सवाल एएसपी क्राइम दिनेश सिंह से किए अमर उजाला ने। उन्होंने सफाई दी तो कुछ मामलों में पुलिस की लापरवाही भी मानी।
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तेलीबाग में हुआ कत्ल अमीनाबाद में तफ्तीश

lucknow police fail to solve gauri murder case?

कानून की छात्रा गौरी हत्याकांड के खुलासे पर ही नहीं कत्ल व साक्ष्य मिटाने की तफ्तीश अमीनाबाद पुलिस को सौंपने पर भी सवाल उठने लगे हैं। सीसीटीवी फुटेज में एक फरवरी की दोपहर दोस्त के साथ जाती दिखी गौरी की हत्या पीजीआई थाना क्षेत्र में हुई और शरीर के टुकड़े भी वहीं फेंके गए।

अमीनाबाद में गौरी के अपहरण का मुकदमा दर्ज था और पीजीआई में हत्या व साक्ष्य मिटाने की रिपोर्ट लिखी गई थी। बावजूद इसके शिनाख्त होते ही तफ्तीश अमीनाबाद पुलिस को सौंप दी गई।

गौरी एक फरवरी की दोपहर लॉन्ड्री जाने की बात कहकर घर से पैदल निकली। काफी देर तक न लौटने पर परिवारीजनों ने तलाश शुरू की। काफी देर बंद रहे मोबाइल पर शाम 6:58 बजे मां की कॉल रिसीव हुई। बात करने वाले दोस्त ने गौरी की तबीयत खराब होने की जानकारी देते हुए ईको पार्क के पास बुलाया।

परिवारीजन ईको पार्क पहुंचे, लेकिन कॉल रिसीव करने वाला नहीं मिला। पिता शिशिर ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। पुलिस के न आने पर रात नौ बजे अमीनाबाद कोतवाली पहुंचकर गौरी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई।

नहीं हुआ था गौरी का अपहरण

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दो फरवरी की सुबह पीजीआई थाना क्षेत्र में शहीद पथ के किनारे व नहर के पास गौरी के शरीर के टुकड़े मिले। तीन बैग में टुकड़ों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ अज्ञात के खिलाफ हत्या व साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज कर तहकीकात शुरू की। देर रात शिनाख्त हुई।

इस बीच कैसरबाग के लाटूश रोड व अशोकनगर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से स्पष्ट हो चुका था कि गौरी का अपहरण नहीं हुआ है। बल्कि पैदल चलते हुए वाट्सएप पर चैटिंग की और एक युवक की बाइक पर मर्जी से बैठी। गौरी के बताए रास्ते पर युवक बाइक ले गया था। स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद पीजीआई थाने में दर्ज हत्या व साक्ष्य मिटाने के मुकदमे की तफ्तीश अमीनाबाद स्थानांतरित कर दी गई। इसे लेकर पुलिस में मतभेद हैं।

हत्याकांड की पड़ताल से लेकर खुलासे तक जुड़े रहे पुलिसकर्मियों का कहना है कि गौरी अपनी मर्जी से गई थी तो अपहरण का मुकदमा खारिज हो जाना चाहिए था। हत्या, शरीर के टुकड़े करके फेंकने का मामला पीजीआई क्षेत्र का है। हिमांशु की गिरफ्तारी से स्पष्ट हो चुका है। ऐसे में हत्याकांड की तफ्तीश पीजीआई पुलिस को करनी चाहिए थी।

अमीनाबाद में एक फरवरी को गौरी के अपहरण का मुकदमा लिखा गया था। इसके बाद दो फरवरी को पीजीआई थाना क्षेत्र में गौरी के शरीर के टुकड़े मिले। पुलिस ने हत्या व साक्ष्य मिटाने की रिपोर्ट लिखी। देर रात शिनाख्त होने पर पता चला कि घटनाक्रम अमीनाबाद से शुरू हुआ था। इसलिए तफ्तीश हत्याकांड की अमीनाबाद पुलिस को सौपी गई- आरके चतुर्वेदी, डीआईजी रेंज

सवाल जो शक पैदा करते हैं

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7 फरवरी की शाम तक पुलिस खाली हाथ थी। हत्यारे पर 50 हजार का इनाम घोषित होते ही पुलिस को सुराग भी मिल गए और वह कातिल तक देर रात पहुंच भी गई। आखिर कैसे ?

जवाबः सच तो यह है कि इंटरनेट लॉग एनालिसिस से 7 फरवरी की शाम से दिशा मिलनी शुरू हुई और 90 मोबाइल नंबर राडार पर लेकर छंटनी शुरू हुई और पांच घंटे में दो मोबाइल ट्रेस हुए जो वॉट्सएप पर गौरी से जुड़े थे। क्राइम ब्रांच की टीम ने शशांक गुप्ता के घर दस्तक दी। तहकीकात के बाद हिमांशु प्रजापति के घर दबिश दी गई। उस वक्त तक कातिल पर 50 हजार का इनाम घोषित होने की जानकारी नहीं थी।

परिवार भले ही नकारें, पर घर में मिले खून के धब्बे हिमांशु के माता-पिता का कहना है कि वे 4 फरवरी को लौटे तो घर में सब कुछ सामान्य था। कहीं खून के निशान तक नहीं थे। यह कैसे संभव है?

जवाबः कमरे के पर्दे व वहां रखे तेल के डिब्बे पर खून के धब्बे मिले। वाइपर पर खून लगा था और हत्या में इस्तेमाल आरी बरामद हुई। उस पर भी खून के निशान थे। इसके अलावा गौरी का मोबाइल भी मिला है।

फुटेज जारी होने के बाद भी हिमांशु प्रजापति बाइक लेकर घूमता रहा। पुलिस को नजर नहीं आया। अचानक बाइक कैसे पहचान ली गई?

जवाबः तेलीबाग का लोकेशन ट्रेस होने पर एक सेक्टर चिह्नित कर एसएसपी की ओर से पीजीआई पुलिस व एक विशेष टीम को इलाके में सर्च के आदेश दिए गए थे। इसमें लापरवाही नजर आ रही है और जांच चल रही है।

हत्या में अनुज की क्या भूमिका थी और उसे साफ क्यों नहीं किया गया?

जवाबः हिमांशु के कॉल डिटेल व घर में खड़ी बाइक से अनुज से उसकी दोस्ती का पता चला। गौरी का गला दबाने और उसके शरीर के टुकड़े करके फेंकने के बीच के डेढ़ घंटे में हिमांशु ने अनुज को घर से बुलाकर मॉडल शाप में उसके साथ शराब पी। संगीन वारदात की उसे जानकारी न होने की बात गले नहीं उतर रही थी। विभिन्न बिंदुओं पर तहकीकात चल रही है। दोष साबित न होने पर धारा 169 के तहत उसे रिहा कराया जाएगा।

कपड़े का रंग कैसे बदला?

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गौरी की मां तृप्ता कह रही है कि पीलिया ग्रस्त गौरी उनका सूट पहनती थी और एक फरवरी को वह काला-सफेद कुर्ता व लाल सलवार पहनकर निकली थी, जबकि पुलिस ने हरा कुर्ता दिखाया है?

जवाबः हिमांशु ने गौरी के शरीर के टुकड़ों के साथ उसके कपड़े भी बैग में भरकर फेंके थे। पोस्टमार्टम की पोटली में रखा खून से सना कुर्ता उसके परिवारीजनों को दिखाया गया और उन्होंने पहचाना था।

पुलिस ने गौरी का मोबाइल बरामद होने की बात कही है लेकिन उसके घरवालों को मोबाइल नहीं दिखाया। न ही गौरी के स्वेटर व चप्पलें दिखाई। वारदात स्थल क्यों नहीं दिखाया?

जवाबः हिमांशु के कब्जे से बरामद गौरी का मोबाइल पारदर्शी पन्नी में रखकर गौरी के माता-पिता को दिखाया गया। उन्होंने उसकी पहचान की थी। हिमांशु ने गौरी का स्वेटर व चप्पलें पास में नहर में फेंकने की बात कुबूली थी, जो अभी बरामद नहीं हो सकी हैं।

क्या पहली बार आरी चलाने वाला कोई व्यक्ति इतनी सफाई से किसी को काट सकता है?

जवाबः हिमांशु प्रजापति को हत्या के बाद घर में पड़ा गौरी का शव ठिकाने लगाना था। वह शराब पीने के बाद आरी व बैग लेकर घर लौटा था। जुनून में उसने गौरी के अंग काटे थे और गिरफ्तारी होने पर जुर्म कुबूला है।

हिमांशु ने गौरी की लाश के छह टुकड़े बैग में भरे और बाइक से तीन चक्कर लगाकर उन्हें ठिकाने लगाया। क्या कोई अकेला शख्स ऐसा कर सकता है?

जवाबः अटपटा जरूर लग रहा है लेकिन हिमांशु ने कुबूला है कि पहले गौरी के दोनों पैर व कपड़े बैग में रखे और उन्हें फेंकने गया। इसके बाद हाथ और सिर और फिर धड़ फेंकने गया था। बड़ा बैग बाइक की टंकी पर रखकर निकला था। साथ में कोई और व्यक्ति होता तो शरीर के टुकड़े झाड़ी, नदी-तालाब या किसी दूर के स्थान पर फेंके जाते।

5 फरवरी को गौरी का रूट चार्ट जारी करने पर पुलिस ने उसका लोकेशन एक फरवरी को दोपहर 1:14 बजे घर में, 1:32 से 3:02 बजे तक तारक मुखर्जी रोड यानी मॉडल हाउस इलाके में, शाम 6:58 से 7:28 तक तेलीबाग और 7:35 से 7:42 तक ईको पार्क में बताया था।
जवाबः गौरी के मोबाइल पर दोपहर 12:39:58 से शाम 6:58:25 तक न कोई कॉल आई और न ही एसएमएस आया। मोबाइल बंद होने तक इंटरनेट पर तारक मुखर्जी रोड के टावर से जुड़ा बताया जा रहा था। सर्विलांस की सतही जानकारी रखने वाले पुलिसकर्मी उस अवधि को मॉडल टाउन इलाके का लोकेशन समझ रहे थे। गौरी का रूट चार्ट जारी होने की जानकारी नहीं है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि गौरी का शरीर जिस तरह से काटा गया वह मोटराइज्ड हथियार से ही संभव है। पुलिस कैसे कह सकती है कि गौरी के अंगों को आरी से काटा गया।
जवाबः पोस्टमार्टम में मोटराइज्ड हथियार का जिक्र नहीं है। डॉक्टरों ने टिश्यू रैपचर्ड होने की बात कही है। आरी से ठोस लकड़ी काटी जाती है, जबकि महिला की हड्डियां काफी मुलायम होती हैं।






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