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'दागी अफसरों की मदद से झूठे मुकदमे लिखते थे SSP यादव'

Mon, 04 May 2015 09:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 04 May 2015 09:36 AM IST
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Investigation starts in SSP Yashshavi Yadav case.

यशस्वी यादव द्वारा दागी इंस्पेक्टर व पुलिसकर्मियों की मदद से आपराधिक साजिश रचने के मामले में मीडियाकर्मी ने डीजीपी एके जैन से शिकायत करके कार्रवाई की मांग की थी।

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आरोप है कि यशस्वी यादव ने फर्जीवाड़े में लिप्त इंस्पेक्टर नागेंद्र चौबे और अपराधियों से साठगांठ को लेकर चर्चित दरोगा अनुराग उपाध्याय के साथ मिलकर मीडियाकर्मी को फर्जी मामले में फंसाने का कुचक्र रचा।
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उन्होंने थानों की दलाली करने वाले अरुण अवस्थी से मीडियाकर्मी के खिलाफ तहरीर लिखाकर फंसाने का जिम्मा कानपुर में साथ रहे एएसपी प्रोटोकाल डॉ अनिल कुमार मिश्रा को सौंपा।
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ठोस आधार के साथ मीडियाकर्मी ने उच्च स्तरीय जांच के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। इस पर आईजी जोन जकी अहमद को जांच सौंपी गई।

आईजी जोन का कहना है कि शिकायत में कुछ बिंदुओं पर डीआईजी रेंज आरके चतुर्वेदी से रिपोर्ट मांगी थी। डीआईजी आरके चतुर्वेदी ने बताया कि एएसपी प्रोटोकाल को तलब करके संबंधित फाइल कब्जे में ली गई है और जल्द ही जांच रिपोर्ट आईजी को सौंप दी जाएगी।

बेचैन हैं दागी पुलिसकर्मी

Investigation starts in SSP Yashshavi Yadav case.

मीडियाकर्मियों के खिलाफ यशस्वी यादव के फर्जीवाड़े में विभूति खंड के इंस्पेक्टर नागेंद्र चौबे और उसकी टीम के दरोगा अनुराग उपाध्याय की बेचैनी बढ़ी है।

दो साल पहले कुत्ते की खाल को बाघ की खाल बताकर एक व्यक्ति को जेल भेजने में चर्चा में आए नागेंद्र चौबे का नाम सेक्स रैकेट संचालिकाओं के साथ जुड़ा था।

इसी तरह ठाकुरगंज में व्यापारी की सरेराह हत्या व उसके दोस्त पर कातिलाना हमले के आरोपियों से दरोगा अनुराग उपाध्याय की दोस्ती उजागर होने पर तत्कालीन एसएसपी जे रविंदर गौड ने उसे निलंबित किया था।

एक सपा नेता का दामन थाम कर उसने कृष्णानगर कोतवाली में दुबारा तैनाती कराई। वहां वकील पर हमले के मामले में फंसा। इसकी जांच दूसरे जिले की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी।

यह दरोगा भी यशस्वी यादव का करीबी बना था। इसी तरह मनमानी की चाह में कानपुर से तैनाती कराने वाले एएसपी, सीओ, इंस्पेक्टर और दरोगा बेचैन हैं। यशस्वी के हटते ही उनकी टीम के कारनामे सामने आने लगे हैं।

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