फेसबुक और व्हाट्स एप से इस तरह शुरू हुआ था सेक्स रैकेट
कानपुर में एक कथित सपा नेता की सरपरस्ती में चल रहे सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ करके पुलिस ने सरगना समेत नौ कालगर्लों और छह युवकों को दबोच लिया। बाद में एक युवक पुलिस को चकमा देकर थाने से भाग निकला।
पकड़े गए युवकों में एमईएस का एक संविदा कर्मचारी और दूसरा सत्ताधारी दल से जुड़ा है। पकड़ी गई कालगर्लों में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, यूपी की लड़कियां शामिल हैं। पुलिस ने पकड़े गए लोगों पर पीटा एक्ट की कार्रवाई की है।
सेक्स का यह कारोबार शहर में इंटरनेट और एनजीओ के जरिए चल रहा था। पुलिस की पूछताछ में भी यही बात निकलकर सामने आई है। सेक्स वर्कर से जुड़ी एनजीओ की एक सदस्य ने ही इलाहाबाद के साहिल को फेसबुक और व्हाट्स एप पर कालगर्लों की फोटो भेजी।
इसके बाद साहिल ने जिन सेक्स वर्कर को पसंद किया, उन्हें कोलकता से कानपुर कारोबार के लिए भेजा गया। सेक्स वर्करों ने बताया कि सोनागाछी में इस समय धंधा मंदा पड़ने से वे लोग कमाई के लिए कानपुर आईं।
बाद में कुछ यूं हो गया उसका रुप
सेक्स वर्करों के मुताबिक दुर्बर महिला समन्वय कमेटी सेक्स वर्करों की बेहतरी के लिए काम करती है। यहां देह व्यापार करने वाली महिलाओं का रजिस्ट्रेशन होता है। सदस्य बनने के बाद संस्था बाकायदा परिचय पत्र देती है।
जिस्म फरोशी के गुर सीखने के लिए किसी पुरानी महिला सदस्य के साथ काम पर लगाया जाता है। गुर सीखने के बाद महिला बिना किसी सहयोग के सोनागाछी एरिया में धंधा कर सकती है। संस्था और धंधे में माहिर महिला के साथ जुड़कर धंधा करने पर सेक्स वर्कर को कमाई का 50 फीसदी पैसा मिलता है। बाकी पैसा संस्था और महिला के बीच बंट जाता है।
कालगर्लों ने बताया कि संस्था की एक महिला की साहिल उर्फ छोटू से दोस्ती है। उस महिला के माध्यम से साहिल की सोनागाछी की दो सेक्स वर्कर से मुलाकात हुई। उन सेक्स वर्करों ने ही छह कालगर्लों को रोजाना तीन हजार रुपये के कांट्रेक्ट पर कानपुर भेजा। बकौल कालगर्ल वे लोग हावड़ा-जोधपुर ट्रेन से इलाहाबाद पहुंचीं।
वहां साहिल उर्फ छोटू और मुनि ने उन्हें रिसीव किया। इसके बाद उन्हें ट्रेन से कानपुर भेज दिया। यहां से दीपक उन्हें अपने अड्डे तक ले गया। कालगर्ल ने बताया कि जिश्म फरोशी का धंधा शुरू करने की बात सोमवार से हुई थी लेकिन रविवार को ही दीपक ने काम शुरू करने की बात की तो उन्होंने विरोध किया।
इस पर दीपक और उसके साथियों ने उसे पीटा। खुद की जान को खतरा देख वे दोनों वहां से भागीं और 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सेक्स रैकेट का पर्दाफाश कर दिया।
दो को ब्वायफ्रैंड ने धंधे में उतारा
ग्वालियर और महाराष्ट्र में रहने वाली युवतियों को उनके ब्वायफ्रैंड ने जिस्म फरोशी के धंधे में झोंक दिया। महाराष्ट्र की युवती ने बताया कि बादल नाम का युवक घुमाने के बहाने उसे कानपुर लाया और दीपक को सौंपकर चला गया।
ग्वालियर की युवती का कहना है कि उसने अभिषेक नाम के युवक से प्रेम विवाह किया। अब अभिषेक ने उसे जिस्म फरोशी के धंधे में उतार दिया। अभिषेक ही उसे यहां छोड़कर गया था।
एक आंकड़े के मुताबिक 1000 में से सात लड़कियां परिजनों के द्वारा इस धंघे में ढकेली जाती है। 19 लड़कियों को आस-पास के लोग बरगलाकर इस धंधे में डाल देते हें। 18 लड़कियों को उनके रिश्तेदार इस जिस्मफरोसी के धंध में ढकेल देते हैं।
चर्चा तो यह भी है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने डेढ़ लाख रुपये में मामला सुलटाने की कोशिश की लेकिन सेक्स वर्करों के हंगामे की वजह से बात नहीं बनी। थाने के कुछ सिपाहियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि थाने के कुछ बड़े अफसरों ने जिस जगह पर जिस्म फरोशी का कारोबार होता था वहां और सीटीएस बस्ती में जाने पर रोक लगाई थी।