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आशियाना बचाने के लिए आत्मदाह को मजबूर हुई 'बेटी'!
लखनऊ/अतुल भारद्वाज
Updated Sat, 27 Jul 2013 01:06 PM IST
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खुद का आशियाना टूटने के डर ने युवती को मौत को गले लगाने को ही मजबूर कर दिया। 18 साल से जिस मकान में रह रहे थे, उसके टूटने के लिए राज्य संपत्ति विभाग की टीम पहुंची।
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कार्रवाई होते देख घर तोड़ने केखिलाफ युवती आकर खड़ी हो गई। आशियाना टूटते देखा तो आत्महत्या करने के लिए खुद के शरीर पर मिट्टी का तेल उड़ेल लिया।
मामला गर्म होते देख अब अधिकारियों ने सात दिन का अतिरिक्त समय परिवार को दिया है।
शुक्रवार को डालीबाग कालोनी स्थित दीवान सिंह केघर को तोड़ने के लिए राज्य संपत्ति विभाग की टीम प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस के साथ पहुंची।
इस कार्रवाई के खिलाफ परिजन विरोध में खड़े हो गए। परिवार ने अपना सामान हटाने के लिए समय मांगा तो टीम ने मना कर दिया।
परिवार को सड़क पर आने के डर से खफा दीवान सिंह की बड़ी बेटी मुक्ता सिंह घर के अंदर से मिट्टी केतेल की कट्टी उठा लाई। देखते ही देखते युवती ने पूरा तेल अपने ऊपर उड़ेल लिया।
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आत्महत्या का प्रयास देखकर मौके पर मौजूद अधिकारियों में खलबली मच गई। किसी तरह युवती को महिला पुलिस की मदद से कब्जे में लिया गया। इस हरकत से अधिकारी भी परेशानी में दिखाई दिए।
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इससे एक बार को पूरी कार्रवाई रूक गई। युवती का कहना था कि वे लोग करीब 18 साल से वहां रह रहे हैं। चंद लोगों की शिकायत पर उन्हें हटाया जा रहा है। बिजली का बिल तक वह देते हैं।
अब बिना नोटिस दिए ही उनके मकान को तोड़ने की कार्रवाई होने लगी। ऐसे में न्यूरो सर्जरी के बाद अर्धबेहोशी में बिस्तर पर पड़े अपने पिता दीवान सिंह, बूढ़ी मां, अपाहिज भाई और दो छोटी बहनों को लेकर वह कहां जाए?
घर में मौजूद सामान को अचानक से कहां रखे। उसे एक बार भी नोटिस देना तक अधिकारियों ने जरूरी नहीं समझा। यह तब है जब मेरे पिता खुद पीडब्ल्यूडी में कर्मचारी हैं।
वहीं राज्य संपत्ति विभाग के अधिकारी राजीव सिंह का कहना था कि यह कोई आवास नहीं है जिस खाली कराने के लिए नोटिस दिया जाए। यह सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है।
इसे हटाने के लिए पहले भी कई बार परिवार को मौखिक चेतावनी दी गई थी। इसके बाद भी परिवार ने अपना अवैध कब्जा नहीं हटाया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स भी पहुंच गया था।