राजनीतिक दल बनाकर नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी, दो गिरफ्तार
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लखनऊ के गोमतीनगर में राजनीतिक दल बनाकर बेरोजगारों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में दो शातिरों को गिरफ्तार कर लिया है। सरगना फरार है।
इन जालसाजों ने इंडियन युवा क्रांति दल बनाकर अलग-अलग जिलों में दफ्तर खोलकर युवाओं को स्वास्थ्य विभाग, जल निगम, एफसीआई, इफको, सीआरपीएफ और दिल्ली सचिवालय में नौकरी का झांसा देकर 5 से 15 लाख रुपये तक वसूले। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। गिरोह के सरगना सम्पूर्णानंद पांडेय व अन्य शातिरों की तलाश में तीन टीमें बनाई गई हैं।
सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि पकड़ा गया ठग कृष्णानंद गिरोह के सरगना सम्पूर्णानंद का छोटा भाई। दोनों दो साल से ठगी कर रहे थे। सम्पूर्णानंद ने इंडियन युवा क्रांति दल के नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई। हर जिले में पदाधिकारी व सदस्य बनाए। इन्हें अफसरों से व्यक्ति संबंध, सरकार में ऊंची पहुंच और रसूख का झांसा देकर रिश्तेदारों को सरकारी नौकरी दिलाने की बात कही। इन सदस्यों ने परिचितों को नौकरी के लिए ठगों के पास भेजा।
जालसाजों ने रुपये लेकर इन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र तक थमा दिया। जब ये नौकरी जॉइन करने पहुंचे तो पूरा मामला सामने आ गया। सीओ ने बताया कि गोरखपुर, जौनपुर समेत पूर्वांचल के लोगों ने पुलिस से संपर्क किया है। अन्य जिलों से भी लोग फोन कर ठगी की शिकायत कर रहे हैं।
सम्मेलन में डीएम-एसएसपी को बुलाकर लेते थे झांसे में
सीओ ने बताया कि सम्पूर्णानंद और कृष्णानंद जिलों में सम्मेलन आयोजित करके डीएम और एसएसपी समेत पुलिस-प्रशासन के अफसरों को बुलाते थे। अफसरों और ठगों को हंसते-बोलते देखकर पार्टी के सदस्य प्रभावित हो जाते और अपने रिश्तेदारों-परिचितों को नौकरी के लिए भेज देते थे।
5 से 15 लाख रुपये तक ऐंठते थे बेरोजगारों से
ठग बेरोजगारों को स्वास्थ्य विभाग, जल निगम समेत कई विभागों में नौकरी का लालच देकर ठगी करते थे।
ठगों को छुड़वाने के लिए घनघनाते रहे रसूखदारों के फोन
गोमतीनगर में इंडियन युवा क्रांति दल बनाकर प्रदेश के बेरोजगारों को सरकारी नौकरी का झांसा देेकर करोड़ों रुपये ऐंठने वाले जालसाजों को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया तो गोमतीनगर थाने में कई नेताओं और अफसरों के फोन घनघनाने लगे। सूत्रों के मुताबिक अफसरों ने गिरफ्तार कृष्णानंद पांडेय और प्रदीप कुमार गौतम को छुड़वाने का दबाव बनाया। हालांकि दोनों के खिलाफ पक्के सुबूत होने की बात कहकर पुलिसवालों ने हाथ खड़े कर दिए। ठगों की पैरवी के लिए देर रात तक रसूखदारों का थाना आना-जाना लगा रहा।
सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि सरगना सम्पूर्णानंद पांडेय और छोटे भाई कृष्णानंद ने गोरखपुर, जौनपुर समेत कई जिलों में युवकों को शिकार बनाया। उन्होंने कहा कि अगर दूसरे पीड़ित भी प्रार्थनापत्र देते हैं तो उसे एफआईआर में शामिल कर लिया जाएगा। एसएसपी दीपक कुमार ने गिरोह का खुलासा करने वाले दरोगा राय बहादुर सिंह, कृष्णबली सिंह, आरक्षी देवदत्त यादव और रामनिवास की सराहना की है।
ठगी के शिकार इन युवकों ने की थी शिकायत
- अरविंद यादव, बसारतपुर, जौनपुर से स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के नाम पर 10 लाख रुपये लिए।
- दिनेश कुमार उर्फ गुड्डू यादव, बेगमगंज, जौनपुर से स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के लिए 10 लाख ऐंठे।
- सीमा शर्मा, मियापुर, जौनपुर से जल निगम में नौकरी के बहाने सात लाख रुपये लिए।
- रवि कुमार यादव, सरवा, जौनपुर को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के लिए 10 लाख रुपये का चूना लगाया।
- विनय सिंह, रोहित अग्रहरि, विकास गुप्ता से इफको में नौकरी के लिए 15 लाख रुपये ठग लिए।
- चंदन तिवारी, नेवढ़िया, जौनपुर से दिल्ली में सचिवालय में नौकरी के नाम पर 12 लाख रुपये ऐंठे।
- अनिल जायसवाल, नेवढ़िया, जौनपुर से एफसीआई में नौकरी के बहाने 11 लाख रुपये लिए।
- अर्चना भारती, नेवढ़िया, जौनपुर से एफसीआई में नौकरी के बहाने छह लाख रुपये लिए।
- ओमप्रकाश यादव, केराकर, जौनपुर से एफसीआई में नौकरी के लिए छह लाख रुपये ऐंठे।
- जयप्रकाश, नेवढ़िया, जौनपुर से सीआरपीएफ में नौकरी के बहाने तीन लाख रुपये लिए।
- अश्वनी सरोज, बेलाव, जौनपुर से एफसीआई में नौकरी के नाम पर आठ लाख रुपये ऐंठे।
- कोमल, केराव, नहौरा से सीआरपीएफ में नौकरी के लिए तीन लाख रुपये लिए।
- निशांत दुबे, केराव, नहौरा से वार्ड बॉय की नौकरी के बहाने चार लाख रुपये हड़पे।
- विद्या भास्कर, केराव, नहौरा से सीआरपीएफ में नौकरी के लिए चार लाख रुपये लिए।
- गोविंद जायसवाल, परसनी आईटीआई, जौनपुर से एफसीआई में नौकरी के लिए 12 लाख लिए।
- अमर गुप्ता, मड़ियाहू, जौनपुर से सीआरपीएफ में नौकरी के लिए 40 हजार रुपये ऐंठ लिए।
सदस्यों को देते थे 5000 से 15000 रुपये तक सैलरी
इंडियन युवा क्रांति दल के सभी सदस्यों को हर महीने वेतन दिया जाता था। कृष्णानंद ने बताया कि सदस्यों की श्रेणी के मुताबिक 5000 से 15000 रुपये तक वेतन तय होता था। सैलरी के लालच में कई लोग सदस्य बन जाते थे। बाद में इन्हीं सदस्यों के रिश्तेदारों-करीबियों से नौकरी के नाम पर रुपये वसूले जाते थे।
दैनिक समाचारपत्र और मासिक पत्रिका भी चलाते थे
ठगों ने राजनीतिक दल के साथ खुद को पत्रकारिता से भी जोड़ रखा था। सीओ ने बताया कि ठग क्राइम कर्स के नाम से दैनिक समाचारपत्र और इसी नाम से मासिक पत्रिका चलाते थे। राजधानी में शासन-प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के सामने जरूरत पड़ने पर वे नेता अथवा पत्रकार बन जाते थे।
कानपुर में दिलाया तीन से नौ महीने का प्रशिक्षण
सीओ ने बताया कि एफसीआई में नौकरी के अभ्यर्थियों को कानपुर में तीन से नौ महीने का प्रशिक्षण दिलाया था। ट्रेनिंग एफसीआई के डिपो में ही कराने की बात सामने आई है। एफसीआई में प्रशिक्षण कैसे दिलाया गया? इस बारे में पुलिस पड़ताल कर रही है। सीओ का कहना है कि हो सकता है कि ठगों के गिरोह में एफसीआई के लोग भी हों?
नौकरी न मिलने पर युवक ने खा लिया था जहर
सीओ ने बताया कि सरकारी नौकरी के चक्कर में युवकों ने खेती-बाड़ी और मां के गहने बेचकर रुपयों का इंतजाम किया था। उनके परिवारीजनों ने जीवनभर की जमा पूंजी ठगों को सौंप दी। नौकरी नहीं मिली तो पीड़ित और उनके परिवारीजन अवसादग्रस्त हो गए। गोरखपुर में एक युवक ने जहरीला पदार्थ खाकर जान देने की कोशिश की। कई अन्य पीड़ित मजदूरी करने को मजबूर हैं, क्योंकि उनके पास खेती की जमीन है न ही कारोबार करने के लिए रकम।