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डेढ़ दशक में अरबों की ठगी कर गईं कंपनियां
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 27 Apr 2014 03:45 AM IST
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राजधानी में चिटफंड,फाइनेंस और प्लांटेशन के नाम पर कंपनियां खोलकर ठगी का गोरखधंधा पिछले डेढ़ दशक से चल रहा है।
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कंपनियां चलाने वालों में कोई सरकार का करीबी है तो कोई स्थानीय पुलिस से सेटिंग करके जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा डकार रहा है।
डेढ़ दशक में फर्जी कंपनियों के सैकड़ों ऑफिस विभिन्न इलाकों में खुले। कोई चंद महीने चला तो कोई चंद साल।
जनता का पैसा बटोरकर इन कंपनियों के संचालक ऑफिस में ताला लगाकर फुर्र हो गए। यह सिलसिला अब भी जारी है। कार्रवाई के नाम पर पुलिस कुछ ही लोगों को गिरफ्तार कर पाई है।
जनता का पैसा लेकर कंपनियों के भागने की शुरुआत वर्ष 2000 से हुई थी।
इस दौरान चर्चित जेवीजी फाइनेंस कंपनी, कुबेर फाइनेंस, जागृति फाइनेंस, केडीटी फाइनेंस, लॉयन फाइनेंस और ग्रीन प्लांटेशन इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियां जनता के करोड़ों रुपये लेकर भाग गई थीं।
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कंपनियों को भारतीय रिजर्व बैंक से मान्यता है या नहीं?उनका रजिस्ट्रेशन वैध है या नहीं? प्लाटिंग का लुभावने सपने दिखाने वाली कंपनियों के पास जमीनें हैं या नहीं?
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पुलिस ने कभी इसकी पड़ताल करने की जरूरत नहीं समझी। डेढ़ दशक में फर्जी कंपनियों के खिलाफ तीन हजार से अधिक रिपोर्ट दर्ज हो चुकी हैं।
हजरतगंज में सबसे ज्यादा एफआईआर
फर्जी कंपनियों के मामले में सबसे ज्यादा एफआईआर हजरतगंज कोतवाली में दर्ज हैं। यह एफआईआर अलग-अलग कंपनियों के खिलाफ हैं।
मैग्नम ग्रुप और टिस्का से पीड़ित लोगों ने गुडंबा और विभूति खंड थानों में कई एफआईआर लिखाई हैं।
इसके अलावा कृष्णानगर, चिनहट, आलमबाग, कैसरबाग, अलीगंज और महानगर में भी कई कंपनियों के भागने के मामले हैं।