एसटीएफ ने दबोचे गिरोह के पांच बदमाश
- कुश बैंक से चेक डिटेल हासिल करने के बाद गूगल से हासिल करता था जानकारी।
- मास्टरमाइंड कुश के पिता है सरकारी मुलाजिम
- कुश सिर्फ कारपोरेट अकाउंट्स को ही बनाता था निशाना ।
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चेक की क्लोनिंग कर बैंकों से रुपये उड़ाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए एसटीएफ ने सोमवार शाम चिनहट तिराहा से पांच बदमाशों को दबोच लिया। गिरोह ने बीते दो साल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, आईसीआईसीआई सहित कई बैंक के चेक क्लोन करके 50 लाख से अधिक रुपयों की हेराफेरी की।
एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि गिरोह का सरगना फैजाबाद के रामसनेही घाट स्थित असेना गांव का कुश द्विवेदी है। उसके साथी रौनाही के दुर्गा मिश्र का पुरवा कलाफरपुर निवासी वीरेंद्र यादव उर्फ गुड्डू, पटरंगा के कोटवा का रामजस रावत, खंडासा के गोहनिया का जितेंद्र प्रताप और रुदौली के जलालपुर निवासी संजय गुप्ता फर्जी अकाउंट खुलवाने और क्लोन चेक को कैश कराने का काम करते थे।
गिरोह ने लखनऊ के अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर, प्रदेश, पूना की विभिन्न बैंक के चेक की क्लोनिंग कर धोखाधड़ी की। गिरोह के पास से एक लैपटॉप, एक मुहर, विभिन्न बैंक के पांच एटीएम कार्ड, 14 बैंकों की क्लोन चेक और 40 बैंक की चेक की फोटोकॉपी तथा दो मोबाइल फोन मिले हैं।
एएसपी ने बताया कि चिनहट में बीते महीने नरेश कुमार अग्रवाल ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शाखा में अपने अकाउंट की चेक क्लोनिंग की एफआईआर दर्ज कराई थी जिसकी छानबीन में यह गिरोह सामने आया। एएसपी ने बताया कि मास्टरमाइंड कुश के पिता सरकारी मुलाजिम हैं।
चेक पर करता था फर्जी हस्ताक्षर
कुश सेंट्रल स्कूल झांसी से पढ़ा है। हाईस्कूल में फेल होने के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और खुराफात में जुट गया। वह सेकेंडों में चेक का क्लोन तैयार कर लेता था। उसने अपने लैपटॉप में कोरल ड्राफ्ट सॉफ्टवेयर इंस्टाल किया है। इसी सॉफ्टवेयर के जरिए वह चेक की क्लोनिंग करता था। चेक पर फर्जी हस्ताक्षर भी वही करता था।
कुश सिर्फ कारपोरेट अकाउंट्स को ही निशाना बनाता था। इसमें कंपनी, फर्म और सोसाइटी के अकाउंट शामिल हैं। वह खुद बैंक जाकर ऐसे अकाउंट के बारे में जानकारी हासिल करता था। अमूमन चेक कैश कराने आए कंपनियों के कर्मचारियों के आसपास खड़े होकर वह किसी तरह अपने मोबाइल फोन के कैमरे से चेक की फोटो खींच लेता।
इसके बाद जिस बैंक का चेक होता था, वहीं फर्जी नाम से अकाउंट खुलवाता। अकाउंट खोलने पर उसे वेलकम किट मिलती जिसमें चेकबुक, पासबुक व एटीएम कार्ड सहित अन्य जानकारियों से संबंधित कागजात होते थे। एक केमिकल के जरिए चेक से नाम और अकाउंट नंबर मिटाकर कुश उस पर कंपनी का नाम व अकाउंट नंबर डालता। इसके बाद चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर कैश करा लेता।
गुरू की हादसे में मौत के बाद खुद बना मास्टर माइंड एसटीएफ के इंस्पेक्टर अभिनव सिंह पुंडीर ने बताया कि कुश पहले फैजाबाद के अभय सूरजवंशी के साथ चेक की क्लोनिंग करता था। दो साल पहले बाराबंकी में एक सड़क हादसे में अभय की मौत हो गई।
पांच लाख रुपये के कई क्लोन चेक कराए कैश
इसके बाद से कुश ने फर्जीवाड़े के इस धंधे को आगे बढ़ाया। उसने फैजाबाद के पटरंगा थाना से हत्या के मामले में जेल में बंद रामजस को अपने साथ लिया। रामजस छह महीने पहले ही जेल से छूटा था। गिरोह ने वीरेंद्र के नाम पर एक्सिस बैंक में अकाउंट खोलकर पांच लाख रुपये के कई क्लोन चेक कैश कराए। इसके बदले वीरेंद्र को 40 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था।
एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि कुश बैंक से चेक का डिटेल हासिल करने के बाद गूगल से संबंधित कंपनी के बारे में जानकारी लेता था। इसके बाद वह अकाउंट में मौजूद रकम का पता लगाने के लिए बैंक के कॉल सेंटर फोन करता था। चूंकि, यह जानकारियां गोपनीय होती हैं इसलिए कॉल सेंटर वाले कंपनी के बारे का नाम, ऑफिस का पता, अकाउंट नंबर पूछते हैं।
इसके बाद अकाउंट से किए गए आखिरी दो ट्रांजेक्शन पूछे जाते हैं। बैंक में जिस चेक की कुश ने मोबाइल फोन से फोटो खींची होती है, वही एक ट्रांजेक्शन बता देता है। दूसरे ट्रांजेक्शन के बारे में पूछने पर वह बहाने बनाकर कॉल सेंटर के कर्मचारियों को बरगला देता।
ज्यादातर जानकारियां सही होने पर कॉल सेंटर के कर्मचारी अकाउंट में मौजूद रकम और चेक की सिरीज का नंबर बता देते थे। कुश इस सिरीज के आगे के नंबर की क्लोन चेक तैयार करता और वही रकम भरता जितनी अकाउंट में होती थी।