रिश्वतखोरी की ऐसी सजा, कभी नहीं सुनी होगी...
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विवेचना के दौरान 15 हजार रुपये रिश्वत लेने वाले सिटी स्टेशन के आरपीएफ चौकी के तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह ने पांच वर्ष के कठोर कारावास एवं 90 हजार के जुर्माने से दंडित किया है।
कोर्ट ने कहा, सिंह ने अपने काम में बेइमानी की है। आरपीएफ का इंस्पेक्टर होने के बावजूद पकड़े गए आरोपी को मदद पहुंचाने के लिए रिश्वत की मांग की तथा रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
लिहाजा, मनोज को सहानुभूति देकर कम सजा देने से न्यायिक व्यवस्था को हानि पहुंचेगी तथा आम जनता का विधि व्यवस्था से विश्वास कम होगा।
जानें, पूरी कहानी
गौरतलब है, वादी संतोष सिंह ने 1 सितंबर 2011 को सीबीआई को शिकायत करके बताया था कि वह रेलवे के जनरल टिकट बेचने के अधिकृत हैं तथा वादी के भाई मनीष सिंह ई-टिकट जारी करने के लाइसेंसधारक है।
बताया गया कि 24 मई 2011 को मनोज कुमार सिंह उसकी दुकान पर अपने दल के साथ आए तथा छापा मारकर कुछ टिकट अपने कब्जे में ले लिए तथा वादी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। वह दुकान में रखे 74 हजार रुपये भी उठा ले गए।
70 हजार रुपये की रिश्वत मांगी
मनोज ने उसी दिन वादी के बड़े भाई को फोन करके मनीष का नाम रिपोर्ट में न डालने के लिए 70 हजार की रिश्वत मांगी तथा न देने पर मनीष को भी आरोपी बना दिया।
29 अगस्त 2011 को मनोज दुकान पर आए तथा मामले में घर के अन्य सदस्यों को फंसाने की धमकी देकर 15 हजार की रिश्वत मांगी।
उन्होंने रिश्वत मिलने पर विवेचना में मदद करने का आश्वासन दिया। वादी की शिकायत पर सीबीआई ने 1 सितंबर 2011 को आरोपी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था।