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पासपोर्ट है न वीजा, फिर भी रखते हैं रियाल और डॉलर
विवेक त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Sun, 27 Oct 2013 11:32 AM IST
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डॉलर का झांसा देकर लोगों को चूना लगाने वाले बांग्लादेशी टप्पेबाजों के गैंग का खुलासा करते हुए महानगर पुलिस ने शुक्रवार रात दो सदस्यों को दबोच लिया।
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गिरोह के चार और सदस्य हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
पकड़े गए बांग्लादेशियों के पासपोर्ट है न वीजा। इनके पास से कई डॉलर और रियाल बरामद हुए हैं।
बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी की सूचना पाकर नेशनल इनवेस्टिगेटिंग एजेंसी और इंटेलीजेंस ब्यूरो सहित लोकल इंटेलीजेंस यूनिट की टीम ने घंटों पूछताछ की।
आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं के अलावा विदेशी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।
आलमबाग निवासी विनय को डॉलर की जगह रिन साबुन की बट्टी थमाकर तीन लाख रुपये उड़ाने वाले शातिरों का अगला टारगेट निशातगंज का एक कारोबारी था।
हालांकि विनय के साथ टप्पेबाजी का पता चलते ही कारोबारी सतर्क हो गया और पुलिस को सूचना दे दी।
शुक्रवार रात कारोबारी ने टप्पेबाजों को निशातगंज के भीखमपुर बंधे के पास बुलाया। रात करीब पौने दस बजे दो टप्पेबाज बताई गई जगह पहुंचे। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें दबोच लिया।
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सीओ महानगर राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि पकड़े गए बदमाश बांग्लादेश के मकसितपुर गोपालगंज निवासी मो. जिन्नात फकीर और मो. सद्दाम हुसैन हैं।
इनके पास से 12 अमेरिकी डॉलर, तीन रियाल और कुछ बांग्लादेशी मुद्रा के अलावा एक बाइक मिली है। सीओ ने बताया कि टप्पेबाजों ने बाइक चौक से चोरी की थी।
उधर, शनिवार सुबह एनआईए, आईबी और एलआईयू की टीमों ने महानगर थाने पहुंचकर पकड़े गए टप्पेबाजों से पूछताछ की।
गैंग में छह सदस्य
इंस्पेक्टर महानगर सतीश कुमार गौतम ने बताया कि बांग्लादेशियों के गैंग में छह लोग हैं। गैंग का सरगना शमशुल हक है। सागर, बिंदू व रमेश इस गैंग के सदस्य हैं।
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सभी चारबाग में एक महिला के मकान में किराये पर रहते थे। यहां कमरा लेने से पहले टप्पेबाजों ने फर्जी आईडी लगाई थी।
पुलिस टीम ने दबिश दी, लेकिन बाकी सदस्य नहीं मिले। इंस्पेक्टर ने बताया कि टप्पेबाजों के मोबाइल फोन स्विचऑफ हैं। दबिश दी जा रही है। जल्द बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सौ से ज्यादा बांग्लादेशी
राजधानी में इस वक्त सौ से ज्यादा बांग्लादेशी हैं, जो छह से आठ लोगों की टोलियां बनाकर ठगी कर रहे हैं। आईबी की पूछताछ में जिन्नात ने पहले बताया कि वह डेढ़ महीने से राजधानी में था।
हालांकि, जब सख्ती से पूछताछ की गई तो खुलासा किया कि बांग्लादेशी गैंग यहां छह माह से सक्रिय है। उसने बताया कि वह बांग्लादेश से छह महीने के वीजा पर बस से पश्चिम बंगाल आया था।
उसके पास से 26 जून 2013 का बस का टिकट भी मिला है। यहां चौबीस परगना में अपनी मौसी सोबित बेगम के घर पर रुका। वहीं, उसे शमशुल हक मिला। उसने ही ठगी के धंधे के टिप्स दिए और सागर, बिंदु व रमेश के साथ लखनऊ भेजा।
कमाई पर देना पड़ता है कमीशन
जिन्नात के मुताबिक एक लाख रुपये की कमाई पर शमशुल को 1100 रुपये बतौर कमीशन देने पड़ते हैं। उसने बताया कि पासपोर्ट और वीजा मौसी के घर पर ही रखा है।
आशंका है कि बांग्लादेशी गैंग, जो डॉलर और रियाल देकर लोगों को ठग रहे हैं, वह भी नकली हो। आईबी के अफसरों ने दिल्ली स्थित बांग्लादेशी दूतावास से टप्पेबाजों के बारे में जानकारी लेने की बात कही है।
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