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रिश्वत लेते रंगेहाथ धरा गया वन विभाग का अफसर

Wed, 16 Sep 2015 10:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 16 Sep 2015 10:18 PM IST
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An officer caught red handed during taking the bribe.

भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने बुधवार दोपहर इंदिरानगर स्थित वन निगम कार्यालय के सहायक लेखाधिकारी मुकेश निगम को 10,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। मुकेश अपने ही विभाग के विक्रय प्रभाग में कार्यरत लॉगिंग सहायक जय सिंह से बिल पास कराने के नाम पर रिश्वत मांग रहा था।

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जय सिंह ने मुकेश को फोन कर रिंग रोड स्थित शेरवुड स्कूल के पास मिलने के बहाने बुलाया। यहां भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम पहले से आसपास मौजूद थी। मुकेश दोपहर करीब 12 बजे अपनी बाइक से आया। कुछ देर बातचीत के बाद जय सिंह ने उसे 10,000 रुपये दिए।
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मुकेश ने जैसे ही रुपये अपनी पैंट की जेब में रखे भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने उसे दबोच लिया। उसे गाजीपुर थाना ले जाया गया जहां संगठन के इंस्पेक्टर की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई। बृहस्पतिवार सुबह मुकेश निगम को भ्रष्टाचार की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
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एक साल से काट रहे थे बाबू के चक्कर
जय सिंह ने बताया कि लॉगिंग व झंडी का 2,61,105 रुपये का बिल पास कराने के लिए वह एक साल से सहायक लेखाधिकारी मुकेश निगम के चक्कर काट रहे थे। यह बिल उस वक्त का है जब जय सिंह बाराबंकी में तैनात हुआ करते थे। तब भी वह बिल पास कराने के लिए लखनऊ आया करते थे। करीब पांच महीने पहले उनका तबादला लखनऊ कर दिया गया। यहां भी वह दफ्तर आते-जाते रहे लेकिन काम नहीं हुआ।

अफसर के नाम पर मांगे 60,000 रुपये

An officer caught red handed during taking the bribe.

जय सिंह का कहना है कि मुकेश ने पिछले महीने उससे 60,000 रुपयों की मांग की। इतनी रकम मांगने पर जय सिंह ने पूछताछ की तो मुकेश ने डिवीजनल लॉगिंग मैनेजर (डीएनएम) मार्केटिंग का नाम लेते हुए कहा कि रुपये उन्हें ही जाना है। बुधवार दोपहर जय सिंह ने मुकेश को 10,000 रुपये दिए। बाकी के 50,000 रुपये उसने बाद में देने को कहा था।

अवैध कटान में बाराबंकी से निलंबित हुए थे जय सिंह

जय सिंह को अवैध कटान के आरोप में गत वर्ष 30 सितंबर को बाराबंकी से निलंबित किया गया था। हालांकि, उनके बेटे दुर्गेश कुमार का कहना है कि निलंबन की वजह कुछ और थी। दुर्गेश ने बताया कि निलंबन से पहले ही पिता का तबादला राजधानी कर दिया गया था। इस बीच जांच में जय सिंह को निर्दोष पाए जाने के बाद गत 15 अप्रैल को उन्हें बहाल कर दिया गया।

परेशान होकर की थी शिकायत
जय सिंह ने बताया कि वह परिवार सहित गुडंबा में रहते हैं। मुकेश निगम मूल रूप से सीतापुर के तंबौर का है और यहां जानकीपुरम में रह रहा है। करीब एक साल तक वह बिल पास कराने के लिए मुकेश के चक्कर काटता रहा। जब मुकेश ने रिश्वत मांगी तो परेशान होकर उसने भ्रष्टाचार निवारण संगठन में शिकायत की।

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