तेज रफ्तार कार फुटपाथ पर चढ़ी, मां-बेटै को रौंदा
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राजधानी लखनऊ के बादशाहनगर सचिवालय कॉलोनी के सामने शुक्रवार तड़के बेकाबू कार ने फुटपाथ पर सो रहे मां-बेटे को रौंद दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृत महिला का दूसरा बेटा व एक अन्य महिला घायल हैं। कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह करीब सौ मीटर तक झोपड़ियों में घुस गई।
हादसे के बाद जमा लोगों ने कार सवार दो लोगों और ड्राइवर को पकड़ लिया और जमकर धुनाई की। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर गैर इरादतन हत्या का केस किया है।
सीओ महानगर राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुल्फी विक्रेता केशवराज की पत्नी माया (65) और उनके दो बेटे रवि (24) व विकास फुटपाथ पर सो रहे थे। तड़के तेज रफ्तार इंडिगो कार ने बेकाबू हो कर झोपड़ियों में घुस गई।
हादसे में माया व रवि की मौत हो गई जबकि विकास (12) व एक अन्य घायल महिला गायत्री को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद झोपड़पट्टी के लोग एकत्र हो गए। भीड़ ने कार सवार तीन लोगों को दबोच लिया और जमकर मारापीटा। गुस्साई भीड़ ने सड़क के दोनों तरफ जाम लगा दिया।
हंगामा व प्रदर्शन करते हुए परिवारीजनों ने मुआवजे और कार्रवाई की मांग की। मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने गुस्साए लोगों को समझाकर शांत कराया।
सौ मीटर तक मचाई तबाही
सीओ महानगर ने बताया कि माया के पति केशवराज की तरफ से महानगर कोतवाली में गैर इरादतन हत्या की एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने कार चला रहे गुडंबा कल्यानपुर निवासी कृष्ण कुमार शर्मा, अविनाश और फैजाबाद के वीरेंद्र को हिरासत में ले लिया है। विकास को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
बेकाबू कार ने फुटपाथ के सौ मीटर हिस्से में तबाही मचा दी। पॉलीटेक्निक चौराहा की तरफ से आ रही कार नाला पार करके बादशाहनगर चौराहा की तरफ बढ़ रही थी कि पेट्रोल पंप से सौ मीटर पहले अचानक चालक ने कार पर नियंत्रण खो दिया। कार सड़क के बांयी तरफ फुटपाथ पर चढ़ गई।
फुटपाथ पर सो रहे लोगों को रौंदने के बाद कार आगे बनी झोपड़ियों में घुसकर रुक गई। हादसे में पांच झोपड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
खून से लाल हो गया फुटपाथ
फुटपाथ का बीस मीटर हिस्सा खून से लाल हो गया। माया और उसके बेटे रवि के शरीर क्षत-विक्षत हो गए। उनके शरीर के लोथड़े चारों तरफ फैल गए जिससे नजारा और वीभत्स हो गया। खून और मांस देखकर कई लोगों को चक्कर आ गया। महिलाएं रोने लगीं तो बच्चे दहशत से सहम गए।
डोर लॉक फंसने से भाग नहीं पाए कार सवार
कार चालक और उसके साथी ने भागने की कोशिश की लेकिन डोर के लॉक फंस गए। तीनों ने खिड़की खोलकर कूदने की कोशिश की लेकिन तब तक भीड़ ने उन्हें घेर लिया था। पुलिस ने बताया कि कार कृष्ण कुमार शर्मा चला रहा था जबकि अविनाश और वीरेंद्र पीछे बैठे थे। पीछे बैठे दोनों युवक अर्द्धनग्न अवस्था में थे। तीनों के शराब पीने की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि गर्मी के चलते पीछे बैठे युवकों ने शर्ट उतार दी थी।
पूछताछ में कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि वह एक मासिक पत्रिका का संपादक है। अविनाश उसका फोटोग्राफर है जबकि फैजाबाद निवासी वीरेंद्र परिचित है। तीनों बलिया से लौट रहे थे। कार कृष्ण कुमार शर्मा की बताई जा रही है।
पांच घंटे तक जाम रही सड़क, हुआ प्रदर्शन हंगामा
हादसे से आक्रोशित भीड़ ने फैजाबाद रोड पर दोनों तरफ जाम लगा दिया। भीड़ कार में बैठे तीनों व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही थी जबकि पुलिस का कहना था कि गलती सिर्फ कार चालक की है इसलिए उसे ही गिरफ्तार किया जाएगा।
हालांकि, भीड़ के गुस्से को देखते हुए पुलिस ने चालक कृष्ण कुमार शर्मा के साथ ही साथ मौजूद दोनों व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया। परिवारीजनों ने मुआवजे की मांग की। महानगर सीओ ने मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया लेकिन लोग नहीं माने। इसके बाद लेखपाल को मौके पर बुलवाकर मृत माया के पति केशवराज से राष्ट्रीय पारिवारिक सहायता निधि का फार्म भराया गया।
शरीर के टुकड़े नाले में फेंकें, धुलवाया फुटपाथ
पड़ोस में रहने वाली अंजू ने बताया पुलिस ने मौके पर पहुंचते ही फुटपाथ पर बिखरे मृतकों के शरीर के टुकड़े नाले में फेंकवा दिए। इसके बाद पानी से पूरा फुटपाथ साफ करवाया। पुलिस ने घायल विकास और गायत्री को अस्पताल भेजने में भी रुचि नहीं ली।
दोनों काफी देर तक सड़क पर पड़े तड़पने रहे। स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए दोनों को अस्पताल भेजने की बात कही तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें फटकार दिया। इससे आक्रोश भड़क उठा। लोगों का कहना था कि मृतकों के शरीर के टुकड़ों को पोस्टमार्टम हाउस भेजना चाहिए था। लोगों का विरोध बढ़ता देख पुलिस ने घायलों को अस्पताल भिजवाया।
बाल-बाल बच गए रज्जू और केशव
माया के पड़ोस में ही पति केशवराज और दूसरा बेटा रज्जू भी सो रहे थे। रात करीब एक बजे पति केशव झोपड़ी में सोने चला गया। हादसे से पांच मिनट पहले ही रज्जू उठकर पानी पीने के लिए झोपड़ी में गया था। उसके जाने के बाद हादसा हो गया। चीख पुकार सुनकर वह झोपड़ी से निकला तो भाई रवि व मां को खून से लथपथ देख होश उड़ गए।