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विधान परिषद सभापत के बेटे की हत्या में नौकर भी शामिल था, गिरफ्तार
Updated Mon, 12 Nov 2018 11:18 PM IST
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अभिजीत उर्फ विवेक
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विधान परिषद के सभापति रमेश यादव के बेटे अभिजीत उर्फ विवेक यादव (23) की हत्या में मां मीरा यादव के साथ नौकर सर्वेश विश्वकर्मा भी शामिल था। पुलिस का दावा है कि दोनों ने पहले विवेक को पीटा और फिर गमछे से गला घोंटकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद वारदात छिपाने की कोशिश की। 20 अक्तूबर को हुई घटना के दूसरे दिन पुलिस ने मीरा को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा किया था। विवेचना कर रहे इंस्पेक्टर हजरतगंज ने सोमवार को हत्यारोपी नौकर को गिरफ्तार कर जेल भेजा। उसने सभापति की पत्नी के साथ मिलकर हत्या करने की बात कुबूली है।
मूलरूप से एटा निवासी रमेश यादव की दो पत्नियां हैं। पहली पत्नी से बेटा आशीष यादव है, जो एटा से विधायक रह चुका है। दूसरी पत्नी मीरा के दो बेटे अभिजीत और अभिषेक हैं। रमेश यादव ने मीरा व उनके बेटों के लिए दारूलशफा में बी-ब्लॉक के 137 नंबर का सरकारी आवास आवंटित कराया था।
नशे में घर पहुंचकर किया था हंगामा
क्षेत्राधिकारी हजरतगंज अभय कुमार मिश्र के मुताबिक वारदात की रात करीब 11.30 बजे अभिजीत शराब के नशे में घर पहुंचा और हंगामा करने दिया। मां मीरा ने विरोध किया तो वह हमलावर हो गया। इस पर मीरा ने उसे धकेल दिया, जिससे वह दीवार से टकरा गया। इसके बाद मीरा ने उस पर हमला बोल दिया। उसने अभिजीत को पीटने के लिए नौकर सर्वेश को भी बुला लिया। दोनों ने पीटने के बाद गमछे से गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद अभिजीत का शव बिस्तर पर डाल दिया।
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सीने में दर्द से बेटे की मौत की रची कहानी
छोटे बेटे अभिजीत की मौत के बाद मां मीरा और नौकर ने वारदात छिपाने के लिए कहानी तैयार की। इसकी पटकथा मीरा ने लिखी। उसने पुलिस को गुमराह करते हुए बताया कि रात में अभिजीत घर पहुंचा तो सीने और सिर में दर्द की बात कही। इसके बाद उसने बेटे के सिर और सीने पर बाम लगाया। अभिजीत ने आराम मिलने की बात कही तो वह अपने कमरे में सोने चली गई। सुबह देखा तो अभिजीत बेड पर मृत पड़ा था। उसने इसकी सूचना बड़े बेटे अभिषेक को दी। उसने सौतेले भाई व पूर्व विधायक आशीष यादव को इसकी जानकारी दी।
आनन-फानन अंतिम संस्कार कराने की थी योजना
बेटे की हत्या के बाद मीरा ने वारदात छिपाने के पूरे प्रयास किए। इसके तहत उसने आनन-फानन शव का अंतिम संस्कार कराने की योजना बनाई थी। सुबह होते ही परिवारीजनाें को सूचना दे दी। इसके बाद शव लेकर अंतिम संस्कार को निकल पड़े। इसकी जानकारी पर इंस्पेक्टर राधा रमण सिंह और चौकी प्रभारी कृष्णकांत सिंह दारूलशफा पहुंचे। शव के परीक्षण के दौरान अभिजीत के गले पर कसे का निशान मिला। परिवारीजनों ने पुलिस को अर्दब में लेकर वापस भेज दिया। इसके बाद सीओ हजरतगंज अभय मिश्रा पहुंचे, तब तक शव दूसरी मंजिल से नीचे आ चुका था। इसी बीच एसएसपी कलानिधि नैथानी भी पहुंच गए। अधिकारियों के सामने से ही परिवारिजन शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े। इस पर एसएसपी ने तत्काल शव यात्रा रुकवाकर शव पोस्टमार्टम को भेजवाया था।
बिस्तर पर मिले खून के धब्बे तो गहराया शक
वारदात की शाम 4.30 बजे दारूलशफा स्थित आवास पहुंची फोरेंसिक टीम को बिस्तर पर पांच स्थानों पर खून के धब्बे मिले। पुलिस ने जांच के लिए बिस्तर पर बिछी चादर और कमरे से कई अन्य संदिग्ध वस्तुओं को कब्जे में लिया। खून के धब्बे से हत्या की आशंका को बल मिला। एएसपी पूर्वी सर्वेश मिश्रा और एएसपी क्राइम दिनेश कुमार सिंह ने काफी देर तक मीरा यादव से पूछताछ की। इस दौरान उसने कई बार बयान बदले, जिससे पुलिस को संदेह हुआ। जितने भी साक्ष्य पुलिस टीम जुटाकर एक जगह रख रही थी, उसे बार-बार मीरा छीन ले रही थी। इस पर पुलिस ने उसे दूसरे कमरे में भेजा। बिस्तर के आसपास पान मसाले के खाली रैपर व शर्ट का बटन मिला। इस पर मीरा ने कहा कि यह बटन बड़े बेटे अभिषेक की शर्ट का है। मीरा ने पुलिस से छीनकर बटन मेज की दराज में डाल दिया। हालांकि पुलिस ने दोबारा बटन निकालकर रख लिया। सिगरेट के बट व कुछ अन्य संदिग्ध वस्तुएं भी हाथ लगीं।
हरकतों से तंग थी मां, पहले ही रच ली थी मारने की साजिश
नौकर सर्वेश विश्वकर्मा के मुताबिक अभिजीत की हरकतों से मीरा तंग थी। उसने बेटे को मारने की साजिश काफी पहले रच ली थी। उस दिन अभिजीत ने शराब के नशे में जो हरकतें कीं, उससे वह काफी नाराज थी। इसी गुस्से में मीरा ने उसे मारना शुरू कर दिया। मीरा के कहने पर वह भी वारदात में शामिल हुआ और अभिजीत की हत्या कर दी। हत्या के बाद मीरा काफी देर तक एकटक बेटे केशव को देखती रही। इसके बाद उठी और बिखरा सामान समेटना शुरू किया। साक्ष्य मिटाए और अपने कमरे में चली गई। सर्वेश भी वहां से निकल गया। सुबह दोनों ने अभिजीत के मौत की खबर भाई और रिश्तेदारों को दी।
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मूलरूप से एटा निवासी रमेश यादव की दो पत्नियां हैं। पहली पत्नी से बेटा आशीष यादव है, जो एटा से विधायक रह चुका है। दूसरी पत्नी मीरा के दो बेटे अभिजीत और अभिषेक हैं। रमेश यादव ने मीरा व उनके बेटों के लिए दारूलशफा में बी-ब्लॉक के 137 नंबर का सरकारी आवास आवंटित कराया था।
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नशे में घर पहुंचकर किया था हंगामा
क्षेत्राधिकारी हजरतगंज अभय कुमार मिश्र के मुताबिक वारदात की रात करीब 11.30 बजे अभिजीत शराब के नशे में घर पहुंचा और हंगामा करने दिया। मां मीरा ने विरोध किया तो वह हमलावर हो गया। इस पर मीरा ने उसे धकेल दिया, जिससे वह दीवार से टकरा गया। इसके बाद मीरा ने उस पर हमला बोल दिया। उसने अभिजीत को पीटने के लिए नौकर सर्वेश को भी बुला लिया। दोनों ने पीटने के बाद गमछे से गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद अभिजीत का शव बिस्तर पर डाल दिया।
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सीने में दर्द से बेटे की मौत की रची कहानी
छोटे बेटे अभिजीत की मौत के बाद मां मीरा और नौकर ने वारदात छिपाने के लिए कहानी तैयार की। इसकी पटकथा मीरा ने लिखी। उसने पुलिस को गुमराह करते हुए बताया कि रात में अभिजीत घर पहुंचा तो सीने और सिर में दर्द की बात कही। इसके बाद उसने बेटे के सिर और सीने पर बाम लगाया। अभिजीत ने आराम मिलने की बात कही तो वह अपने कमरे में सोने चली गई। सुबह देखा तो अभिजीत बेड पर मृत पड़ा था। उसने इसकी सूचना बड़े बेटे अभिषेक को दी। उसने सौतेले भाई व पूर्व विधायक आशीष यादव को इसकी जानकारी दी।
आनन-फानन अंतिम संस्कार कराने की थी योजना
बेटे की हत्या के बाद मीरा ने वारदात छिपाने के पूरे प्रयास किए। इसके तहत उसने आनन-फानन शव का अंतिम संस्कार कराने की योजना बनाई थी। सुबह होते ही परिवारीजनाें को सूचना दे दी। इसके बाद शव लेकर अंतिम संस्कार को निकल पड़े। इसकी जानकारी पर इंस्पेक्टर राधा रमण सिंह और चौकी प्रभारी कृष्णकांत सिंह दारूलशफा पहुंचे। शव के परीक्षण के दौरान अभिजीत के गले पर कसे का निशान मिला। परिवारीजनों ने पुलिस को अर्दब में लेकर वापस भेज दिया। इसके बाद सीओ हजरतगंज अभय मिश्रा पहुंचे, तब तक शव दूसरी मंजिल से नीचे आ चुका था। इसी बीच एसएसपी कलानिधि नैथानी भी पहुंच गए। अधिकारियों के सामने से ही परिवारिजन शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े। इस पर एसएसपी ने तत्काल शव यात्रा रुकवाकर शव पोस्टमार्टम को भेजवाया था।
बिस्तर पर मिले खून के धब्बे तो गहराया शक
वारदात की शाम 4.30 बजे दारूलशफा स्थित आवास पहुंची फोरेंसिक टीम को बिस्तर पर पांच स्थानों पर खून के धब्बे मिले। पुलिस ने जांच के लिए बिस्तर पर बिछी चादर और कमरे से कई अन्य संदिग्ध वस्तुओं को कब्जे में लिया। खून के धब्बे से हत्या की आशंका को बल मिला। एएसपी पूर्वी सर्वेश मिश्रा और एएसपी क्राइम दिनेश कुमार सिंह ने काफी देर तक मीरा यादव से पूछताछ की। इस दौरान उसने कई बार बयान बदले, जिससे पुलिस को संदेह हुआ। जितने भी साक्ष्य पुलिस टीम जुटाकर एक जगह रख रही थी, उसे बार-बार मीरा छीन ले रही थी। इस पर पुलिस ने उसे दूसरे कमरे में भेजा। बिस्तर के आसपास पान मसाले के खाली रैपर व शर्ट का बटन मिला। इस पर मीरा ने कहा कि यह बटन बड़े बेटे अभिषेक की शर्ट का है। मीरा ने पुलिस से छीनकर बटन मेज की दराज में डाल दिया। हालांकि पुलिस ने दोबारा बटन निकालकर रख लिया। सिगरेट के बट व कुछ अन्य संदिग्ध वस्तुएं भी हाथ लगीं।
हरकतों से तंग थी मां, पहले ही रच ली थी मारने की साजिश
नौकर सर्वेश विश्वकर्मा के मुताबिक अभिजीत की हरकतों से मीरा तंग थी। उसने बेटे को मारने की साजिश काफी पहले रच ली थी। उस दिन अभिजीत ने शराब के नशे में जो हरकतें कीं, उससे वह काफी नाराज थी। इसी गुस्से में मीरा ने उसे मारना शुरू कर दिया। मीरा के कहने पर वह भी वारदात में शामिल हुआ और अभिजीत की हत्या कर दी। हत्या के बाद मीरा काफी देर तक एकटक बेटे केशव को देखती रही। इसके बाद उठी और बिखरा सामान समेटना शुरू किया। साक्ष्य मिटाए और अपने कमरे में चली गई। सर्वेश भी वहां से निकल गया। सुबह दोनों ने अभिजीत के मौत की खबर भाई और रिश्तेदारों को दी।