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आठ परिवारों में जवान बेटों को पिता ने दी मुखाग्नि, शव यात्रा में शामिल हुए मंत्री व विधायक

Wed, 10 Jul 2019 01:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jul 2019 01:36 AM IST
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cremation of dead persons who suffer in agra janrath accident
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आठ घरों में जवान बेटों की अर्थी को पिता ने दिया कंधा
लखनऊ। आगरा बस हादसे में राजधानी के 13 लोगों की मौत हुई है। आठ घरों में बुजुर्ग पिताओं के कंधे पर जवान बेटों की अर्थी उठी। तो पूरा इलाका रो पड़ा। आंखों में आंसू के साथ ही परिवार की जिम्मेदारी दिख रही थी। हादसे में मृतकों के घर सुबह से प्रदेश सरकार के मंत्री व विधायकों का आना-जाना लगा रहा। लोग परिवारीजनों को ढांढस बंधाते रहे।
सुहाग के साथ ही छिन गई घर की रोटी
हादसे में सरोजनीनगर के मनोज कुमार की मौत हो गई। वह परिवहन विभाग में नोएडा में तैनात थे। सोमवार देर रात उनका शव आजादनगर स्थित घर पहुंचा। वहां परिवारीजन व रिश्तेदार पहुंचे थे। घर पर पत्नी लीलावती और बहन ऊषा थी। शव लेकर भाई सतीश चंद्र घर आए। सुबह आलमबाग स्थित बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार किया गया। भाई सतीश चंद्र ने मुखाग्नि दी। मनोज के पिता-माता की पहले ही मौत हो चुकी है। हादसे में लीलावती का सुहाग तो छिना ही, साथ में घर की रोटी भी छीन ली। लीलावती पति का शव देखकर बेहोश हो गई।
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लेखाधिकारी के घर फैला सन्नाटा
सरोजनीनगर निवासी सुधीर मिश्रा की भी मौत हादसे में हुई थी। वह दिल्ली में दूर संचार विभाग में लेखाधिकारी के पद पर तैनात थे। शनिवार सुबह घर आए थे। रविवार रात को दिल्ली जा रहे थे। परिवारीजनों के मुताबिक, सुधीर हर शनिवार को लखनऊ आते थे। सुधीर का बेटा उपेंद्र मुंबई में और बेटी नियंता दिल्ली में नौकरी करते हैं। उनका पुश्तैनी मकान हुसैनगंज में है। परिवारीजन शव लेकर हुसैनगंज पहुंचे। वहीं से बैकुंठधाम ले जाकर अंतिम संस्कार किया।
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10 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
हादसे में गोमतीनगर विस्तार स्थित खरगापुर कौशलपुरी निवासी डॉ. मनीष सिंह की भी मौत हो गई। उनका पार्थिव शरीर सोमवार देर रात उनके आवास पर पहुंचा। मौसम खराब होने से सुबह 10 बजे उनका अंतिम संस्कार बैकुंठधाम में किया गया। 10 साल के बेटे वंश ने मुखाग्नि दी। मूलरूप से वह गोंडा केवजीरगंज थानाक्षेत्र के खीरिया मझगवां के रहने वाले थे। तीन भाई व दो बहने हैं। बेटी बड़ी है जो बीकॉम कर रही है। अंतिम संस्कार के बाद परिवार गोंडा के लिए रवाना हो गया।
जवान बेटे को दी मुखाग्नि
मड़ियांव के केशवनगर-2 निवासी अंशुमान अवस्थी के बेटे अविनाश अवस्थी का पार्थिव शरीर सोमवार देर रात घर पहुंचा। मंगलवार सुबह बैकुंठ धाम में अविनाश का अंतिम संस्कार किया गया। पिता अंशुमान ने जवान बेटे को मुखाग्नि दी। वहीं घर पर मां व बहन का बुरा हाल था। मां बेहोश हो गई। अंतिम संस्कार में राजधानी केवरिष्ठ अधिवक्ता व विधायक, मंत्री शामिल हुए।
सेवानिवृत्त पिता ने दिया जवान बेटे की अर्थी को कंधा
इंदिरानगर सेक्टर-11 निवासी आकाश श्रीवास्तव के पिता सतीश चंद्र श्रीवास्तव एचएएल से रिटायर्ड है। सोमवार को हादसे की खबर पहुंची तो पूरे घर मे कोहराम मच गया। देर रात आकाश का शव घर पहुंचा। बेटे का शव देख पिता और मां बदहवास हो गए। मंगलवार सुबह रिश्तेदारों व परिचितों के साथ बुजुर्ग पिता सतीश चंद्र ने अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा दिया। बैकुंठधाम में मुखाग्नि दी।
देर रात पढ़ी जनाजे की नमाज
उधर इंदिरानगर के गायत्री मार्केट स्थित सेक्टर 11 में आफताब अहमद के बेटे इख्तकाब का शव देर रात घर पहुंचा। देर रात को जनाजे की नमाज पढ़ी गई। इसके बाद पास केकब्रिस्तान में दफन किया गया। पिता का शव देखते ही 10 साल की मासूम बेटी इश्मत लिपट कर रोने लगी। तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। उधर गौसनगर में रहने वाली अरीबा खान को देर रात को ही सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
कैसरबाग के कैंट रोड पर सन्नाटा
कैसरबाग के कैंट रोड पर रहने वाले किराना कारोबारी संजीव अग्रवाल और मोटर पार्ट्स कारोबारी मनीष गुप्ता का बेटा आदित्य के शव सोमवार देर रात घर पहुंचे। जवान बेटे आदित्य को पिता मनीष ने बैकुंठधाम में मुखाग्नि दी तो वहीं संजीव अग्रवाल को बेटे राघव ने। दोनों शव यात्रा में प्रदेश सरकार के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक शामिल हुए। उन्होंने परिवारीजनों से मिलकर ढांढ़स बंधाया और सरकारी मदद दिलाने का आश्वासन दिया।

बेटे का शव लेकर हल्द्वानी गए
गोमतीनगर विस्तार सुलभ योजना में रहने वाले प्रेमप्रकाश पांडेय अपने बेटे धीरज का शव लेकर पैतृक गांव हल्द्वानी चले गए। वहीं अंतिम संस्कार किया गया।
.... काश बेटा न आता तो बच जाती जान
एक पिता के लिए दुनिया का सबसे बड़ा दुख जवान बेटे की अर्थी को कंधा देना होता है। यह कहते हुए अरविंद मिश्रा फफक कर रो पड़े। रिश्तेदार और मोहल्ले वाले वाले परिवार का ढांढ़स बंधाने में जुटे थे। मंगलवार सुबह त्रिवेणीनगर अलहुदा स्कूल के पास रहने वाले हिमांशु मिश्रा की घर से अर्थी उठी तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। बीमार मां अपने लाल का चेहरा देख बेहोश हो गई तो पत्नी स्मृति बार-बार बेसुध हो रही थी। वह रोते हुए बोली कि छह माह की बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया। दर्दनाक हादसे से पूरा परिवार बिखर गया। पिता अरविंद मिश्रा ने बताया दिल्ली से हिमांशु हमेशा फ्लाइट से आता जाता था। अरविंद मिश्रा ने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी। बोले, सुबह वह फ्लाइट से घर आया था। परिवार संग कार से लेकर सभी को चंद्रिका देवी मंदिर गया। दर्शन के बाद सभी ने रेस्त्रां में जाकर खाना खाया। शाम को फ्लाइट का टिकट न मिलने पर उसने बस से निकलने की बात कही। चचेरे भाई रेशू ने बताया कि जिस दिन सुबह वह घर आया था तो उसने अपने पुराने दोस्तों से भी मुलाकात की थी।
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