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B.Ed: आसमान छूने के बाद हौसले जमीं पर!
दीप सिंह/लखनऊ
Updated Mon, 21 Oct 2013 10:25 AM IST
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पिछले कुछ वर्षों में बीएड कॉलेजों की बाढ़ सी आ गई। छात्र भी मिल रहे थे तो कॉलेजों को भी यह सौदा मुनाफे का लग रहा था।
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कईयों ने मान्यता के लिए आवेदन की अर्जी लगा दी। इस साल अचानक छात्र मिलने कम हो गए और सीटें भरनी मुश्किल हो गईं तो मान्यता के आवेदन वापस मंगाने लगे हैं।
एनसीटीई में मान्यता के लिए भारी संख्या में आए आवेदन और अब वापसी की छटपटाहट भी इस बात की तस्दीक करती है।
2000 में 700 वापस ले रहे मान्यता
प्रदेश में इस समय 1053 बीएड कॉलेज हैं। मान्यता के लिए आवेदन की लाइन में यूपी के करीब 2000 कॉलेज हैं। वहीं करीब 700 कॉलेज ऐसे हैं, जो मान्यता वापस ले रहे हैं या मान्यता से पहले ही आवेदन वापसी की मांग कर चुके हैं।
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ऐसे मामले इसी साल ज्यादा आए हैं। एनसीटीई की पिछली हर बैठक में यूपी के 500 से लेकर 1000 तक कॉलेजों की मान्यता या मान्यता वापसी के मामले लगे होते हैं।
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इसकी वजह यही है कि प्रदेश में करीब एक लाख, 22 हजार सीटें हैं जो तीन काउंसलिंग के बाद भी नहीं भरी जा सकीं। इसके बाद कॉलेजों को सीधे आवेदन की अनुमति दे दी गई। अभ्यर्थियों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के ऑफर भी दिए जा रहे हैं, इसके बावजूद सीटें खाली पड़ी हैं।
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अब लगा, सौदा घाटे का है
-पहले से चल रहे कॉलजों में इस साल बीएड की सीटें नहीं भरीं। फायदे का सौदा अचानक घाटे का नजर आने लगा।
-कई साल से शिक्षकों की भर्ती न होने के कारण युवाओं का बीएड से मोहभंग हो रहा है। बीएड डिग्री धारकों की संख्या बढ़ती जा रही है और नौकरी के अवसर घटते जा रहे हैं।
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उ. प्र. स्ववित्तपोषी महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी के मुताबिक, नए कॉलेज खुलना छात्रों केहित में है। उनके लिए विकल्प खुलेंगे और वाजिब फीस पर पढ़ाई कर सकेंगे।
विनय मानते हैं कि सरकार को चाहिए कि ऐसी नीतियां बनाए जिससे कॉलेज चल सकें और छात्रों को भी लाभ हो। प्रदेश में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की जरूरत है। ऐसे में जल्दी भर्तियां शुरू कर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए।
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