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Lucknow News: दिसंबर बाद पार्षद कोटे के कार्यों को नहीं मिलेगी मंजूरी
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लखनऊ। पार्षद कोटे का बजट करीब 165 करोड़ रुपये है, लेकिन अभी यह आधा ही खर्च हुआ है। करीब 80 करोड़ से अधिक अभी बचा है। मार्च से पहले ही काम पूरे हो जाएं, इसके लिए नगर निगम ने प्रशासन ने पहली बार सख्त आदेश जारी किया है। इसमें कहा, दिसंबर तक बचे बजट से होने वाले कार्यों के टेंडर जारी नहीं हुए तो फिर वह जारी नहीं होंगे और बजट लैप्स मान लिया जाएगा।
नगर निगम बजट में किए गए प्रावधान के तहत सभी 110 पार्षदों को उनके वार्ड में सड़क, नाली, फुटपाथ निर्माण आदि कार्य के के लिए 1.50 करोड़ का कोटा दिया गया है। पिछले साल तक कोटे की किस्त तीन बार में हर तिमाही पर जारी की जाती थी। इस बार दो किस्त में ही पूरा कोटा जारी किया जा चुका है। पहली किस्त करीब चार महीने पहले, दूसरी दो महीने पहले जारी की गई है। इसके बाद भी पार्षद अभी तक आधे बजट के ही कार्य करा पाए हैं।
पिछले फरवरी तक टेंडर जारी हुए और मार्च के अंतर तक वर्क आर्डर है। ऐसे में करीब 20 करोड़ से अधिक के काम समय से नहीं हो पाए और यह पैसा देनदारी की सूची में चला गया, जिसका भुगतान फंस गया। टेंडर होने के चलते पार्षदों ने दबाव डालकर काम तो करा लिए मगर भुगतान नहीं हुआ। इसे लेकर विवाद चल रहा है और सदन मेंं भी मामला कई बार उठ चुका। इस बार ऐसी स्थिति न आए उसको लेकर दिसंबर तक सभी टेंडर जारी कर मार्च तक काम पूरा कराने की योजना निगम प्रशासन ने बनाई है। मुख्य अभियंता ने सभी इंजीनियरों को आदेश भी जारी कर दिया है।
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नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा ने बताया कि दिसंबर में टेंडर हो जाएंगे तभी मार्च तक काम पूरे हो पाएंगे। इसे देखते हुए सभी इंजीनियरों से कहा गया है कि जिन वार्डों में बजट बचा है वहां के पार्षद से मिलकर काम के प्रस्ताव लेकर फाइलें तैयार कर लें। इससे दिसंबर तक टेंडर जो जाएं और मार्च तक काम भी पूरे हो जाएं। दिसंबर तक टेंडर नहीं होंगे वहां पर फिर जनवरी में टेंडर जारी नहीं किए जाएंगे।
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नगर निगम बजट में किए गए प्रावधान के तहत सभी 110 पार्षदों को उनके वार्ड में सड़क, नाली, फुटपाथ निर्माण आदि कार्य के के लिए 1.50 करोड़ का कोटा दिया गया है। पिछले साल तक कोटे की किस्त तीन बार में हर तिमाही पर जारी की जाती थी। इस बार दो किस्त में ही पूरा कोटा जारी किया जा चुका है। पहली किस्त करीब चार महीने पहले, दूसरी दो महीने पहले जारी की गई है। इसके बाद भी पार्षद अभी तक आधे बजट के ही कार्य करा पाए हैं।
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पिछले फरवरी तक टेंडर जारी हुए और मार्च के अंतर तक वर्क आर्डर है। ऐसे में करीब 20 करोड़ से अधिक के काम समय से नहीं हो पाए और यह पैसा देनदारी की सूची में चला गया, जिसका भुगतान फंस गया। टेंडर होने के चलते पार्षदों ने दबाव डालकर काम तो करा लिए मगर भुगतान नहीं हुआ। इसे लेकर विवाद चल रहा है और सदन मेंं भी मामला कई बार उठ चुका। इस बार ऐसी स्थिति न आए उसको लेकर दिसंबर तक सभी टेंडर जारी कर मार्च तक काम पूरा कराने की योजना निगम प्रशासन ने बनाई है। मुख्य अभियंता ने सभी इंजीनियरों को आदेश भी जारी कर दिया है।
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नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा ने बताया कि दिसंबर में टेंडर हो जाएंगे तभी मार्च तक काम पूरे हो पाएंगे। इसे देखते हुए सभी इंजीनियरों से कहा गया है कि जिन वार्डों में बजट बचा है वहां के पार्षद से मिलकर काम के प्रस्ताव लेकर फाइलें तैयार कर लें। इससे दिसंबर तक टेंडर जो जाएं और मार्च तक काम भी पूरे हो जाएं। दिसंबर तक टेंडर नहीं होंगे वहां पर फिर जनवरी में टेंडर जारी नहीं किए जाएंगे।