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कफ सिरप कांड: यूपी में 2000 करोड़ रुपये का कारोबार, कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब होंगे; ईडी खंगाल रही सिंडीकेट
Mon, 01 Dec 2025 10:26 PM IST
आकाश द्विवेदी
अशोक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अशोक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: आकाश द्विवेदी
Updated Mon, 01 Dec 2025 10:26 PM IST
सार
ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि नशीले कफ सिरप का सिंडीकेट लगभग 2000 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार कर चुका है, जिसके लिए फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
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कफ सिरफ कांड
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
नशीले कफ सिरप की तस्करी करने वाला सिंडीकेट करीब 2000 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुका है। ईडी की प्रारंभिक पड़ताल में यह खुलासा हुआ है। इस सिंडीकेट की जड़ें इतनी गहरी हैं कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी भी हैरत में पड़ गए हैं। फिलहाल सिंडीकेट की सारी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है ताकि उनको संरक्षण देने वाले बाहुबलियों और सफेदपोशों के चेहरों को भी उजागर किया जा सके।
सूत्रों की मानें तो ईडी के अधिकारी इस मामले में एसटीएफ, एसआईटी, जिलों की पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा जुटा चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस सिंडीकेट द्वारा तीन राज्यों और विदेश में करीब 2000 करोड़ रुपये की कफ सिरप की तस्करी की गई है।
जांच में आरोपियों की तमाम कंपनियों, फर्मों और संपत्तियों का भी पता चल रहा है। वहीं जिन फर्जी फर्मों के जरिये यह अवैध कारोबार हो रहा था, उनके बैंक खातों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिल रही हैं। फिलहाल ईडी की लखनऊ और प्रयागराज की टीमें पूरे प्रकरण की गहनता से छानबीन करने में जुटी हैं।
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सूत्रों की मानें तो ईडी के अधिकारी इस मामले में एसटीएफ, एसआईटी, जिलों की पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा जुटा चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस सिंडीकेट द्वारा तीन राज्यों और विदेश में करीब 2000 करोड़ रुपये की कफ सिरप की तस्करी की गई है।
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जांच में आरोपियों की तमाम कंपनियों, फर्मों और संपत्तियों का भी पता चल रहा है। वहीं जिन फर्जी फर्मों के जरिये यह अवैध कारोबार हो रहा था, उनके बैंक खातों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिल रही हैं। फिलहाल ईडी की लखनऊ और प्रयागराज की टीमें पूरे प्रकरण की गहनता से छानबीन करने में जुटी हैं।
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बर्खास्त सिपाही के खिलाफ लुकआउट जारी
वहीं दूसरी ओर इस मामले में आरोपी बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ ने लुक आउट सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दरअसल, एसटीएफ तमाम कोशिशों के बावजूद अभी तक उसे तलाश नहीं पाई है। उसके ठिकानों पर एसटीएफ के छापों में भी कोई अहम सुराग हाथ नहीं लगा है।सूत्रों की मानें तो आलोक सिंह ने राजधानी की एक अदालत में चार दिन पहले आत्मसमर्पण करने की अर्जी भी डाली है। वह गाजियाबाद में दर्ज प्राथमिकी में नामजद है, लखनऊ में दर्ज प्राथमिकी की विवेचना में उसका नाम बढ़ाया गया है।
वहीं सिंडीकेट के आरोपियों को लगातार संरक्षण देने वाले माफिया से भी एसटीएफ अभी तक पूछताछ नहीं कर सकी है। आरोपियों के साथ गहरी सांठगांठ होने के बावजूद उसे तलब नहीं करने से एसटीएफ की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।